103 तस्करों को पहुंचाया जेल, लोकसभा चुनाव के दौरान शराब की कालाबाजारी रोकने के लिए आबकारी विभाग की टीम बिना दिन-रात देखें लगातार चेकिंग एवं शराब तस्करों के ठिकानों पर दबिश देती रही। चुनावी सीजन के दौरान 82 दिन चले चोर-पुलिस के खेल में जहां करीब 42 लाख की शराब को जब्त किया गया तो वहीं अवैध शराब के कारोबार में लिप्त सैकड़ों लोगों को सलाखों के पीछे भेजने का काम किया है। आबकारी विभाग सिर्फ शराब तस्करों पर ही कार्रवाई नही करता है, बल्कि आबकारी अधिनियम की धज्जियां उड़ाने वाले शराब विक्रेता, बार, रेस्टोरेंट संचालक आदि पर भी कार्रवाई करता है। इन सबके बीच में समाजहित में भी अवैध शराब के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जागरुक करता रहता है।
उदय भूमि
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बारे में तो आप जानते ही होंगे, जिसे तहजीब का शहर या नवाबों के शहर के नाम से भी जाना जाता है। मगर पिछले कुछ वर्षों में नवाबों का शहर शराब माफिया के लिए उत्तर प्रदेश का सबसे सुरक्षित स्थान था। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शराब माफिया की जड़ें इतनी गहरी थी, जिसे हिला पाना किसी भी सरकारी विभाग के लिए इतना आसान नही था। या फिर यूं कहा जाए कि आज तक शराब माफिया पर कार्रवाई करने से हर कोई बच रहा था। त्योहारी सीजन और चुनाव के समय जो शराब माफिया अपने अवैध शराब के धंधे से करोड़ों की कमाई करते थे, वही आज हजारों भी कमा नहीं पा रहे है।
उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में शराब माफिया का बोलबाला है। अवैध शराब के कारोबार को खत्म करने आबकारी विभाग के राजस्व में बढ़ोतरी करना आबकारी विभाग के अधिकारियों कंधे पर होती है। वहीं अगर सरकारी खाते को भूल कर अपनी जेब भरनी हो तो शराब माफिया की बल्ले-बल्ले हो जाती है और गलती से अगर शराब माफिया का पाला किसी तेज तर्रार और ईमानदार अधिकारी से पड़ जाए तो कमाई छोड़ उसके घर का ठिकाना भी बदल जाता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भले ही जिला आबकारी अधिकारी राकेश कुमार सिंह को चार्ज संभाले ज्यादा समय नहीं हुआ है। लेकिन इतने कम समय में जिला आबकारी अधिकारी ने अपनी कार्रवाई से एक बार फिर साबित करके दिखा दिया कि काम कोई भी अगर शिद्दत से किया जाए तो मुश्किल नहीं है।
जिला आबकारी अधिकारी की स्पेशल टीम ने होली पर्व को सकुशल संपन्न कराने के साथ-साथ लोकसभा चुनाव को भी सकुशल संपन्न कराने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। आबकारी विभाग की कार्रवाई के चलते शराब माफिया की लखनऊ में इस बार दाल नहीं गलने दी। इसके साथ ही शराब की दुकानों पर होने वाली ओवर रेटिंग पर अपना कंट्रोल कर लिया। लोकसभा चुनाव के दौरान शराब की कालाबाजारी रोकने के लिए आबकारी विभाग की टीम बिना दिन-रात देखें लगातार चेकिंग एवं शराब तस्करों के ठिकानों पर दबिश देती रही। चुनावी सीजन के दौरान 82 दिन चले चोर-पुलिस के खेल में जहां करीब 42 लाख की शराब को जब्त किया गया तो वहीं अवैध शराब के कारोबार में लिप्त सैकड़ों लोगों को सलाखों के पीछे भेजने का काम किया है। आबकारी विभाग सिर्फ शराब तस्करों पर ही कार्रवाई नही करता है, बल्कि आबकारी अधिनियम की धज्जियां उड़ाने वाले शराब विक्रेता, बार, रेस्टोरेंट संचालक आदि पर भी कार्रवाई करता है। इन सबके बीच में समाजहित में भी लोगों को अवैध शराब के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाकर जागरुक करता रहता है। जिला आबकारी अधिकारी ने जिसे जिले में अपनी कमान संभाली है, वहां पर अपनी अनोखी छाप छोड़ी है।
