कुछ मिनटों में मातम में बदल गई खुशियां: मां के सीने से लिपटा मिला 4 साल के मासूम का शव, बरगी डैम क्रूज हादसे ने छीनी कई घरों की खुशियां

उदय भूमि संवाददाता
जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में हुआ दर्दनाक क्रूज हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देने वाली त्रासदी बन गया है। नर्मदा नदी के बैकवाटर में अचानक बिगड़े मौसम, तेज हवाओं और ऊंची लहरों के बीच पर्यटकों से भरा क्रूज पल भर में पानी में समा गया। इस हादसे ने इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीरें सामने ला दीं, जिनमें सबसे मार्मिक दृश्य वह था जब एक मां अपने चार साल के मासूम बेटे को सीने से लगाए मृत अवस्था में मिली। हादसे के बाद जब गोताखोरों ने लगभग 12 घंटे की मशक्कत के बाद पानी से शव निकालना शुरू किया, तब हर बरामद शव के साथ किनारे खड़े परिजनों की उम्मीदें टूटती चली गईं। बचाव दल को जब एक महिला और उसके मासूम बच्चे का शव मिला, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। बताया जा रहा है कि आखिरी सांस तक मां ने अपने बच्चे को सीने से लगाए रखा, मानो मौत से भी उसे बचाने की कोशिश कर रही हो। मां की ममता की यह तस्वीर पूरे हादसे की सबसे दर्दनाक याद बन गई है।

अब तक इस हादसे में 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 23 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे ने खासतौर पर उन परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है, जो छुट्टियां मनाने और खुशियां तलाशने आए थे, लेकिन लौटे तो सिर्फ दर्द और आंसू लेकर। दिल्ली निवासी प्रदीप कुमार इस हादसे में किसी तरह बच गए, लेकिन उनकी पत्नी और चार साल का बेटा अब भी लापता हैं। प्रदीप ने हादसे की भयावह कहानी बताते हुए क्रूज प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि क्रूज पर सुरक्षा इंतजाम लगभग नहीं थे। यात्रियों को समय पर लाइफ जैकेट तक नहीं दी गई। जब हालात बिगडऩे लगे तो क्रू के सदस्य खुद को बचाने में लग गए और यात्रियों को उनके हाल पर छोड़ दिया।

प्रदीप के अनुसार, तेज हवाएं शुरू होते ही यात्रियों ने चालक से क्रूज को किनारे लगाने की गुहार लगाई थी। किनारे पर मौजूद लोगों ने भी संकेत देकर खतरे से आगाह किया, लेकिन चालक शुरुआती प्वाइंट तक वापस जाने पर अड़ा रहा। कुछ ही मिनटों में तेज लहरों ने क्रूज का संतुलन बिगाड़ दिया और वह नर्मदा नदी के बैकवाटर में डूब गया। हादसे के बाद बरगी डैम क्षेत्र में चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने बिना देर किए पानी में कूदकर कई लोगों की जान बचाई। प्रशासन और बचाव दल भी तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया गया। रात भर डूबे हुए क्रूज को बाहर निकालने की कोशिश होती रही। लोहे के तारों से उसे खींचने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भोपाल और आगरा से एनडीआरएफ की टीमों को बुलाया गया। विशेषज्ञ गोताखोर अब क्रूज के अंदर फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। प्रशासन को आशंका है कि लापता लोगों के जीवित मिलने की संभावना बेहद कम है, जिससे परिजनों की बेचैनी और बढ़ गई है। घटना के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने तत्काल एक्शन लेते हुए राहत और बचाव अभियान तेज किया। कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह और मंत्री धर्मेंद्र लोधी पूरी रात घटनास्थल पर मौजूद रहे और रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी करते रहे। जबलपुर के आईजी प्रमोद वर्मा ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद व्यापक स्तर पर अभियान शुरू किया गया और हैदराबाद से विशेष रेस्क्यू टीम भी बुलाई जा रही है, जो आधुनिक उपकरणों के साथ रात में भी खोज अभियान चला सकेगी।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे के समय मौसम अचानक खराब हो गया था। तेज हवाओं और ऊंची लहरों के कारण क्रूज अस्थिर हो गया था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि खतरे के संकेत पहले ही मिल चुके थे, लेकिन समय रहते क्रूज को किनारे नहीं लगाया गया। अब प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। इस घटना के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं-क्या क्रूज पर यात्रियों की संख्या तय सीमा से ज्यादा थी? क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? क्या खराब मौसम के बावजूद क्रूज को रवाना किया गया? इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे। बरगी डैम की लहरों में डूबा यह क्रूज सिर्फ एक नाव नहीं था, बल्कि उसमें सवार कई परिवारों के सपने, मुस्कानें और भविष्य भी डूब गए। मां के सीने से लिपटे मिले मासूम की तस्वीर ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि लापरवाही की कीमत अक्सर मासूम जिंदगियों को चुकानी पड़ती है। अब देशभर की निगाहें रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं और हर दिल यही दुआ कर रहा है कि जो लोग अभी लापता हैं, उनके परिवारों को किसी चमत्कार की खबर मिल सके।