-हजारों रामभक्तों ने गूंजाया ‘जय श्रीराम’ गोस्वामी समाज ने निकाली भव्य शोभायात्रा, इतिहास बन गई तुलसी जयंती
उदय भूमि संवाददाता
मैनपुरी। चित्रकूट के घाट भई संतन की भीड़, तुलसीदास चंदन घिसे तिलक करें रघुवीर… इस पावन चौपाई को साकार करते हुए मैनपुरी की सड़कों पर आध्यात्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और ब्राह्मण समाज के गौरव की अद्भुत झलक देखने को मिली। गोस्वामी ब्राह्मण महासभा के नेतृत्व में, नगर के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी के साथ निकली शोभायात्रा ने रामभक्ति की अलख को फिर से जागृत कर दिया। शहर की प्रमुख गलियां नगरिया चौराहा, किला, बजरिया, मदार गेट, देवी रोड, घंटाघर चौक उस समय आस्था की गूंज से भर गईं जब राम दरबार से सजे रथ पर विराजमान तुलसीदास जी की मूर्ति नगर भ्रमण पर निकली। भक्ति गीतों, ढोल-नगाड़ों, और भगवा पताकाओं की सजीव लहर ने माहौल को दिव्यता से भर दिया। यात्रा में छोटे बच्चों से लेकर वृद्ध तक पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। युवाओं की टोलियां जय श्रीराम, तुलसी बाबा अमर रहें, रामचरितमानस अमर ग्रंथ है जैसे नारों से गगन गूंजा रही थीं।
बतौर मुख्य अतिथि गाजियाबाद से पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अतिथि मानसिंह गोस्वामी ने इस आयोजन को सांस्कृतिक पुनर्जागरण की संज्ञा दी। यात्रा प्रारंभ से पहले आयोजित स्वागत समारोह में उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने समाज को राम के आदर्शों से जोड़ा, आज जब नैतिक मूल्यों पर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं, तब तुलसी का स्मरण समाज के लिए शक्ति-स्रोत है। यह यात्रा आत्मा की पुकार है कि हम फिर से अपनी जड़ों की ओर लौटें। वहीं राजस्थान की प्रदेश मंत्री अनुसुइयाया गोस्वामी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि तुलसीदास जी की रचना ‘रामचरितमानस’ केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का जीवंत चित्र है। मैनपुरी में यह भव्य आयोजन देखकर गर्व होता है कि संस्कृति की मशाल आज भी गोस्वामी समाज के हाथों में सुरक्षित है।
इस भव्य आयोजन की सफलता में अनेक समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों का योगदान रहा। कार्यक्रम के संरक्षक हरिशंकर गोस्वामी और आयोजक पुष्पेंद्र गोस्वामी की नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता आयोजन की महीनों से तैयारी में लगे थे। यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रखने में एडवोकेट अमित गोस्वामी, गोपाल गोस्वामी, पुरुषोत्तम वैद्य, बृजेश, गौरव गोस्वामी, हरिकिशन, पंकज गोस्वामी, विशाल गोस्वामी, भाजपा जिलाध्यक्ष ममता राजपूत, अनिल, अश्विनी कुमार, एडवोकेट रजत गौड़, कमल गौरव अमित, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप चौहान समेत पूरी गोस्वामी समाज की भूमिका उल्लेखनीय रही। शोभायात्रा के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को एक ही सूत्र में पिरोने का जो कार्य हुआ, वह तुलसी की रचनाओं का प्रभाव है। तुलसीदास जी ने जब ‘रामचरितमानस’ की रचना की, तब समाज में अस्थिरता, आक्रोश और विदेशी प्रभाव चरम पर था।
उन्होंने अवधी जैसी जनभाषा में रामकथा लिखकर भारतीय जनमानस को धर्म, नीति और संस्कारों की ओर लौटा दिया। आज भी तुलसी की चौपाइयां घर-घर में गूंजती हैं। यही कारण है कि उनकी जयंती सिर्फ एक परंपरा नहीं, एक विचार यात्रा है, जिसे मैनपुरी ने अपने श्रम और श्रद्धा से सजीव कर दिखाया। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि गोस्वामी समाज केवल भूतकाल की महिमा में नहीं जीता, बल्कि आज भी सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नेतृत्व में अग्रणी है। यात्रा में महिलाओं, बच्चों, युवाओं और वरिष्ठजनों की समान भागीदारी रही। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह पुष्पवर्षा की गई, जलसेवा की व्यवस्था रही, और सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन की सक्रिय सहभागिता भी सराहनीय रही।
जनमानस की आवाज: हर साल हो ऐसा ही आयोजन
शहरवासियों ने इस आयोजन को यादगार बताते हुए कहा कि यह एक नई शुरुआत है। हर साल तुलसी जयंती को इसी भव्यता से मनाया जाना चाहिए। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना का भी अद्भुत उदाहरण है।
समापन पर संकल्प और साधना का संदेश
शोभायात्रा का समापन नगरिया चौराहे पर हुआ, जहां सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर रामधुन का सामूहिक गायन किया और तुलसीदास जी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन कर भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का संकल्प लिया।
“रामकथा जब-जब गूंजेगी, भारत जागता रहेगा”
तुलसीदास की जयंती पर मैनपुरी ने जो चित्र रचा, वह केवल नगर की सीमाओं में नहीं रहेगा, बल्कि आने वाली पीढिय़ों को यह बताएगा कि धर्म, संस्कृति और समाज को जोडऩे की शक्ति आज भी जीवित है। यह आयोजन केवल एक शोभायात्रा नहीं, बल्कि इतिहास में दर्ज हो जाने वाला सांस्कृतिक शंखनाद था।


















