लीज होल्ड व्यवस्था से परेशान उद्यमी, औद्योगिक विकास के लिए जमीन की आजादी जरूरी: नीरज सिंघल

-ए-20 फोरम के बैनर तले 100 से अधिक औद्योगिक संगठन एकजुट, एक मंच पर 22 राष्ट्रीय औद्योगिक संगठन, फोरम यह मांग कर रहा है कि उत्तर प्रदेश में भी हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों की तरह लीज होल्ड भूमि को फ्री होल्ड में परिवर्तित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह फ्री होल्ड व्यवस्था कुछ शर्तों के साथ लागू होनी चाहिए, जिससे भूमि का प्रयोग केवल औद्योगिक उपयोग के लिए ही हो। उन्होंने कहा कि जो इकाइयाँ एक निर्धारित समय से उत्पादन कर रही हैं, उन्हीं को यह सुविधा मिले, जिससे इसका दुरुपयोग न हो। आईआईए के एमएसएमई पॉलिसी चेयरमैन प्रदीप गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक नीति जारी की थी, जिसमें एक हेक्टेयर या उससे अधिक भूमि पर कार्यरत इकाइयों के लिए फ्री होल्ड की सुविधा दी गई थी। लेकिन यह नीति सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए लागू नहीं हो पाई, जिससे हजारों छोटे उद्यमी इस सुविधा से वंचित रह गए।

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने और उद्यमियों की दशकों पुरानी मांग को पूरा करने के लिए अब एक बार फिर आवाज़ बुलंद हुई है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज सिंघल ने बुधवार को गाजियाबाद में आयोजित एक प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश सरकार से लीज होल्ड औद्योगिक क्षेत्रों की भूमि को फ्री होल्ड में बदलने की पुरज़ोर मांग की। उन्होंने कहा कि यह मांग न केवल औद्योगिक जगत की ज़मीनी हकीकत को दर्शाती है, बल्कि इससे प्रदेश में औद्योगिक निवेश का माहौल भी सुदृढ़ होगा। कविनगर स्थित एक होटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए नीरज सिंघल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के अधिकांश औद्योगिक क्षेत्र उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के अधीन हैं, और इन क्षेत्रों में उद्यमियों को जमीन केवल लीज होल्ड आधार पर उपलब्ध कराई जाती है। इस व्यवस्था में हर छोटे-बड़े कार्य के लिए यूपीसीडा की अनुमति आवश्यक होती है, जिससे उद्यमियों को कई बार महीनों का इंतजार करना पड़ता है और अनावश्यक दौड़भाग करनी पड़ती है।

सिंघल ने इस प्रक्रिया को समय की बर्बादी और उद्यमशीलता के विकास में बाधा बताते हुए कहा कि कारण आईआईए और अन्य औद्योगिक संगठनों ने मिलकर ‘ए-20 फोरमÓ का गठन किया है, जिसका मकसद देशभर में लीज होल्ड से फ्री होल्ड की नीति को लागू कराना है। फोरम यह मांग कर रहा है कि उत्तर प्रदेश में भी हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों की तरह लीज होल्ड भूमि को फ्री होल्ड में परिवर्तित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह फ्री होल्ड व्यवस्था कुछ शर्तों के साथ लागू होनी चाहिए, जिससे भूमि का प्रयोग केवल औद्योगिक उपयोग के लिए ही हो। उन्होंने कहा कि जो इकाइयाँ एक निर्धारित समय से उत्पादन कर रही हैं, उन्हीं को यह सुविधा मिले, जिससे इसका दुरुपयोग न हो। आईआईए के एमएसएमई पॉलिसी चेयरमैन प्रदीप गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक नीति जारी की थी, जिसमें एक हेक्टेयर या उससे अधिक भूमि पर कार्यरत इकाइयों के लिए फ्री होल्ड की सुविधा दी गई थी। लेकिन यह नीति सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए लागू नहीं हो पाई, जिससे हजारों छोटे उद्यमी इस सुविधा से वंचित रह गए।

आईआईए गाजियाबाद चैप्टर के चेयरमैन संजय अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में उद्यमियों को बैंक लोन की सीमा में बदलाव से लेकर व्यवसायिक साझेदारी में परिवर्तन, प्रॉपर्टी का किराया या स्थानांतरण, सभी कार्यों के लिए कानपुर स्थित यूपीसीडा मुख्यालय की अनुमति लेनी पड़ती है। यह प्रक्रिया न केवल जटिल है, बल्कि उद्यमी की उत्पादकता और नए निवेश की गति को भी धीमा करती है। गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा कि यदि औद्योगिक भूमि को फ्री होल्ड कर दिया जाए, तो उद्यमियों का समय और संसाधन दोनों की बचत होगी। इससे न केवल नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नई नौकरियों के अवसर भी बढ़ेंगे और स्थानीय लोगों को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। प्रेस वार्ता में कई अन्य प्रमुख उद्योग संगठन भी उपस्थित रहे। इनमें एआईएमए के अध्यक्ष सुशील अरोड़ा, एआईएमएमए के अध्यक्ष ब्रिजेश अग्रवाल, एएससीएमए के अध्यक्ष सत्यभूषण गुप्ता, सचिव हर्ष अग्रवाल, कोषाध्यक्ष संजय गर्ग, यश जुनेजा, साकेत अग्रवाल सहित दर्जनों उद्यमियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और इस अभियान को समर्थन देने की घोषणा की। उद्योग जगत की यह साझा मांग अब राज्य सरकार के समक्ष एक सशक्त प्रस्ताव के रूप में खड़ी हो चुकी है। सभी की नजरें अब सरकार के आगामी फैसले पर टिकी हैं, जिससे तय होगा कि क्या उत्तर प्रदेश भी देश के उन राज्यों की सूची में शामिल होगा, जहां उद्यमिता को जमीन की पूरी आज़ादी प्राप्त है।

ए-20 फोरम: औद्योगिक एकता की नई ताकत
प्रेस वार्ता में बताया गया कि इस मुद्दे को लेकर ए-20 फोरम का गठन किया गया है, जिसमें 22 राष्ट्रीय, 12 प्रदेश स्तरीय और 83 जनपद स्तरीय औद्योगिक संगठन शामिल हैं। यह फोरम केंद्र और राज्य सरकारों के समक्ष लीज होल्ड को समाप्त कर फ्री होल्ड व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहा है। गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा कि फ्री होल्ड ज़मीन न केवल उद्यमियों को प्रशासनिक स्वतंत्रता देगी, बल्कि इससे यूपी में निवेश का माहौल भी

राजस्व और रोजगार में होगी बेतहाशा वृद्धि
उद्योगपतियों का मानना है कि यदि लीज होल्ड भूमि को फ्री होल्ड कर दिया जाए तो उत्तर प्रदेश सरकार को भी राजस्व में बड़ा फायदा होगा। उद्योगपतियों को दी गई स्वतंत्रता से नए औद्योगिक इकाइयां खुलेंगी, जिससे न केवल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि होगी, बल्कि बेरोजगारी की दर में भी कमी आएगी। इससे मेक इन यूपी और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जैसे अभियानों को वास्तविक जमीन पर सफलता मिलेगी।