शीतलहरी से सुरक्षित गाजियाबाद: जिला प्रशासन ने जारी की व्यापक बचाव एडवाइजरी

-यातायात व परिवहन विभाग को विशेष निर्देश, कोहरे और कम दृश्यता में दुर्घटनाओं से बचाव पर जोर

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद में शीतलहरी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा विभागवार  ‘क्या करें-क्या न करें’ संबंधी एडवाइजरी जारी की गई है। इसी क्रम में जिलाधिकारी कार्यालय एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गाजियाबाद द्वारा जनहित में शीतलहरी से बचाव को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यह जानकारी अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) सौरभ भट्ट द्वारा दी गई। जारी एडवाइजरी में आमजन से अपील की गई है कि वे मौसम से जुड़ी सूचनाओं के प्रति सतर्क रहें। रेडियो, दूरदर्शन, समाचार पत्रों एवं अन्य माध्यमों से स्थानीय मौसम पूर्वानुमान की जानकारी नियमित रूप से प्राप्त करें, जिससे शीतलहरी की संभावित स्थिति का पूर्वानुमान लगाया जा सके। ठंड से बचाव के लिए पर्याप्त गर्म वस्त्र पहनने की सलाह दी गई है, विशेष रूप से कई परतों वाले कपड़े शरीर को अधिक गर्म रखने में सहायक होते हैं। इसके साथ ही आवश्यक आपातकालीन सामग्री पहले से संग्रहित कर तैयार रखने को कहा गया है।

एडवाइजरी में यह भी उल्लेख किया गया है कि शीतलहरी के दौरान सर्दी-जुकाम, फ्लू, नाक बहना, नाक बंद होना अथवा नाक से खून आने जैसी स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है। लंबे समय तक अत्यधिक ठंड के संपर्क में रहने से ये बीमारियां गंभीर रूप ले सकती हैं, ऐसे में किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह दी गई है। यातायात एवं परिवहन विभाग के लिए जारी विशेष निर्देशों में कहा गया है कि कोहरे और कम दृश्यता के दौरान सड़क दुर्घटनाओं की आशंका अत्यधिक बढ़ जाती है, इसलिए सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पूर्ण सतर्कता बरतनी होगी। वाहनों की गति नियंत्रित रखने, चालकों को सावधानीपूर्वक वाहन चलाने के लिए जागरूक करने तथा सभी प्रमुख मार्गों पर रिफ्लेक्टर पेंट और कैट्स-आई को दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि रात्रि एवं कोहरे के समय दृश्यता बनी रहे। सड़कों की स्थिति पर निरंतर निगरानी रखने के निर्देश देते हुए कहा गया है कि पुलों, ओवरब्रिजों एवं नमी वाले मार्गों पर फिसलन की संभावना अधिक रहती है।

ऐसे स्थानों पर समय रहते नमक या रेत का छिड़काव किया जाए, जिससे वाहन फिसलने की घटनाओं को रोका जा सके। कोहरे में धीमी गति से वाहन चलाने के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रमुख स्थानों पर सूचना पट्ट लगाए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं। यदि किसी क्षेत्र में दृश्यता अत्यधिक कम हो जाती है, तो वहां से यातायात को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोडऩे की व्यवस्था करने को कहा गया है। इसके साथ ही यातायात पुलिस कर्मियों के लिए ऊनी वस्त्रों एवं गर्म पेय की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वे शीतलहरी के दौरान भी अपनी ड्यूटी सुचारु रूप से निभा सकें। वायरलेस और दूरभाष के माध्यम से निरंतर संचार बनाए रखते हुए यातायात जाम या दुर्घटना की संभावित स्थितियों की त्वरित जानकारी साझा करने पर भी जोर दिया गया है।

एडवाइजरी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोहरे के दौरान तेज गति से वाहन चलाने की अनुमति न दी जाए। बिना रिफ्लेक्टर अथवा प्रकाश युक्त उपकरणों वाले वाहनों को सड़क पर चलने से रोका जाए, ताकि दुर्घटनाओं की संभावना को न्यूनतम किया जा सके। ड्यूटी पर तैनात कर्मियों को अपने तैनाती स्थल नहीं छोडऩे और हर परिस्थिति में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। फिसलन या अत्यधिक ओस एवं बर्फ जमने की स्थिति में भारी वाहनों की गति पर विशेष नियंत्रण रखने की बात कही गई है। किसी भी आपात स्थिति में देरी किए बिना तुरंत उच्चाधिकारियों को सूचित करने और एम्बुलेंस व रिकवरी वाहनों को हर समय तैयार रखने के निर्देश भी एडवाइजरी में शामिल हैं। अपर जिलाधिकारी सौरभ भट्ट ने बताया कि सभी संबंधित विभागों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने-अपने स्तर से शीतलहरी के दौरान की जाने वाली कार्यवाहियों के साथ-साथ  ‘क्या करें-क्या न करें’ संबंधी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें, ताकि जनपद में किसी भी प्रकार की जनहानि या दुर्घटना से बचा जा सके।