IAS अतुल वत्स ने रचा इतिहास 1500 करोड़ के कर्ज तले दबे जीडीए को महज 380 दिनों में बनाया कर्ज मुक्त, 300 करोड़ की कराई एफडीआर

जीडीए के बारे में जानने वाले लोगों को अचानक इस खबर पर भरोसा नहीं होगा। लेकिन यह सच है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण कर्ज मुक्त हो गया है। आईएएस अतुल वत्स ने महज 380 दिनों के कार्यकाल में जीडीए के समस्त बकाये कर्ज का भुगतान करते हुए 300 करोड़ की एफडीआर प्राधिकरण के नाम से कराई है। अतुल वत्स को जीडीए उपाध्यक्ष के चार्ज के साथ ही आर्थिक संकट का कांटों भरा ताज विरासत में मिला। कर्ज के बो­झ तले दबी जीडीए पर देनदारी बढ़ रही थी और एकाउंट खाली था। कर्मचारियों को तनख्वाह देने में देरी, कर्ज का बढ़ता बोझ सहित तमाम तरह की नकारात्मक खबरों की वजह से जीडीए चचार्ओं में रहता था। हालांकि जीडीए का पूर्व का इतिहास समृढ़शाली रहा है। एक दशक पहले तक गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की गिनती उत्तर प्रदेश के अति समृद्ध विकास प्राधिकरण में होती थी। लेकिन वक्त के साथ जीडीए के अधिकारी समृद्ध विरासत को संभाल नहीं पाये। काम को लेकर लचर रवैया और गलत प्लानिंग की वजह से कर्ज के भंवर में फंसे जीडीए की आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती चली गई। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष का चार्ज संभालने के बाद अतुल वत्स ने विशेष कार्ययोजना तैयार की और उस पर तेजी से अमल करते हुए कर्ज के मकड़जाल को खत्म किया। जीडीए को कर्ज मुक्त बनाने के बाद अतुल वत्स का जोर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर है। आगामी वित्तीय वर्ष में जीडीए ने 3000 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव रखा है, जिसमें से 1800 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) में निवेश किया जाएगा। जीडीए की यह सफलता शहर के सुनहरे भविष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।

विजय मिश्रा (उदय भूमि)
गाजियाबाद। अद्भुत, आश्चर्य किंतु सत्य। 1500 करोड़ के भारी भरकम कर्ज के बोझ तले दबा गाजियाबाद विकास प्राधिकरण कर्ज मुक्त हो गया है। प्राधिकरण ना सिर्फ कर्ज मुक्त हुआ है बल्कि समस्त देनदारियों का भुगतान करते हुए 300 करोड़ का रिर्जव फंड तैयार किया है। जीडीए की माली हालत के बारे में जानने वाले लोगों को अचानक इस खबर पर भरोसा नहीं होगा। लेकिन यह सच है। कुछ वर्ष पहले जहां जीडीए कर्मचारियों को समय से वेतन नहीं दे पाता था और प्राधिकरण की आमदनी का अधिकांश हिस्सा कर्ज के ब्याज की अदायगी में खत्म हो जाता था। ठेकेदार एवं अन्य बकायेदार भुगतान के लिए जीडीए कार्यालय के चक्कर लगाते रहते थे लेकिन, उन्हें भुगतान को लेकर कोई संतोषजनक आश्वासन भी नहीं मिलता था। उसी जीडीए के एक वर्ष के भीतर कर्ज मुक्त होने की खबर अपने आप में बड़ी बात है। युवा आईएएस अतुल वत्स ने महज 380 दिनों के कार्यकाल में जीडीए के समस्त बकाये कर्ज का भुगतान करते हुए 300 करोड़ की एफडीआर प्राधिकरण के नाम से कराई है।

