ग्रेटर नोएडा। इंतजार की घड़ियां समाप्त हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ देर बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का शिलान्यास करेंगे। शिलान्यास समारोह की सभी तैयारियां पूर्ण हैं। कार्यक्रम स्थल पर भारी भीड़ जुटी है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इसी के साथ दिल्ली-एनसीआर को दूसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ जाएगा। नोएडा एयरपोर्ट अभी से देश-दुनिया में काफी सुर्खियां बटोर रहा है। इसके शुरू होने के बाद नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा को दुनिया में नई पहचान भी मिलेगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शिलान्यास आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।
सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध, एसपीजी भी मुस्तैद
कार्यक्रम में जनपद गौतमबुद्ध नगर के अलावा हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, मेरठ, गाजियाबाद आदि से बड़ी संख्या में नागरिक पहुंचे हैं। इसके पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार की देर शाम जेवर पहुंच कर शिलान्यास समारोह की तैयारियों का जायजा लिया था। उस दौरान सीएम योगी ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए थे। समारोह स्थल पर सुरक्षा के अलावा सुविधाओं संबंधी आदेश सीएम ने दिए थे। शिलान्यास समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ के अलावा उप्र के नागरिक उड्डयन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता आदि भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम स्थल व उसके आस-पास काले रंग पर पूर्णत: पाबंदी लगा दी गई है। जब तक शिलान्यास कार्यक्रम नहीं हो जाता तब तक 2 किलोमीटर के दायरे में काले रंग के गुब्बारे बेचने पर भी रोक रहेगी। पुलिस व पैरामिलट्री फोर्स ने सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाल ली है। जीरो प्वाइंट से लेकर कार्यक्रम स्थल तक पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। यमुना एक्सप्रेस वे के जेवर इंटरचेंज से कार्यक्रम स्थल तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती की गई है।
3 साल में पूरा होगा पहला चरण
नोएडा एयरपोर्ट का पहला चरण 3 साल में पूर्ण हो जाएगा। यानी नवम्बर-2024 तक पहले चरण का काम निपट जाएगा। पहले चरण के कार्य पर 4 हजार 588 करोड़ रुपये की लागत आएगी। नागरिक उडड्यन सचिव राजीव बंसल के मुताबिक इस सेक्टर में जेवर एयरपोर्ट पर सर्वाधिक निवेश किया जा रहा है। देश में फिलहाल 3 ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट बनाए जा रहे हैं। यह गोवा, नवी मुंबई और जेवर में होंगे। जेवर एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी सेंटर के तौर पर भी उभरेगा। जेवर के आस-पास काफी घनी आबादी वाले शहर हैं। इन शहरों को व्यापक पैमाने पर घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी की आवश्यकता है। यूपी में लखनऊ, आगरा, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, हिंडन, बरेली, कुशीनगर व वाराणसी में एयरपोर्ट हैं। अगले वर्ष 2022 में अलीगढ़, चित्रकुट, आजमगढ़, मुरादाबाद और श्रावस्ती में भी एयरपोर्ट तैयार हो जाएंगे।
2024 में होगा आपरेशनल
2024 में जेवर एयरपोर्ट ऑपरेशन हो जाएगा। इस एयरपोर्ट से उड़ान भरने पर प्रत्येक यात्री से सरकार को 400.97 रुपए का शुल्क मिलेगा। जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के भविष्य को प्रभावित करेगा। इसमें 34 हजार करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है। ये एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा। पहली बार 2001-02 में राजनाथ सिंह ने जेवर हवाई अड्डे के लिए प्रयास शुरू किए थे। उस समय वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उसके बाद जेवर एयरपोर्ट की फाइलों को कमरे में बंद कर धूल खाने के लिए छोड़ दिया गया।
जेवर में एमआरओ हब भी बनेगा
जेवर में मेंटिनेंस, रिपेयरिंग और ओवरहॉलिंग (एमआरओ) हब भी बनेगा। जहां विमानों का रख-रखाव हो पाएगा। भारत में अभी यह उद्योग छोटे स्तर पर है। विमानों के बेहतर रख-खाव के लिए अभी विदेशों पर निर्भरता है। एमआरओ हब बनने से देश इस क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनेगा। इससे निवेश आने के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। दिल्ली, मुंबई, नागपुर, कोलकाता, तिरुवंतपुरम और हैदराबाद में विमानों के रख-रखाव से जुड़ा थोड़ा बहुत कार्य होता है। यह कार्य एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड, एयर वर्क्स इंडिया (इंजीनियरिंग) प्राइवेट लिमिटेड, इंडैमर प्राइवेट लिमिटेड, डेक्कन चार्टर, जीएमआर एयरो टेक्निक लिमिटेड, मैक्स एमआरओ प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां कर रही हैं, मगर अब इसे बड़े स्तर पर किया जाना है। जेवर में हवाई जहाज के लिए एमआरओ उद्योग स्थापित किया जाएगा। इसके लिए यमुना प्राधिकरण ने भूमि भी रिजर्व कर दी है। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में एमआरओ हब विकसित होने से रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त देश-विदेश से निवेश आएगा। एमआरओ में काम करने वाली बड़ी विदेशी कंपनियों के आने की संभावना है।














