अमेरिका के आगे झुकेगा नहीं भारत, फेल होगा ट्रंप कार्ड

लेखक : तरुण मिश्र
(समाजसेवी एवं राजनीतिक चिंतक हैं। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर लिखते हैं। देश-विदेश में आयोजित होने वाले व्याख्यानों में एक प्रखर वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। जनसेवक के रुप में प्रख्यात है।)

भारत पर टैरिफ बम छोड़ने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अब अमेरिका के भीतर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। विरोधियों ने उनके खिलाफ बोलना तेज कर दिया है। यानी घर में ट्रंप की परेशानी बढ़ने लगी है। अमेरिका की मुख्य विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी की हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी ने डोनाल्ड ट्रंप के भारत को लेकर लिए गए फैसलों पर सवाल उठाए हैं। कमेटी ने चीन पर चुप्पी साधने और सिर्फ और सिर्फ भारत पर टैरिफ लगाने के ट्रंप के फैसले की तीखी आलोचना की है। कमेटी का साफ कहना है कि भारत पर टैरिफ लगाने से यूक्रेन युद्ध खत्म नहीं होगा। लगभग छह माह पहले तक भारत और अमेरिका इंडो-पैसिफिक में चीन को संतुलित करने के लिए साथ कदम मिलाकर चल रहे थे। दोनों देशों के मध्य टेक्नोलॉजी और डिफेंस सेक्टर में काफी तेजी से सहयोग बढ़ रहा था। अमेरिकी कंपनियों को चीन से बाहर निकाल कर भारत को सप्लाई चेन का आधार बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा था, मगर अब ये स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है। पिछले चार माह में इस पूरे समीकरण में एकाएक गिरावट आ गई है। अब न तो चीन पर साझी रणनीति की बात हो रही है और ना व्यापारिक रिश्तों में भरोसा दिखाई देता है। क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बाज नहीं आ रहे हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था को डांवाडोल करने के लिए वह तानाशाही पर उतर आए हैं। घर के भीतर आलोचना और विरोध होने के बावजूद वह अहंकार के नशे में चूर हैं।

भारत पर दबाव बनाने की रणनीति फेल होने पर उन्होंने मनमानी तेज कर दी है। टैरिफ को हथियार बनाकर वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झुकाने पर आमादा नजर आते हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामान पर पचास प्रतिशत टैरिफ लगाया है। यह टैरिफ प्लान लागू हो चुका है। टैरिफ के चलते अमेरिकी बाजार में भारत के कुछ उत्पाद जरूरत से ज्यादा महंगे हो जाएंगे। ऐसे में इन उत्पादों की बिक्री पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। नतीजन यूएस की मार्केट से इंडियन प्रोडक्ट्स ‘आउट’ होना तय हैं। ट्रंप के मनमाने टैरिफ से कपड़ा, झींगा, चमड़ा, हीरे-जवाहरात, कारपेट तथा फर्नीचर सेक्टर के अच्छे दिन लद जाएंगे। इसके इतर चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश व वियतनाम के अच्छे दिन शुरू हो रहे हैं। टैरिफ कम होने से इन देशों का सामान अमेरिकी बाजारों में हाथों-हाथ बिकने लगेगा। ट्रंप के टैरिफ प्लान ने भारत को बड़ी मुसीबत में डाल दिया है। निर्यात के अलावा नौकरियों पर भी बुरा असर पड़ना तय है। कुछ सेक्टरों में कामकाज प्रभावित होने पर छंटनी के आसान नजर आने लगे हैं। भविष्य में अर्थव्यवस्था की बढ़ती रफ्तार धीमी होना तय है। भारत इस समय दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। टॉप पर अमेरिका है।

टैरिफ की टेंशन ने केंद्र सरकार की बेचैनी भी बढ़ा रखी है। स्थिति से निपटने के लिए उच्चस्तरीय बैठकों का सिलसिला चल रहा है। हालांकि भारत की तरफ से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है, जिसे पलटवार के तौर पर देखा जाए। हां, इतना जरूर है कि अमेरिका ने भारत के साथ रिश्तों को और बिगाड़ लिया है। रूस से तेल की खरीद न रुकने के कारण भारत पर अमेरिका आग बबूला है। वह खुद रूस से सस्ता तेल खरीदने को लॉबिंग कर रहा है। भारत से अधिक तेल चीन खरीद रहा है, मगर ट्रंप ने फिलहाल बीजिंग को टैरिफ में राहत दे रखी है। इस बीच अमेरिका के प्रख्यात अर्थशास्त्री जेफरी सैश का बयान विचार करने योग्य है। जेफरी का मानना है कि भारत पर इतना अधिक टैरिफ लगाकर ट्रंप ने अमेरिका का नुकसान किया है। इससे वह दुनिया में अलग-थलग पड़ जाएगा और अमेरिकी कंपनियों का भारी नुकसान होगा। टैरिफ की मार से भारत की जीडीपी छह के आंकड़े से नीचे पहुंचने का अनुमान भी जाहिर किया जा रहा है। कोरोना काल में भारत की अर्थव्यवस्था को बेहद खराब दौर से गुजरना पड़ा था।

उस वक्त सरकार ने छोटे-बड़े उद्योगों को राहत देने और उत्पादन सुचारू रखने के मकसद से महत्वपूर्ण कदम उठाए थे। कोरोना की मार से उबरने के बाद अर्थव्यवस्था की गाड़ी ने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़नी आरंभ कर दी थी, मगर नया संकट दरवाजे पर दस्तक दे चुका है। उम्मीद की जानी चाहिए कि मोदी सरकार संकट के इस हालात से भी देश को बाहर निकालने में कामयाब हो सकेगी। डेढ़ अरब की आबादी का यह मुल्क निश्चित रूप से अमेरिका के आगे घुटने नहीं टेकेगा। जानकारों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप को जब तक अपनी गलती का अहसास होगा तब तक काफी देर हो चुकी होगी और अमेरिका को बड़ी चपत भी लगेगी। वाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप के कारोबारी सलाहकार पीटर नवारो ने तो यूक्रेन युद्ध को ‘मोदी का युद्ध’ करार दे दिया है। जो बताता है कि ट्रंप प्रशासन और भारत सरकार के बीच संबंध काफी खराब हो चुके हैं। इस बीच पीएम मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के लिए चीन का दौरा करने का फैसला किया है।