अतुल वत्स के सफल नेतृत्व में जीडीए ने वर्षों से चले आ रहे ऋण के बोझ पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। अतुल वत्स को जीडीए वीसी के चार्ज के साथ ही आर्थिक संकट का कांटो भरा ताज विरासत में मिला। कर्ज के बोझ तले दबी जीडीए पर देनदारी बढ़ रही थी और एकाउंट खाली था। कर्मचारियों को तनख्वाह देने में देरी, कर्ज का बढ़ता बोझ सहित तमाम तरह की नकारात्मक खबरों की वजह से जीडीए चचार्ओं में रहता था। जीडीए का पूर्व का इतिहास समृढ़ रहा है। एक दशक पहले तक गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की गिनती उत्तर प्रदेश के अति समृद्ध विकास प्राधिकरण में होती थी। लेकिन वक्त के साथ जीडीए के अधिकारी समृद्ध विरासत को संभाल नहीं पाए। काम को लेकर लचर रवैया और गलत प्लानिंग की वजह से कर्ज के भंवर में फंसे जीडीए की आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती चली गई। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष का चार्ज संभालने के बाद अतुल वत्स ने विशेष कार्ययोजना तैयार की और उस पर तेजी से अमल किया।
15 मार्च 2024 को जीडीए उपाध्यक्ष का चार्ज संभाने के अतुल वत्स ने कहा था कि उनका पहला लक्ष्य जीडीए को कर्ज के मकड़जाल से मुक्त कराते हुए विकास की रफ्तार को गति देना है। 31 मार्च 2025 को अतुल वत्स ने जीडीए को पूरी तरह कर्ज मुक्त बना दिया। विदित हो कि जीडीए ने वर्ष 2016 से 2020 के बीच एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से 700 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2018-19 के दौरान इंडियन बैंक से मधुबन बापूधाम योजना के लिए 800 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया था। इस ऋण के कारण जीडीए को अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में खर्च करना पड़ता था। लेकिन वित्तीय वर्ष 2024-25 में अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए,  गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने 1294 करोड़ रुपये के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले लगभग 1600 करोड़ रुपये की आय अर्जित की। मुख्यमंत्री शहरी विस्तार योजना के तहत हरनंदीपुरम योजना के लिए जीडीए को 400 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। मास्टर प्लान एवं मानचित्र अनुभाग से 450 करोड़ रुपये की आय हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 40% अधिक है। संपत्तियों की बिक्री से 350 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 40% अधिक है। शमन शुल्क के रूप में रिकार्ड 390 करोड़ रुपये की आय हुई। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने 800 करोड़ रुपये के मधुबन बापूधाम ऋण को पूर्ण रूप से चुकता कर दिया है। साथ ही, एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के 700 करोड़ रुपये के ऋण के विरुद्ध सभी दायित्वों को समाप्त करते हुए 165 करोड़ रुपये के शेष भुगतान की सुरक्षा हेतु 300 करोड़ रुपये की एफडीआर भी जमा कर दी है।
अतुल वत्स
जीडीए उपाध्यक्ष
जीडीए को कर्ज मुक्त बनाने के बाद अतुल वत्स का जोर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर है। आगामी वित्तीय वर्ष में जीडीए ने 3000 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव रखा है, जिसमें से 1800 करोड़ रुपये को पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) में निवेश किया जाएगा। शहर के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न प्रमुख योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। राजनगर एक्सटेंशन में 60 करोड़ रुपये की लागत से चार प्रमुख सड़कें निमार्णाधीन हैं। मधुबन बापूधाम में रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण कार्य प्रगति पर है। इंदिरापुरम में 15 करोड़ रुपये की लागत से संस्कृत दर्शन पार्क एवं ग्रीन वुड पार्क का निर्माण प्रस्तावित है। कोयल एन्क्लेव योजना के अंतर्गत रामायण आधारित थीम पार्क का भी प्रस्ताव है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की यह अभूतपूर्व उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सही नेतृत्व और वित्तीय अनुशासन के माध्यम से किसी भी चुनौती से पार पाया जा सकता है। प्राधिकरण न केवल ऋण मुक्त हुआ है, बल्कि अब नई योजनाओं जैसे हरनंदीपुरम को गति देने और शहरवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से तैयार है। जीडीए की यह सफलता शहर के सुनहरे भविष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।