फैमिली आईडी आवेदन के एक सप्ताह के अंतराल में करे स्वीकृत या अस्वीकृत: जिलाधिकारी

-फैमिली आईडी बनने से पात्र लाभार्थियों को समय अंतराल में मिलेगा योजनाओं का लाभ
-बाल श्रम अधिनियम की विस्तार से आमजन को जानकारी देने के दिए निर्देश
-आयु परीक्षण में होने वाले विलम्ब की समस्या, स्वास्थ्य विभाग को दिए 48 घंटों में कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश

गाजियाबाद। एक परिवार, एक पहचान के तहत अब सरकार फैमिली आईडी जारी की जा रही है। उत्तर प्रदेश में राशन कार्ड के जरिए परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। लेकिन, अब उत्तर प्रदेश में आप फैमिली आईडी बनवाकर भी केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ ले सकते हैं। फैमिली आईडी के तहत यूपी में रहने वाले परिवारों का लाइव डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इस योजना के तहत हर एक परिवार को फैमिली आईडी के तहत एक विशिष्ट नंबर जारी किया जा रहा है। शासन की योजना को धरातल पर उतारने के लिए इसी क्रम में बुधवार को जिलाधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह ने अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि फैमिली आईडी के आवेदन एक सफ्ताह के अंतराल में स्वीकृत करें या अस्वीकृत करें। जिलाधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह ने फैमिली आईडी बनाने एवं जनपद स्तरीय बाल श्रम उन्मूलन समिति एवं बंधुआ श्रम सतर्कता समिति की संयुक्त बैठक की। जिलाधिकारी ने कहा कि शासनादेश के अनुसार फैमिली आईडी के तहत यूपी में रहने वाले परिवारों का लाइव डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।

एक परिवार-एक पहचान योजना के तहत हर एक परिवार की फैमिली आईडी के तहत एक विशिष्ट नंबर जारी किया जा रहा है। प्रदेश सरकार का उद्देश्य योजनाओं का बेहतर प्रबंधन करना है। जिससे लाभार्थियों को समय से इसका लाभ मिल सकें। जिलाधिकारी ने बैठक में जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी को निर्देशित किया कि फैमिली आईडी जल्द से जल्द बनाने के लिए बेहतर प्लानिंग करें और टीम बनाकर फैमिली आईडी बनाई जाएंं। उन्होंने कहा कि शासनादेश के तहत 27 विभागों द्वारा फैमिली आईडी बनाई जानी है। आवेदन कर्ताओं के आवेदन के एक सफ्ताह के अंतराल में आदेवन को स्वीकृत व अस्वीकृत करने का समय है। इसलिए संबंधित सभी विभाग अधिकारी पूर्ण कर्तव्यनिष्ठा के साथ फैमिली आईडी के कार्य को पूर्ण करें। जिलाधिकारी ने चिन्हांकित बाल श्रमिकों के शैक्षिक पुनर्वासन के संबंध में श्रम विभाग एवं जिला बेसिक शिक्षा विभाग को शत-प्रतिशत बच्चों को प्रवेश कराने और बाल श्रमिकों के परिवार के सदस्यों को शासन से संचालित विभिन्न रोजगार परक योजनाओं से भी आच्छादित किए जाने के निर्देश दिए। बैठक में जिलाधिकारी को एन्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट थाना प्रभारी तरूणा सिंह व श्रम प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा चिन्हित बाल श्रमिकों के आयु परीक्षण में होने वाले विलंब की समस्या के बारे में अवगत कराया।

जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अखिलेश मोहन को  शासनादेश के तहत बाल श्रमिकों के प्रस्तुतीकरण के उपरांत 48 घंटों में आयु परीक्षण संबंधित कार्रवाई पूर्ण कराए जाने के सख्त निर्देश दिए। बंधुआ श्रम सतर्कता समिति के तहत जिलाधिकारी ने श्रम विभाग एवं एसडीएम को निर्देशित किया कि आपसी समन्वय करते हुए लंबित समरी ट्रायल का त्वरित निस्तारण कराया जाए। जिससे अवमुक्त बंधुआ श्रमिकों के पुनर्वासन की कार्रवाई तेज गति से कराई जा सकें। मानवाधिकार आयोग एवं अन्य स्रोतों से प्राप्त होने वाली बंधुआ श्रम से संबंधित शिकायतों के मामले में एसडीएम और श्रम विभाग के अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने बाल श्रम अधिनियम के अंतर्गत किन कार्यों,नियोजनों में बाल श्रम निषिद्ध है।

इसके साथ ही अधिनियम में प्राविधानित विनियमन के सापेक्ष किन कार्यों में किशोर श्रमिकों से निहित शर्तोंं के तहत कार्य कराया जा सकता है। इसकी जानकारी श्रमिकों सेवायोजक संगठनों को भी दी जाए। आमजन को भी इस संबंध में अवगत कराए जाने के लिए उप श्रमायुक्त को निर्देश दिए गए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल, एडीएम प्रशासन रणविजय सिंह, एसडीएम मोदीनगर डॉ. पूजा गुप्ता, एसडीएम सदर अरूण दीक्षित, डीएसटीओ डॉ. राजेश श्रीवास्तव, उप श्रम आयुक्त अनुराग मिश्रा, जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी यादव, लीड बैंक मैनेजर बुद्धराम, सहायक श्रमायुक्त, श्रम प्रवर्तन अधिकारी, एएचटीयू प्रभारी तरूणा सिंह, उप कृषि निदेशक रामजतन मिश्रा आदि अधिकारियों की मौजूद रहें।