डीएम ने की 1 करोड़ से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की सख़्त समीक्षा

  • कोई भी योजना अधूरी नहीं रहनी चाहिए, हर परियोजना समय पर और गुणवत्तापूर्ण के साथ पूरा करने के दिए निर्देश

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद में विकास कार्यों की रफ्तार तेज करने के उद्देश्य से बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में सीएमआईएस पोर्टल पर प्रदर्शित एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की गहन समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि जनता से जुड़े किसी भी कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कोई भी योजना अपूर्ण नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर योजना को समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराया जाए।
अगस्त माह तक जनपद में कुल 301 परियोजनाएं दर्ज हैं। इनमें से 151 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 136 परियोजनाएं अभी अपूर्ण हैं और 14 परियोजनाएं विलंबित हैं। ये परियोजनाएं कई विभागों और निर्माण संस्थाओं से जुड़ी हुई हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड, जल निगम (अर्बन एवं ग्रामीण), राज्य सेतु निगम लिमिटेड, यूपी प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड, आवास एवं विकास परिषद, यूपी सिडको, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, मंडी परिषद, पुलिस आवास निगम और ग्रामीण अभियंत्रण सेवा समेत अन्य संस्थाएं शामिल हैं।

जिलाधिकारी ने जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी को निर्देश दिया कि लागत के आधार पर परियोजनाओं की अलग-अलग बुकलेट तैयार की जाए। इनमें पांच से पचास लाख, पचास लाख से एक करोड़ और एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली योजनाओं की पूरी जानकारी दर्ज होनी चाहिए। बुकलेट में परियोजना की शुरुआत और समाप्ति की तिथि, धनराशि का विवरण और यदि कोई विवाद है तो उसका उल्लेख भी अनिवार्य रूप से होना चाहिए। डीएम ने कहा कि इससे यह स्पष्ट रहेगा कि कहां कौन-सा काम चल रहा है और कहां देरी हो रही है। जिलाधिकारी ने धीमी गति से चल रही और अधूरी परियोजनाओं पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अक्सर छोटी परियोजनाओं को भी कार्यदायी संस्थाएं लंबे समय तक लंबित रखती हैं या काम शुरू ही नहीं करतीं। इससे जनता को असुविधा होती है और शासन-प्रशासन की छवि धूमिल होती है। उन्होंने चेतावनी दी कि अब हर परियोजना चाहे छोटी हो या बड़ी, उसे तय समयसीमा में ही पूरा करना होगा और गुणवत्ता से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।

डीएम ने यह भी निर्देश दिया कि जो परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, उन्हें तुरंत संबंधित विभाग को हैंडओवर किया जाए। हैंडओवर लेने से पहले अधिकारी स्वयं परियोजना की पूरी तरह जांच करें। यदि बाद में कोई कमी या खामी सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी सीधे संबंधित अधिकारी की होगी। समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों की उपस्थिति पर भी सख्ती दिखाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी समीक्षा बैठक में संबंधित अधिकारी का रहना अनिवार्य है। अनुपस्थित रहने वालों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि हर अधिकारी को अपने विभाग में चल रही परियोजनाओं और योजनाओं की पूरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि कार्यों में विलंब की स्थिति उत्पन्न न हो। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल, आईएएस अयान जैन और कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने दोहराया कि शासन-प्रशासन की असली पहचान समय पर और गुणवत्तापूर्ण कार्यों से ही होती है। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ ने कहा कि जनता के लिए चलाई जा रही कोई भी योजना अधूरी नहीं रहनी चाहिए। छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी परियोजना हमारी प्राथमिकता है। समय पर और गुणवत्तापूर्ण काम ही प्रशासन की असली पहचान है। लापरवाही और टालमटोल कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।