गौतम पब्लिक सी. सीनियर सेकेंडरी स्कूल का वार्षिकोत्सव ‘शाबाशियाँ’ हर्षोल्लास और प्रेरणा के साथ सम्पन्न

  • वार्षिक रिपोर्ट और भविष्य की योजना: शैक्षणिक और अतिरिक्त गतिविधियों का विवरण
  • मेधावी छात्रों का सम्मान: उत्कृष्ट अंक और पुरस्कार वितरण
  • विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां: देशभक्ति, विज्ञान, संस्कृति और उपलब्धियों का उत्सव
  • कविता और प्रेरक संदेश: उत्साह, हौसला और ‘शाबाशियाँ’ की भावना
  • कार्यक्रम का समापन: धन्यवाद ज्ञापन और यादगार अनुभव

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गौतम पब्लिक सी. सीनियर सेकेंडरी स्कूल प्रताप विहार में शनिवार को वार्षिकोत्सव ‘शाबाशियाँ’ हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। इस वर्ष का थीम विद्यार्थियों की उपलब्धियों, उनके प्रयास और उज्जवल भविष्य को समर्पित रखा गया। इस आयोजन ने बच्चों के हुनर, रचनात्मकता और नेतृत्व कौशल को प्रदर्शित किया और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में विद्यालय की प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई और संस्थापक स्वर्गीय आर. बी. गौतम एवं उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय श्रीमती वेदवती गौतम को श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथियों में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री कैप्टन विकास गुप्ता, विधायक संजीव शर्मा, भारत सरकार स्वास्थ्य मंत्रालय के डिप्टी कमिश्नर डॉ. सुशील कुमार विमल, एसीपी नंदग्राम उपासना पांडेय, विद्यालय के डायरेक्टर ए. के. गौतम, प्रधानाचार्या पूनम गौतम, उपप्रधानाचार्या तनूजा और एकेडमिक हेड चेतन शर्मा उपस्थित रहे।

डायरेक्टर ए. के. गौतम ने मुख्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत करते हुए कहा कि इस वर्ष के वार्षिकोत्सव ‘शाबाशियाँ’ का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं है, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व, नैतिक मूल्यों और सामाजिक चेतना का विकास करना भी है। हमें गर्व है कि हमारे विद्यालय में छात्र केवल अकादमिक शिक्षा ही नहीं बल्कि कला, विज्ञान, खेल और सामाजिक जिम्मेदारी के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। यह कार्यक्रम बच्चों को रचनात्मकता, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता सिखाने का उत्कृष्ट माध्यम है। कार्यक्रम के अंत में डायरेक्टर ए. के. गौतम ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। वार्षिकोत्सव ‘शाबाशियाँ’ ने विद्यार्थियों की प्रतिभा, देशभक्ति, विज्ञान और महिला सशक्तिकरण पर आधारित प्रस्तुतियों के कारण इसे यादगार और प्रेरक बना दिया।

शिक्षा का असली उद्देश्य बच्चों को प्रेरित करना: कैप्टन विकास गुप्ता
दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री कैप्टन विकास गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि एक शिक्षक या विद्यालय का मुख्य उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तक ज्ञान देना नहीं है, बल्कि बच्चों को उनके छिपे हुए प्रतिभा और क्षमता को पहचानने में मार्गदर्शन करना है। विद्यार्थियों की उपलब्धियों का सम्मान करना और उन्हें प्रेरित करना ही शिक्षा का असली उद्देश्य है। ‘शाबाशियाँ’ जैसे कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में मदद करते हैं और उन्हें अपने देश और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनना सिखाते हैं। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, टीमवर्क और नेतृत्व कौशल को बढ़ावा देते हैं।

प्रतिभा और राष्ट्रभक्ति का जीवंत उदाहरण: संजीव शर्मा
विधायक संजीव शर्मा ने कहा कि आज का कार्यक्रम बच्चों की प्रतिभा, उनकी मेहनत और राष्ट्रभक्ति का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। मैं यह चाहता हूँ कि बच्चे केवल पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि कला, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी समान रूप से आगे बढ़ें। ऐसे कार्यक्रम बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और उनमें नेतृत्व क्षमता का विकास करते हैं। इस प्रकार के आयोजनों से बच्चे अपने अंदर सामाजिक और नैतिक मूल्यों को भी अपनाना सीखते हैं।

