शिलान्यास : पीएम मोदी बोले, सुविधाओं का खजाना साबित होगा नोएडा एयरपोर्ट

ग्रेटर नोएडा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का शिलान्यास कर दिया। इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनने के लिए कार्यक्रम स्थल पर नागरिकों का हुजूम उमड़ पड़ा। शिलान्यास समारोह में पीएम मोदी ने नोएडा एयरपोर्ट की खासियत गिनाने के साथ-साथ भविष्य में इससे होने वाले लाभों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नोएडा एयरपोर्ट सुविधाओं का खजाना साबित होगा। पीएम ने किसानों को भी साधने की कोशिश की। जेवर एयरपोर्ट का शिलान्यास करने से पहले पीएम मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ ने वहां पर आयोजित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। नोएडा एयरपोर्ट से सितंबर 2024 अंत तक एक रनवे के साथ उड़ान सेवाएं प्रारंभ होने की संभावना है। शिलान्यास समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज हम 85 फीसदी विमानों को एमआरओ सेवा के लिए विदेश भेजते हैं। इस काम के पीछे प्रतिवर्ष 15 हजार करोड़ रुपए खर्च होते हैं। सरकार ने बढ़ाई गन्ने की मिठास : सीएम योगी
30 हजार करोड़ में यह प्रोजेक्ट बनने वाला है। पीएम मोदी ने कहा कि अब यह एयरपोर्ट इस स्थिति को भी बदलने में सहायता करेगा। इसके जरिए पहली बार देश में एंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल कार्गो हब की कल्पना भी साकार हो रही है। इससे इस पूरे क्षेत्र के विकास को एक नई गति मिलेगी। एक नई उड़ान मिलेगी। उन्होंने कहा कि गरीब हो या मध्यम वर्ग, किसान हो या व्यापारी, मजदूर हो या उद्यमी, हर किसी को इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में जेवर एयरपोर्ट भी सुविधाओं का खजाना साबित होगा। शिलान्यास समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के किसानों के गन्ने की मिठास बढ़ाने का काम उप्र सरकार ने केंद्र के साथ मिलकर किया है। उन्होंने यूपी सरकार की कुछ योजनाओं की भी जानकारी दी। सीएम योगी ने कहा कि इन योजनाओं से लाखों नागरिकों को रोजगार मिलेगा। जेवर एयरपोर्ट पर सर्वाधिक निवेश
नोएडा एयरपोर्ट का पहला चरण 3 साल में पूर्ण हो जाएगा। यानी 2024 तक पहले चरण का काम निपट जाएगा। पहले चरण के कार्य पर 4 हजार 588 करोड़ रुपये की लागत आएगी। नागरिक उडड्यन सचिव राजीव बंसल के मुताबिक इस सेक्टर में जेवर एयरपोर्ट पर सर्वाधिक निवेश किया जा रहा है। देश में फिलहाल 3 ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट बनाए जा रहे हैं। यह गोवा, नवी मुंबई और जेवर में होंगे। जेवर एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी सेंटर के तौर पर भी उभरेगा। जेवर के आस-पास काफी घनी आबादी वाले शहर हैं। इन शहरों को व्यापक पैमाने पर घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी की आवश्यकता है। यूपी में लखनऊ, आगरा, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, हिंडन, बरेली, कुशीनगर व वाराणसी में एयरपोर्ट हैं। अगले वर्ष 2022 में अलीगढ़, चित्रकुट, आजमगढ़, मुरादाबाद और श्रावस्ती में भी एयरपोर्ट तैयार हो जाएंगे। एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट
2024 में जेवर एयरपोर्ट ऑपरेशन हो जाएगा। इस एयरपोर्ट से उड़ान भरने पर प्रत्येक यात्री से सरकार को 400.97 रुपए का शुल्क मिलेगा। जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के भविष्य को प्रभावित करेगा। इसमें 34 हजार करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है। ये एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा। पहली बार 2001-02 में राजनाथ सिंह ने जेवर हवाई अड्डे के लिए प्रयास शुरू किए थे। उस समय वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उसके बाद जेवर एयरपोर्ट की फाइलों को कमरे में बंद कर धूल खाने के लिए छोड़ दिया गया।विदेशों पर खत्म होगी निर्भरता
जेवर में मेंटिनेंस, रिपेयरिंग और ओवरहॉलिंग (एमआरओ) हब भी बनेगा। जहां विमानों का रख-रखाव हो पाएगा। भारत में अभी यह उद्योग छोटे स्तर पर है। विमानों के बेहतर रख-खाव के लिए अभी विदेशों पर निर्भरता है। एमआरओ हब बनने से देश इस क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनेगा। इससे निवेश आने के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। दिल्ली, मुंबई, नागपुर, कोलकाता, तिरुवंतपुरम और हैदराबाद में विमानों के रख-रखाव से जुड़ा थोड़ा बहुत कार्य होता है। यह कार्य एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड, एयर वर्क्स इंडिया (इंजीनियरिंग) प्राइवेट लिमिटेड, इंडैमर प्राइवेट लिमिटेड, डेक्कन चार्टर, जीएमआर एयरो टेक्निक लिमिटेड, मैक्स एमआरओ प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां कर रही हैं, मगर अब इसे बड़े स्तर पर किया जाना है। जेवर में हवाई जहाज के लिए एमआरओ उद्योग स्थापित किया जाएगा। इसके लिए यमुना प्राधिकरण ने भूमि भी रिजर्व कर दी है।