-इंदिरापुरम योजना का ड्रोन से होगा सर्वे, एक सप्ताह में तैयार होगी विस्तृत रिपोर्ट: उपाध्यक्ष
-जीडीए व नगर निगम के अधिकारियों की संयुक्त कमेटी का पूरा हुआ सर्वे
गाजियाबाद। जीडीए की इंदिरापुरम आवासीय योजना को नगर निगम को हैंडओवर करने की कवायद तेज हो गई है। जीडीए व निगम के अधिकारियों की संयुक्त कमेटी का सर्वे पूरा होने के बाद अब ड्रोन से सर्वे होगा। इसके साथ ही एक सप्ताह के भीतर इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इंदिरापुरम आवासीय योजना को नगर निगम को हैंडओवर करने के लिए पिछले 13 साल तक पत्राचार चला, मगर निष्कर्ष कुछ नहीं निकला। मगर अब इंदिरापुरम आवासीय योजना को नगर निगम को हैंडओवर करने के लिए जीडीए वीसी अतुल वत्स की ओर से कार्यवाही में रफ्तार तेज हो गई है। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता हटने के बाद हैंडओवर करने की प्रक्रिया परवान चढ़ सकेगी। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स का कहना है कि इंदिरापुरम योजना को नगर निगम को हैंडओवर करने की प्रक्रिया जारी है। जीडीए और नगर निगम के अधिकारियों की संयुक्त कमेटी ने योजना का सर्वे पूरा कर लिया है। इसका अब ड्रोन से सर्वे होगा। इसके साथ ही एक सप्ताह के भीतर इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार होगी। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, जीडीए ने वर्ष-1987 में इंदिरापुरम योजना को बसाना शुरू किया था। इंदिरापुरम में सबसे पहले न्याय खंड को बसाया गया। जीडीए की यह 1222 एकड़ में फैली इंदिरापुरम कॉलोनी में वर्ष-1994 में लोगों ने रहना शुरू किया। इसके बाद वर्ष-2009 में हुई जीडीए बोर्ड बैठक में अधिकारियों ने इस योजना को पूरा करने का प्रस्ताव पास कर दिया। इसके बाद जीडीए की तरफ से वर्ष-2011 में इंदिरापुरम को हैंडओवर करने के लिए नगर निगम को पत्र भेजा गया। पिछले 13 साल से जीडीए अब तक पत्राचार करता आ रहा है। जबकि इंदिरापुरम योजना में 1.50 लाख से अधिक आबादी रहती है। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने इंदिरापुरम को नगर निगम को हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए एक कमेटी बनाई है। जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में बनी कमेटी में जीडीए और नगर निगम के सभी अनुभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है।
इन्होंने इंदिरापुरम योजना का संयुक्त सर्वे भी कर लिया है। अब ड्रोन से सर्वे किया जाएगा। इसके बाद एक हफ्ते में इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार होगी। जिसमें सभी अनुभागों का विस्तार से जिक्र किया जाएगा। लोकसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता हटने के बाद इसे हस्तांतरण करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इंदिरापुरम को लेकर कमेटी जो रिपोर्ट तैयार करेगी। उसमें सभी अनुभागों की जानकारी विस्तृत रूप से होगी। उसमें यह बताया जाएगा कि इंदिरापुरम से कमाई कितनी होती है और खर्च कितना किया जाता है। योजना में पार्क, सड़कें, सीवरेज, ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट्स, कूड़ा निस्तारण केंद्रों की कितनी संख्या है और इन पर कितना खर्च होता है और उनकी कैसी स्थिति है।
इसके साथ ही वहां पर कितनी कीमत की संपत्ति है। इंदिरापुरम में नगर निगम के कुल सात वार्ड है। इनमें से ज्यादातर पार्षद अपने हिस्से का फंड क्षेत्र में खर्च ही नहीं कर पाते हैं। ऐसे में यह योजना निगम को हैंडओवर हो जाती है, तो यह पार्षद अपने हिस्से का फंड यहां खर्च कर सकेंगे, जिससे क्षेत्र की टूटी सड़कों से लोगों को निजात मिलेगी। साथ ही क्षेत्र का ड्रेनेज सिस्टम में भी सुधार होगा। वहीं, बदहाल पड़े पार्क और ग्रीन बैल्ट में भी हरियाली लौटेगी। कूड़े की समस्या का निस्तारण, खराब स्ट्रीट लाइट, सीवरेज आदि की समस्या भी दूर हो सकेगी।
