शिक्षा, मोबाइल लत और मानसिक विकास पर जागरूकता: डॉ. सुशील कुमार विमल
डिप्टी कमिश्नर डॉ. सुशील कुमार विमल ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि आज के कार्यक्रम में बच्चों ने जिस उत्साह और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुतियां दीं, वह अत्यंत प्रेरक हैं। यह दर्शाता है कि केवल पाठ्यपुस्तक ज्ञान ही नहीं, बल्कि उनकी रचनात्मक क्षमता, अनुशासन और टीमवर्क भी मजबूत है। उन्होंने कहा कि आजकल पढ़ाई, खेल, सोशल मीडिया और वीडियो की दुनिया बच्चों को मोबाइल स्क्रीन से बांध रही है। कई घरों में बच्चे सुबह आंख खुलते ही मोबाइल की ओर भागते हैं और रात को उसी के साथ सोते हैं। यह मोबाइल की लत उनके व्यवहार, सोच और मानसिक विकास पर गंभीर असर डाल रही है।

अब ऐसे बच्चे सामने आ रहे हैं जो फोन न मिलने पर बेचैन हो जाते हैं, गुस्सा करते हैं या खुद में सिमट जाते हैं। माता-पिता को बच्चों के व्यवहार में हो रहे बदलाव को समझना अत्यंत आवश्यक है। यदि बच्चा हर समय मोबाइल के साथ रहता है, पढ़ाई में मन नहीं लगता या स्कूल का प्रदर्शन गिरने लगता है, तो यह शुरुआती चेतावनी है। डॉ. विमल ने बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि इस उम्र में पढ़ाई करना आपके भविष्य को आकार देने के लिए महत्वपूर्ण है। अपनी उम्र के 14 साल पढ़ाई में लगाना यह सुनिश्चित करता है कि आप अपने भविष्य को स्वयं संवार रहे हैं। पढ़ाई ही हमारा सबसे बड़ा हथियार है, जो हमें आगे बढऩे का मार्ग दिखाता है।

छात्रों का समर्पण और सुरक्षा की जिम्मेदारी: उपासना पांडेय
एसीपी उपासना पांडेय ने कहा कि विद्यालय का यह वार्षिकोत्सव छात्रों के समर्पण, अनुशासन और कौशल का प्रतीक है। मुझे गर्व है कि हमारे समाज में ऐसे स्कूल हैं जो केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि छात्रों को नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी सशक्त बनाते हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर सदस्य की सामूहिक जिम्मेदारी है। हर लड़की को अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए और किसी भी असुरक्षा या अपराध की स्थिति में तुरंत पुलिस की मदद लेनी चाहिए। छात्राएं 112, 1090, 181 और 1930 जैसी हेल्पलाइन सेवाओं का उपयोग कर सकती हैं। साथ ही, बच्चों के माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बच्चे सुरक्षित और सही दिशा में पढ़ाई और गतिविधियों में लगे रहें।

विद्यार्थियों की प्रस्तुतियाँ: भारत की प्रगति, विज्ञान और महिला सशक्तिकरण
विद्यार्थियों ने अपने प्रस्तुतियों में भारत की प्रगति, अंतरिक्ष मिशन विशेषकर चंद्रयान-3, ऑपरेशन सिदूर, महाकुंभ मेला और महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप की उपलब्धियों को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया। प्रधानाचार्या पूनम गौतम ने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष अनुसंधान में अद्वितीय उपलब्धियां हासिल की हैं। हमारे विद्यार्थियों के लिए यह प्रेरणा का स्रोत है। महिला सशक्तिकरण पर उन्होंने कहा कि हम नारी हैं, कमजोर नहीं। दुर्गा, काली, सरस्वती-हम किसी से कम नहीं। हमारी कोशिश और मेहनत हमें सफलता की ओर ले जाएगी। हमारा लक्ष्य केवल शिक्षा देना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को समाज के जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना भी है। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान, कला, संस्कृति और खेल में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विशेष रूप से चंद्रयान-3 की सफलता और ऑपरेशन सिदूर जैसी घटनाओं पर आधारित प्रस्तुतियों ने बच्चों के अंदर जिज्ञासा, नवाचार और देशभक्ति की भावना को प्रज्वलित किया।

