-संदीप शुक्ला बोले- यह क्षण देशवासियों के लिए गर्व, उत्साह और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। अयोध्या में भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराने का इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया। यह वह क्षण है जिसका प्रतीक 500 वर्षों से हिंदू धर्मावलंबियों की आस्था और संघर्ष रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभ मुहूर्त में 22 फीट लंबे, 11 फीट चौड़े और लगभग 3 किलो वजन वाले धर्म ध्वज का ध्वजारोहण किया। इस ऐतिहासिक अवसर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और देशभर से आए लगभग 7,000 मेहमान इसके साक्षी बने। ध्वजारोहण से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सप्तमंदिर में सप्त ऋषियों के दर्शन किए और भगवान राम की आरती में श्रद्धापूर्वक भाग लिया। पूरे परिसर में श्रद्धालुओं और आमजन में उल्लास और भावनात्मक ऊर्जा का माहौल था। मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज का आरोहण न केवल आध्यात्मिक विजय का प्रतीक है, बल्कि यह भारत की सनातन परंपरा और आस्था को प्रखरता से स्थापित करने वाला क्षण भी है।
ट्रांस हिंडन बिल्डर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप शुक्ला ने कहा कि यह केवल मंदिर का उद्घाटन नहीं है, बल्कि 500 वर्षों की आस्था, संघर्ष और धैर्य का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज का यह ध्वजारोहण पूरे देशवासियों के लिए गर्व और उत्साह का स्रोत है। यह हमारे धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करता है और सनातन धर्म की महिमा को विश्व स्तर पर स्थापित करता है। संदीप शुक्ला ने कहा कि यह आयोजन पूरे देश में भावनात्मक ऊर्जा और गर्व की लहर लेकर आया है। भव्य मंदिर और उसके शिखर पर फहरता भगवा ध्वज आने वाली पीढिय़ों के लिए सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक बनेगा। उनका मानना है कि यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में आस्था और एकता की भावना को भी मजबूती देता है।
संदीप शुक्ला ने कहा कि इस ऐतिहासिक ध्वजारोहण ने देशवासियों में धार्मिक और सांस्कृतिक गर्व की भावना को जागृत किया है। यह घटना आने वाली पीढिय़ों को भी धार्मिक और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूक करेगी। मंदिर का भव्य निर्माण और शिखर पर भगवा ध्वज का आरोहण भारत की धरोहर, आस्था और एकता का प्रतीक बनकर इतिहास में दर्ज हो गया है। इस अवसर ने यह संदेश भी दिया कि धैर्य, आस्था और न्याय के मार्ग पर चलने वाले संघर्ष का फल निश्चित रूप से मिलता है। पूरे देश में श्रद्धालुओं और आमजन ने इस ऐतिहासिक पल को अपने हृदय में संजोया और इसे देश की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान के रूप में याद किया जाएगा।
















