-नाले होंगे बंद, जलकुंभी हटेगी, अतिक्रमण हटाने की बनेगी सूची; नदी की सेहत सुधारने जुटा जिला प्रशासन
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। हिंडन नदी के पुर्नरुद्धार को लेकर जिला प्रशासन अब पूरी गंभीरता से मैदान में उतर चुका है। शुक्रवार को विकास भवन स्थित दुर्गावती देवी सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हिंडन नदी में गिरने वाले सभी गंदे नाले बंद किए जाएं और नदी में तैर रही जलकुंभी व अपशिष्ट को तत्काल प्रभाव से हटाने की कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही उन्होंने नदी पर हुए अतिक्रमण की सूची तैयार करने के लिए संबंधित अधिकारियों को 10 दिनों की समयसीमा भी दे दी।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल, नगर निगम, सिंचाई विभाग, आवास एवं विकास परिषद, जीडीए, यूपीसीडा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, और अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान हिंडन नदी को लेकर तैयार विस्तृत कार्ययोजना पर प्रजेंटेशन भी दिया गया। डीएम ने कहा कि अब सिर्फ कागजों पर योजना नहीं, जमीन पर परिणाम दिखने चाहिए।
डीएम दीपक मीणा ने जलकल विभाग द्वारा बनाए गए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और प्रमुख नालों की मैपिंग को डिजिटल और ऑनलाइन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एक बेस नेटवर्क तैयार किया जाए जिसमें नगर निगम, जीडीए, सिंचाई विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित सभी एजेंसियों का डेटा एक स्थान पर एकत्रित हो। ताकि समस्या के मूल तक पहुंचा जा सके और समन्वय से समाधान निकाला जा सके। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विकास मिश्रा को निर्देश दिए गए कि 10 दिनों के भीतर हिंडन नदी के आसपास संचालित सभी औद्योगिक इकाइयों के ईटीपी (अपशिष्ट शोधन संयंत्र) की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। साथ ही इन इकाइयों के अपशिष्ट डिस्चार्ज की निगरानी भी सुनिश्चित की जाए। जिलाधिकारी ने तहसीलदारों और उप जिलाधिकारियों को आदेशित किया कि नदी के किनारे और ऊपर हुए अतिक्रमण की सूची तैयार की जाए और उसे प्रत्येक तीन माह में अपडेट किया जाए। जहां अतिक्रमण नहीं है, उन क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां पौधारोपण के लिए भूमि चिह्नित की जाए।
उन्होंने कहा कि पौधारोपण केवल औपचारिकता नहीं, नदी की जैविक सुरक्षा का हिस्सा होना चाहिए। सिंचाई विभाग को हिंडन नदी से जलकुंभी एवं अपशिष्ट हटाने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। वहीं, नगर निगम के चीफ इंजीनियर एनके चौधरी ने छठ घाट पर रिवर फ्रंट डेवलपमेंट की योजना प्रस्तुत की, जिसे डीएम ने सैद्धांतिक रूप से सहमति देते हुए सिंचाई विभाग व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मानकों के अनुरूप रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा। डीएम ने मुरादनगर, लोनी और रजापुर ब्लॉक के खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि नदी के किनारे बसे ग्रामों में नालों की पहचान करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी अपशिष्ट नदी में न जाए।
साथ ही स्कूलों में जल संरक्षण को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाने को कहा गया। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने स्पष्ट किया कि हिंडन नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि लाखों लोगों की जीवनरेखा है। यदि हम आज इसमें जीवन नहीं फूंकते, तो भविष्य में इसके अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न लग जाएगा। इसलिए सभी विभागों को आपसी समन्वय से युद्धस्तर पर काम करना होगा। आने वाले समय में नदी की स्थिति में सुधार दिखना चाहिए, यह जन अपेक्षा है और शासन की प्राथमिकता भी।
