लखनऊ का चार्ज संभालने के बाद सबसे पहले इंस्पेक्टरों के साथ बैठक कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर उनकी कार्यशैली में बदलाव लाने का प्रयास किया। जिसके बाद से शुरु हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई ने लखनऊ में अवैध शराब का कारोबार करने वाले माफिया व तस्करों में हड़कंप मच दिया। आम लोगों की जान से खेलने वाले शराब माफिया पर आबकारी विभाग कहर बनकर टूट रही है। आलम यह है कि उत्तर प्रदेश में नकली और अवैध शराब पर आबकारी विभाग की सख्ती का अब बड़ा असर देखने को मिल रहा है। आबकारी विभाग के अधिकारियों ने कोआर्डिनेशन के साथ नकली व अवैध शराब के खिलाफ लगातार मुहिम चलाई और इसमें लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें सलाखों के पीछे भेजा। जरूरत के आधार पर कई अन्य विभागों की मदद ली गई, जबकि जनभागीदारी के माध्यम से मिलीं सूचनाओं पर भी तत्काल प्रभाव से कार्यवाही सुनिश्चित की गई।
103 तस्करों को चुनाव में शराब का धंधा करना पड़ा भारी
लोकसभा चुनाव के दौरान लगे आचार संहिता के दौरान आबकारी विभाग के निरीक्षक इंस्पेक्टर भूपेन्द्र सिंह, विजय शुक्ला, विवेक सिंह, रजनीश प्रताप सिंह, कृष्ण कुमार सिंह, कृति प्रकाश पाण्डेय, अभिषेक सिंह, विजय राठी, सुभाष चन्द्र, अरविंद बघेल, कौशलेन्द्र रावत, लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, रिचा सिंह और सुनीता ओझा की स्पेशल टीम 16 मार्च से लेकर 6 जून तक चलाए गए अभियान के बीच ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 103 शराब तस्करों को जेल भेज दिया। आबकारी विभाग की टीम ने 592 अभियोग पंजीकृत किए। जिसमें 11 हजार 983 बल्क लीटर शराब बरामद किया गया। साथ ही 240 लीटर ताड़ी और 8 हजार 550 किलोग्राम लहन को मौके पर नष्ट किया। लखनऊ में चुनाव के दौरान महुआ शराब की डिमांड बढऩे लगी थी।
ग्रामीण क्षेत्र में वोटरों को लुभाने के लिए प्रत्याशी के समर्थकों ने कच्ची शराब का निर्माण करने वाले ठेकेदारों को पहले ही ठेका दे दिया था। जिसके चलते घर से लेकर, आम के बाग, खेत, नदी किनारे आदि स्थानों पर दिन-रात शराब की भट्टी जल रही थी। भले ही अवैध शराब का निर्माण करने वाले ठेकेदार कच्ची शराब का निर्माण कर रहे थे, लेकिन आगे उनकी यह सप्लाई नही हो पाई। महुआ शराब के धंधे को जड़ से खत्म करने के लिए आबकारी विभाग की टीम ने दिन-रात ग्रामीण क्षेत्र में अवैध शराब के अड्डों के पास अपना डेरा डाला हुआ था। इधर शराब की भट्टी जलती तो उधर आबकारी विभाग की टीम पहुंच कर ध्वस्त कर रही थी। यह खेल एक दिन नहीं बल्कि दो माह से अधिक लगातार चलता रहा। बरामद 11 हजार 983 बल्क लीटर शराब की कीमत करीब 42 लाख रुपये है।
सरकार का खाता भरने के लिए उठाए गए ठोस कदम
