योजना विभाग की दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

-वर्तमान समय भविष्य की पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने का: प्रो. आरके सिन्हा

नई दिल्ली। वातावरण एवं पर्यावरण के बिगड़ते स्वरूप को देखते हुए जीबीयू के शहरी एवं क्षेत्रीय योजना विभाग ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्तर की दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन शुक्रवार को किया गया और शनिवार को भी किया जाएगा। यह कार्यक्रम, शहरी और क्षेत्रीय योजना विभाग द्वारा इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स इंडिया (आईटीपीआई), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया गया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य विशेषज्ञों, प्रैक्टिशनरों, नीति निर्धारकों और अकादमिक जगत के सदस्यों को एकत्रित करना है, ताकि वे योजना स्थिरता और पारिस्थितिक बहाली के लिए प्रभावी रणनीतियों पर विचार कर सकें।

वर्तमान समय में पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने के लिए यह कार्यक्रम ज्ञान साझा करने, बेहतरीन प्रथाओं और नवाचारों पर केंद्रित करना था। कार्यक्रम की शुरूआत में विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो. आरके सिन्हा, प्रमुख अतिथि, आईटीपीआई के राष्ट्रपति एनके पटेल और गेस्ट ऑफ ऑनर जीएनआईडीए की जीएम प्लानिंग लीनू सहगल ने अपने विचार साझा विचार साझा किए। स्कूल ऑफइंजिनिंग की डीन डॉ कीर्ति पाल ने प्रतिभागियों का स्वागत संदेश दिया। कार्यक्रम की संजोजल डॉ निर्मित मेहरोत्रा ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए सभी को धन्यवाद प्रेषित किया। एसपीए दिल्ली के सलाहकार बोर्ड के प्रोफेसर आर. श्रीनिवास, जीएनडीयू के निदेशक प्रोफेसर अश्वनी लूथरा कार्यक्रम में शामिल हुए।

यह संगोष्ठी विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श के लिए संरचित किया गया, जिसमें भविष्य के शहरों के लिए उभरते दृष्टिकोण; उपकरण और प्रौद्योगिकी-शहरीकरण और रूर्बनीकरण; जल और विरासत संरक्षण; जलवायु परिवर्तन, अनुकूलन और आपदा जोखिम प्रबंधन; माइक्रो क्रेडेंशियल; स्थिरता शिक्षा और जलवायु शासन के उपाय शामिल थे। प्रतिभागियों को कार्यशालाओं और अंत:क्रियात्मक सत्रों में भाग लेने का मौका मिला। दो दिन चलने वाली इस संगोष्ठी फैकल्टी मेम्बर आलोक वर्मा, माधुरी अग्रवाल, राजेश कुमार, एबीएसएंटी सिंह, गरिमा रानी, आकाश पांचाल, शैलजा उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से न केवल ज्ञान का आदान-प्रदान होगा बल्कि नीति विकास की दिशा में भी ठोस कदम उठा सकेंगे। यह संगोष्ठी न केवल नई साझेदारियों को स्थापित करने में सहायक हुआ, बल्कि सतत विकास और पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन के लिए ठोस नीतियों को तैयार करने के लिए एक मंच भी प्रदान किया। हम सभी के सहयोग से, हम एक स्थायी और स्वस्थ पर्यावरण के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं।