जे. रविंद्र गौड़ की डिजिटल जनसुनवाई पहल से बदलेगा गाजियाबाद पुलिसिंग का चेहरा

-वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए जनता से सीधे संवाद, रियल टाइम में शिकायतों का समाधान

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। पुलिस आयुक्त जे. रविंद्र गौड़ के नेतृत्व में जनता की शिकायतों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण समाधान को प्राथमिकता देते हुए गाजियाबाद कमिश्नरेट पुलिस ने जनसुनवाई प्रक्रिया को डिजिटल और प्रभावी स्वरूप में ढालने की नई पहल शुरू की है। पुलिस आयुक्त जे. रविंद्र गौड़ के निर्देश पर सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनसुनवाई का आयोजन किया गया, जिसमें कमिश्नरेट के सभी सहायक पुलिस आयुक्त एवं थाना प्रभारी स्तर के अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।

जनसुनवाई के दौरान पुलिस आयुक्त ने जनता की समस्याओं, शिकायतों और सुझावों को गंभीरता से सुना और मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर शिकायत का समयबद्ध, पारदर्शी और संवेदनशील ढंग से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। इस डिजिटल जनसुनवाई प्रणाली की खास बात यह रही कि शिकायतकर्ता को उसकी शिकायत पर की जा रही कार्रवाई की जानकारी रियल टाइम में दी गई। संबंधित थाना प्रभारी या एसीपी स्वयं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए जवाब दे रहे थे, जिससे न सिर्फ शिकायतों की गंभीरता से समीक्षा हुई, बल्कि शिकायतकर्ता को भी सीधा संवाद और संतोषजनक उत्तर मिला।

पुलिस आयुक्त जे. रविंद्र गौड़ ने बताया जनसुनवाई एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी है। हमारा प्रयास है कि हर शिकायत का समाधान पारदर्शी, समयबद्ध और संवेदनशील ढंग से हो। डिजिटल जनसुनवाई के माध्यम से हम न केवल शिकायतकर्ता को रियल टाइम में जवाब दे पा रहे हैं, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित हो रही है। हमारा लक्ष्य यही है कि हर नागरिक को प्रभावी और भरोसेमंद पुलिस सेवा मिले, जिससे गाजियाबाद में कानून व्यवस्था के साथ-साथ जन-आस्था और सहयोग भी सुदृढ़ हो।

पुलिस आयुक्त ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि थानों में फीडबैक और शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं जनोन्मुखी बनाया जाए। उनका कहना था कि जनसुनवाई केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह जनता से विश्वास का रिश्ता जोडऩे का माध्यम बने। गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट की इस पहल को पुलिस-जन संवाद को मजबूत करने और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि डिजिटल जनसुनवाई के इस मॉडल से नागरिकों को तेज़, प्रभावी और भरोसेमंद समाधान मिलेगा और पुलिस व्यवस्था में जन-आस्था और विश्वास और मजबूत होगा।