आबकारी विभाग की टीम ने सरकार का खाता भरने के लिए हर संभव प्रयास किए। जिसके चलते शराब की दुकानों से होने वाली बिक्री को बढ़ाने के साथ-साथ रेस्टोरेंट, बार और होटल से मिलने वाले रेवेन्यू पर अपना फोकस किया। ऑकेजनल बार लाइसेंस से होने वाली कमाई सरकार के लिए मानो अतिरिक्त कमाई का जरिया है। जिसके चलते लखनऊ में होने वाली शराब पार्टी के लिए आबकारी विभाग की टीम लाइसेंस जारी किए। बिना लाइसेंस के शराब पार्टी करने वालों को सलाखों के पीछे भेजा तो वहीं शराब पर ओवर रेटिंग करने वाले विक्रेताओं पर भी नकेल कसी गई। दुकान पर शराब की ओवर रेटिंग होने से कहीं न कहीं दुकान के राजस्व पर भी इसका असर पड़ता है। जिसके लिए आबकारी अधिकारी ने शराब विक्रेताओं के साथ बैठक कर स्पष्ट रुप से चेतावनी दे दी कि नियमानुसार शराब बिक्री नहीं करने वालों की जगह जेल होगी। जिसमें कोई रियायत नहीं होगी, साथ ही अनुज्ञापी पर भी कार्रवाई तय है। आबकारी विभाग की इस चेतावनी का असर यह रहा कि लखनऊ में शराब विक्रेता अपने लालच को त्याग कर नियमानुसार शराब की बिक्री करने लगे।
अवैध शराब के कारोबार में लिप्त लोगों पर कार्रवाई करना और सरकार के राजस्व को बढ़ाना आबकारी विभाग का दायित्व है। होली पर्व व चुनाव के दौरान बाहरी राज्यों से होने वाली शराब तस्करी रोकने में आबकारी विभाग की टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया है। आपसी समन्वय के चलते ही होली व चुनाव के दौरान शराब तस्कर अपने इरादों में कामयाब नहीं हो पाए है। लखनऊ एक्सप्रेस-वे, सीतापुर, सुल्तानपुर, अयोध्या हाईवे पर आबकारी विभाग की टीम द्वारा 24 घंटे निगरानी रखी गई। साथ ही शराब की दुकानों पर भी लगातार निरीक्षण करने के साथ गोपनीय टेस्ट परचेजिंग कराई जा रही है। मुखबिर के जरिए सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाती है। जनपद को शराब तस्करों के कब्जे से मुक्त रखने की मुहिम निरंतर चलाई जा रही है। इसमें कामयाबी भी मिल रही है। सभी आबकारी निरीक्षक गंभीरता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

राकेश कुमार सिंह
जिला आबकारी अधिकारी
लखनऊ।
चुनाव हो या फिर कोई त्यौहार शराब तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। आबकारी विभाग अपनी कार्रवाई के साथ-साथ लोगों को अवैध शराब के खिलाफ जागरूक भी करता रहता है। इस तरह के अभियान से लोगों में जागरूकता देखने को मिलती है। जब लोग जागरुक होंगे तो खुद ही अपने आसपास होने वाले अवैध शराब की सूचना आबकारी विभाग को देंगे। लखनऊ को अवैध शराब के कारोबार से पूरी तरह से मुक्त करने के लिए आबकारी विभाग की कार्रवाई और मुहिम लगातार जारी है। लखनऊ में बाहरी राज्यों से की शराब की तस्करी कम होती है, मगर ग्रामीण क्षेत्र में महुआ शराब का निर्माण अधिक है। ग्रामीण क्षेत्र को अवैध शराब के चंगुल से मुक्त करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जिससे लोग इस धंधे को छोड़कर अन्य रोजगार कर अपना जीवन यापन कर सकें। आबकारी विभाग कार्रवाई करने के साथ सुधरने का भी मौका दे रहा है। अवैध शराब के खिलाफ आबकारी विभाग की कार्रवाई भविष्य में भी लगातार जारी रहेगी। राकेश कुमार सिंह
जिला आबकारी अधिकारी
लखनऊ।






















