शराब माफिया पर ‘शासन का शस्त्र’, योग से सजग योद्धा बनी आबकारी टीम

-स्वस्थ शरीर और मजबूत मानसिकता से चला रही ऑपरेशन क्लीन-शराब

उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। जनपद में अवैध शराब के खिलाफ चल रहे अभियान को सिर्फ कार्रवाई की नजर से नहीं, बल्कि एक संघर्ष, संकल्प और सेवा के रूप में देखा जाना चाहिए। जिस तन्मयता और रणनीति से जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव और उनकी टीम शराब माफियाओं के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए है, उससे पूरे जनपद में कानून व्यवस्था को लेकर एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। मगर इन कुशल अभियानों के पीछे छिपी है एक और ताकत स्वस्थ शरीर और स्थिर मस्तिष्क। जी हां, अवैध शराब की फैक्ट्रियों पर दबिश देने से लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों पर रात्रिकालीन चेकिंग अभियान चलाने वाली यह टीम अपने स्वास्थ्य को लेकर भी उतनी ही गंभीर है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शनिवार को भी जिला आबकारी अधिकारी सुबोध श्रीवास्तव और उनकी टीम ने योग को दिनचर्या की तरह निभाया।

जिले की सीमा पर तैनात टीमों के साथ आबकारी निरीक्षक आशीष पाण्डेय, नामवर सिंह, डॉ. शिखा ठाकुर, अभिनव शाही और अखिलेश कुमार ने भी पार्क में योग कर यह संदेश दिया कि अगर आप माफिया तंत्र से लडऩा चाहते हैं, तो सबसे पहले खुद को मजबूत बनाना होगा। दूसरी ओर विभाग की कार्यशैली की बात करें तो ये टीमें कभी भी, कहीं भी, बिना पूर्व सूचना के कार्रवाई कर सकती हैं। चाहे वो अवैध शराब से भरे वाहन की धरपकड़ हो, या फिर ओवररेटिंग करने वाली लाइसेंसी दुकानों की छापेमारी आबकारी विभाग की फुर्ती और पकड़ ने अपराधियों की नींद हराम कर रखी है। अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि हर कार्य में सफलता का मूल आधार आत्मसंयम, मानसिक स्पष्टता और शारीरिक ऊर्जा है। यही कारण है कि हम खुद भी योग करते हैं और अपनी टीम को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं। अगर हम खुद निरोग रहेंगे, तभी समाज को सुरक्षित और स्वस्थ रख पाएंगे।

आबकारी विभाग न केवल कानून का पालन करवा रहा है, बल्कि आम जनता को भी यह दिखा रहा है कि अधिकारी अगर खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार रखें, तो अपराध कितना भी बड़ा हो, उसे जड़ से उखाड़ा जा सकता है। नशा जहां शरीर को खोखला करता है, योग वहीं जीवन में संतुलन लाता है। इसलिए हमारी टीम हर दिन योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना चुकी है। अब विभाग की योजना है कि हर महीने योग प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएं, ताकि अधिकारी और निरीक्षक सदैव उच्चतम दक्षता में रहें। गौतमबुद्ध नगर में आबकारी विभाग की यह पहल न सिर्फ अपराध नियंत्रण में सहायक बन रही है, बल्कि यह भी दर्शा रही है कि सशक्त राष्ट्र निर्माण में अधिकारियों की सतर्कता और स्वास्थ्य दोनों ही बराबर मायने रखते हैं।