ट्वीट के जरिए किसानों को समझाने का प्रयास
नई दिल्ली। आंदोलनरत किसानों को मनाने के लिए अब केंद्रीय मंत्रियों को आगे आना पड़ा है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को ट्वीट किए। इसके जरिए किसानों को नए कृषि कानून के फायदे समझाए गए। कहा गया कि फसल खरीदने को निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को समाप्त नहीं किया गया है। केंद्र सरकार के नए कृषि कानून के खिलाफ किसानों ने आंदोलन छेड़ रखा है। दिल्ली के विभिन्न बॉर्डर पर डटे किसानों के कारण सुरक्षा एवं शांति व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में किसानों को नए कृषि कानून के लाभकारी पहलुओं से अवगत कराया था। पीएम की अपील के बावजूद बात नहीं बन पाई। किसानों ने पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। अब केंद्रीय मंत्रियों ने ट्वीट के जरिए किसानों को समझाने का प्रयास किया है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट कर कहा कि कृषि कानून पर गलत-फहमी ना रखें। पंजाब के किसानों ने पिछले साल से अधिक धान मंडी में बेचा और ज्यादा एमएसपी पर बेचा। एमएसपी भी जीवित है और मंडी भी जीवित है। सरकारी खरीद भी हो रही है। उधर, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट में लिखा कि नए कृषि कानून एपीएमसी मंडियों को समाप्त नहीं करते हैं। मंडियां पहले की भांति चलती रहेंगी। नए कानून ने किसानों को अपनी फसल कहीं भी बेचने की आजादी दी है, जो भी किसानों को सबसे अच्छा दाम देगा, वह फसल खरीद पाएगा, चाहे वह मंडी में हो अथवा मंडी के बाहर। उधर, दिल्ली के सिंघु और टिकरी बॉर्डर के अलावा दिल्ली-यूपी बॉर्डर के पास भी किसानों का जमावड़ा है। किसानों का नया नारा अब दिल्ली चलो नहीं बल्कि दिल्ली घेरो है। दिल्ली के 5 प्वाइंट पर किसान अब धरना देंगे। भाकियू नेता राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार की निंदा की है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि बुराड़ी कोई व्हाइट हाउस नहीं है कि किसान वहां चले जाएं। सरकार को बॉर्डर पर आकर बातचीत करनी होगी।














