जीडीए वीसी अतुल वत्स बोले नगर निगम को 70 करोड़ रुपए का जल्द किया जाएगा भुगतान
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। इंदिरापुरम कॉलोनी को नगर निगम को हैंडओवर हो जाने के बाद अब जीडीए और नगर निगम का डेडीकेटिड ज्वाइंट खाता खोला जाएगा। इसमें जीडीए एक मुश्त 70 करोड़ रुपए नगर निगम को देगा। उम्मीद है कि जीडीए बोर्ड बैठक की मिनिट्स जारी होने के बाद यह भुगतान कर देगा। जीडीए द्वारा दी जाने वाली यह धनराशि इसी हफ्ते के अंत तक देने की योजना हंै। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने बताया कि जीडीए और नगर निगम के बीच हुए एमओयू साइन के तहत दोनों विभाग का ज्वाइंट खाता बैंक में खोला जाएगा। इसके तहत ही 70 करोड़ रुपए का भुगतान नगर निगम को जल्द किया जाएगा। इंदिरापुरम कॉलोनी हैंडओवर होने के बाद अब वहां के लोगों को बेहतर सुविधा मिल सकें। बता दें मेरठ में मंडलायुक्त सेल्वा कुमारी जे.की अध्यक्षता में बीते 6 सितंबर को मेरठ में जीडीए की 166वीं बोर्ड बैठक हुई थी। मंडलायुक्त की अध्यक्षता में जीडीए की इंदिरापुरम कॉलोनी को नगर निगम को हस्तांतरित करने पर मुहर लग गई थी।जीडीए बोर्ड बैठक में जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स और नगर आयुक्त के बीच इंदिरापुरम योजना को हस्तांतरण करने पर सहमति बनी थीं। जीडीए अब निगम को 185 करोड़ रुपए देगा। इसकी पहली किस्त के रूप में जीडीए को 70 करोड़ रुपए देने है,जिसके बाद से हैंडओवर की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। जीडीए अब बोर्ड बैठक की मिनिट्स जारी होने का इंतजार कर रहा है। इसके साथ ही नगर निगम को जीडीए द्वारा दी जाने वाली धनराशि भी जुटाने में लगा है। ताकि बोर्ड बैठक की मिनिट्स जारी होने के बाद नगर निगम को 70 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा सकें। इसलिए दोनों विभाग का ज्वाइंट खाता भी जल्द खोला जाएगा। इस भुगतान के बाद ही इंदिरापुरम योजना को नगर निगम को हैंडओवर होने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। इसी हफ्ते जीडीए यह भुगतान नगर निगम को कर देगा। इसके लिए जीडीए फंडिंग की व्यवस्था में लगा है। बता दें कि विधानसभा उपचुनाव की आचार संहिता लागू होने से पूर्व इंदिरापुरम योजना में नगर निगम नए सिरे से काम शुरू कर देगा। इंदिरापुरम योजना को नगर निगम को हैंडओवर करने के लिए वहां के पार्षद पिछले 20 साल से मांग कर रहे थे। पार्षदों का आरोप था कि वह वार्ड कोटे का पैसा यहां पर खर्च नहीं कर पाते हैं। लोगों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही। दूषित पानी,सीवर ओवरफ्लो, जलभराव,गंदगी आदि समस्याओं से अब निजात मिल सकेगी। जीडीए से मिलने वाले फंड से नगर निगम उसी मद में यह पैसा खर्च करेगा। साथ ही नए साधन और जरूरी सामान भी खरीदेगा। इंदिरापुरम योजना के लिए जीडीए तीन महीने तक निगम स्टॉफ की मदद करेगा। नगर निगम भी जीडीए के स्टॉफ से ही क्षेत्र में काम कराएगा। तीन महीने के भीतर निगम को हालांकि स्टॉफ की व्यवस्था करनी होगी। नगर निगम इंदिरापुरम जोन भी बना सकता है। तीन महीने के बाद पूरी तरह से निगम के स्टॉफ को ही क्षेत्र में सुविधाएं देनी होगी। इंदिरापुरम को नगर निगम एक जोन बना सकता हैं। नगर निगम के फिलहाल पांच जोन है,इनमें कविनगर, विजयनगर,सिटी,वसुंधरा और मोहननगर जोन शामिल हैं। इनमें इंदिरापुरम जोन भी जुड़ जाएगा। यहां जोनल कार्यालय बनाने के लिए निगम यहां पर जीडीए से आॅफिस भी लेगा। इंदिरापुरम में नगर निगम के कुल 7 वार्ड हैं। इनमें से ज्यादातर पार्षद कोटे का फंड क्षेत्र में खर्च ही नहीं कर पाते थे। जीडीए द्वारा नगर निगम को संयुक्त खाता खोलकर दी जाएगी। जीडीए इसमें एक मुश्त 70 करोड़ रुपए हस्तांतरण के समय देगा। इस धनराशि को देने के बाद से ही हस्तान्तरण की प्रक्रिया मानी जाएगी। बाकी धनराशि तीन किस्तों में दी जाएगी। इसमें 31 दिसंबर 2024 तक 40 करोड़ रुपए,31 मार्च 2025 तक 40 करोड़ रुपए और 1 जुलाई 2025 तक 35 करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा।
