उन्होंने बताया महिला सशक्तिकरण हमारे स्कूल की प्राथमिकता है। हम बच्चों को यह समझाते हैं कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। दुर्गा, काली, सरस्वती जैसी आदर्शों से प्रेरणा लेकर, हमारी छात्राएँ हर चुनौती का सामना आत्मविश्वास और साहस के साथ कर सकती हैं। हमें गर्व है कि हमारे विद्यालय में लड़कियों को उच्च शिक्षा, खेल और नेतृत्व के अवसर समान रूप से प्रदान किए जाते हैं। पूनम गौतम ने यह भी बताया कि हम चाहते हैं कि विद्यार्थी सिर्फ ज्ञान प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने समाज और देश के प्रति जिम्मेदार बने। यही हमारी शिक्षा की असली सफलता है। ‘शाबाशियाँ’ जैसे कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने का एक महत्वपूर्ण मंच हैं।

शिक्षा और तकनीकी प्रगति पर दें विशेष ध्यान
उपप्रधानाचार्या तनूजा ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीक के क्षेत्र में भारत ने अभूतपूर्व विकास किया है। गौतम पब्लिक स्कूल भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आधुनिक सुविधाओं और उच्च स्तरीय शिक्षा उपलब्ध कराता रहेगा। उन्होंने ने कहा हमारा विद्यालय आधुनिक शिक्षा और तकनीकी प्रगति के माध्यम से विद्यार्थियों को हर क्षेत्र में सक्षम बनाने का प्रयास करता है। वार्षिकोत्सव के माध्यम से बच्चों ने अपने कौशल और रचनात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया। शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी विकास में देश की प्रगति को देखकर हमें गर्व होता है और हम चाहते हैं कि हमारे विद्यार्थी इन उपलब्धियों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करें। तनूजा ने बताया गौतम पब्लिक स्कूल केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि हम बच्चों में अतिरिक्त कौशल, खेल, कला और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर भी ध्यान देते हैं। वार्षिकोत्सव कार्यक्रम यह साबित करता है कि हमारे विद्यार्थी न केवल पढ़ाई में, बल्कि जीवन की हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। हमें विश्वास है कि हमारे बच्चों की मेहनत और प्रयास उन्हें भविष्य में उत्कृष्ट नागरिक बनाएंगे।

विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में एक प्रेरक कविता भी प्रस्तुत की:
 ‘कहते थे लोग जो
काबिल नहीं है तू
देंगे वही सलामियाँ
दिल थाम के जहां
देखेगा एक दिन तेरी भी कामयाबियाँ
करके दिखा कमाल वो…
शाबाशियाँ… शाबाशियाँ। 

वार्षिक रिपोर्ट और भविष्य की योजना
प्रधानाचार्या ने स्कूल की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें शैक्षणिक प्रगति, खेल, कला, विज्ञान और तकनीक में विद्यार्थियों की उपलब्धियों का विस्तृत विवरण दिया। एकेडमिक हेड चेतन शर्मा ने कहा कि छात्रों को आर्थिक और वित्तीय जागरूकता का महत्व समझना चाहिए। उन्हें आधुनिक तकनीकी ज्ञान भी देना आवश्यक है, ताकि वे भविष्य में सक्षम और आत्मनिर्भर नागरिक बन सकें।

मेधावी छात्रों का सम्मान
वार्षिकोत्सव में वर्ष 2024 में उत्तीर्ण हुए मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया।
-दसवीं कक्षा: अंशिका सिंह 93.4′ अंक (प्रथम), हर्षित 92.4′ (द्वितीय), केतन श्रीवास्तव 92.2′ (तृतीय)
-बारहवीं कक्षा: अक्षत मिश्रा 97.8′ (प्रथम), कुंवर रूहान 96.2′ (द्वितीय), पुष्कर कौशिक 88′ (तृतीय)
सभी को ट्रॉफी और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।