-चाइनीज उत्पादों से दूरी, मिट्टी के दीयों और प्रदूषण मुक्त उत्सव की ओर बढ़ता रुझान
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। दीपावली का पर्व सिर्फ रोशनी और खुशियों का प्रतीक नहीं, बल्कि हमारे जीवन में शौर्य, पराक्रम और समृद्धि का संदेश भी लेकर आता है। इस पावन अवसर पर दीयों का विशेष महत्व माना जाता है। परंपरा है कि मिट्टी के दीये जलाने से घर-परिवार में सुख-शांति और सौभाग्य बढ़ता है। हालांकि, पिछले वर्षों में तेल और अन्य सामग्रियों की बढ़ती महंगाई के कारण लोगों का रुझान मोमबत्तियों और बिजली की झालरों की ओर बढ़ गया था। लेकिन इस वर्ष चीनी सामानों के बहिष्कार के चलते लोगों ने स्वदेशी मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता दी है। इस बदलाव से कुम्हारों को उम्मीद है कि इस दीपावली उनकी बिक्री में वृद्धि होगी और वे तेजी से मिट्टी के दीये बना रहे हैं।
पीपी रियलकॉन के डायरेक्टर अंकुर गोयल ने बताया कि दीपावली केवल खुशियों का पर्व नहीं, बल्कि संकल्प लेने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सभी को चाहिए कि चाइनीज उत्पादों का बहिष्कार करें, अपने घरों और समाज में स्वदेशी उत्पादों को अपनाएँ और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहें। अंकुर गोयल ने यह भी बताया कि पटाखों से होने वाला प्रदूषण हमारे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालता है, इसलिए प्रदूषण रहित दीपावली के लिए पटाखों का बहिष्कार करना आवश्यक है। उनका कहना है कि मिट्टी के दीयों से घरों को सजाना न केवल परंपरा का पालन है, बल्कि यह हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।
इस वर्ष कुम्हारों को उम्मीद है कि स्वदेशी दीयों की मांग में वृद्धि होगी। उन्होंने तेजी से दीयों का उत्पादन शुरू कर दिया है। अंकुर गोयल ने कहा कि यह न केवल व्यवसायिक दृष्टि से फायदेमंद है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और परंपराओं को भी मजबूती प्रदान करता है। अंकुर गोयल ने दीपावली के इस पावन अवसर पर लोगों से अपील की कि वे स्वदेशी दीयों और साफ-सुथरे त्योहार को अपनाएँ। इस प्रकार हम न केवल अपनी परंपरा का सम्मान करेंगे, बल्कि अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा में भी योगदान देंगे।

















