जयंत चौधरी एक बार फिर बने राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष, मथुरा में सम्पन्न हुआ ऐतिहासिक अधिवेशन

-देशभर से जुटे कार्यकर्ताओं और 50,000 से अधिक जनसमुदाय ने अधिवेशन में लिया हिस्सा, कृषि, युवाओं और महिला सशक्तिकरण पर पारित किए महत्वपूर्ण प्रस्ताव

उदय भूमि संवाददाता
मथुरा। राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के इतिहास में रविवार का दिन एक बार फिर विशेष और ऐतिहासिक बन गया। कोसीकलां स्थित अनाजमंडी में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता जयंत चौधरी को सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। अधिवेशन में देशभर से पार्टी के पदाधिकारी, प्रतिनिधि, कार्यकर्ता और 50,000 से अधिक लोग उपस्थित रहे।
अधिवेशन की शुरुआत में जयंत चौधरी ने बिहार चुनाव के परिणामों का उदाहरण देते हुए विपक्ष की कमजोरियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि बिहार में एनडीए की जीत महिला सशक्तिकरण और समाज की मजबूत विचारधारा का प्रमाण है। विपक्ष के पास कोई ठोस विचारधारा नहीं होने के कारण उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। जयंत चौधरी ने स्पष्ट किया कि कोई भी पार्टी बिना मजबूत राजनीतिक विचारधारा के लंबे समय तक सफल नहीं हो सकती। अधिवेशन में नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का चुनाव भी हुआ, जिसमें जयंत चौधरी को सर्वसम्मति, समर्थन और विश्वास के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। इस प्रस्ताव को 14 राज्यों के प्रदेशाध्यक्षों ने अनुमोदन दिया। खुले अधिवेशन में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने ध्वनि मत से अपने नेता के प्रति समर्थन और भरोसा जताया और आगामी वर्षों में नए संकल्प और ऊर्जा के साथ काम करने का संकल्प लिया। अधिवेशन के दौरान तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया।

आर्थिक प्रस्ताव:
कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए युवाओं के लिए स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया। इसके अलावा उर्वरकों के अनियंत्रित उपयोग और भूजल के दोहन पर नियंत्रण, फसल विविधीकरण और किसानों को पर्यावरण अनुकूल खेती की ओर प्रेरित करने के लिए विशेष सरकारी सहायता की मांग की गई।

सामाजिक प्रस्ताव:
युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों और उनके सशक्तिकरण के लिए ठोस नीति बनाने का निर्णय लिया गया। युवाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने हेतु चुनाव में भाग लेने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष करने का प्रस्ताव पेश किया गया। महिलाओं की सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मजबूत नीति बनाने और वंचित वर्गों के विकास के लिए न्यायसंगत योजनाएं बनाने का निर्णय लिया गया।

जयंत चौधरी ने कहा कि किसान, मजदूर और गरीब की बात करना ही लोकदल की पहचान है। आज का युवा राजनीति में आने से पहले चौधरी चरण सिंह और लोकदल के इतिहास को समझे। यह आवश्यक है कि राजनीति समाज के सेवा का माध्यम बने न कि व्यक्तिगत लाभ का। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे पार्टी को सिर्फ परिवार के लिए नहीं, बल्कि समाज और देश के लिए मजबूत बनाएं। अधिवेशन में यह भी घोषणा की गई कि 2027 में चौधरी चरण सिंह की 125वीं पुण्यतिथि पर ग्राम पंचायतों की खाली जमीनों पर वन वाटिका स्थापित की जाएगी, जिसमें सवा करोड़ पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया जाएगा। जयंत चौधरी ने कहा कि यह परियोजना किसानों, युवाओं और समाज के लिए स्थायी लाभ देने वाली होगी।

मथुरा में यह अधिवेशन राष्ट्रीय लोकदल के इतिहास में तीसरी बार आयोजित हुआ। पूर्व मंत्री ठाकुर तेजपाल सिंह ने बताया कि पहले अधिवेशन 1971 में गांधी पार्क, चौक बातार और दूसरे 1982 में वृंदावन के फोगला आश्रम में हुए थे। उन्होंने कहा कि चौधरी अजित सिंह ने किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए थे, जिसमें उनके आयकर विवादों का समाधान शामिल था। अधिवेशन के संचालन की जिम्मेदारी राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी ने संभाली। इसके अलावा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) इंद्रजीत सिंह टीटू, उत्तर प्रदेश के महामंत्री रविंद्र चौहान, महिला मोर्चा महानगर अध्यक्ष रेखा चौधरी, संजीव अरोड़ा, दिनेश शर्मा और सैकड़ों गाजियाबाद के कार्यकर्ता उपस्थित थे। इस भव्य और ऐतिहासिक अधिवेशन ने न केवल पार्टी में नई ऊर्जा का संचार किया बल्कि पार्टी के युवाओं, किसानों, महिलाओं और समाज के वंचित वर्गों के लिए नई योजनाओं और नीतियों की दिशा भी स्पष्ट की। जयंत चौधरी का नेतृत्व पार्टी के लिए नए संकल्पों और लक्ष्यों का प्रतीक बन गया है।