मिथिलांचल ने खोया जनसेवा का सशक्त प्रहरी, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश मिश्रा का निधन

-संगठन निर्माण से जनसेवा तक अमिट छाप छोड़ गए राकेश मिश्रा, झंझारपुर से बिहार भाजपा तक शोक की लहर
-हटनी गांव से निकलकर भाजपा संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले लोकप्रिय नेता थे राकेश मिश्रा
-बाढ़, सड़क, स्वास्थ्य और जनसमस्याओं को लेकर हमेशा रहे मुखर, जनता के बीच थी विशेष पहचान
-पूर्व जिलाध्यक्ष के निधन पर राजनीतिक, सामाजिक और संगठनात्मक जगत में शोक, अपूरणीय क्षति बताया

उदय भूमि संवाददाता
मधुबनी। जनसेवक तरुण मिश्र के बड़े भाई एवं भारतीय जनता पार्टी के झंझारपुर संगठनात्मक जिला के पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश कुमार मिश्र (राकेश मिश्रा) के निधन से बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र सहित भाजपा संगठन में गहरा शोक व्याप्त है। उनके आकस्मिक निधन की खबर फैलते ही राजनीतिक, सामाजिक और जनसेवा से जुड़े लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। वर्षों तक संगठन और समाज के लिए समर्पित भाव से कार्य करने वाले राकेश मिश्रा को एक ऐसे जननेता के रूप में याद किया जा रहा है, जिन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाकर आम लोगों के बीच अपनी अलग पहचान स्थापित की। मधुबनी जिले के घोघरडीहा प्रखंड स्थित हटनी गांव में जन्मे राकेश मिश्रा का जीवन संघर्ष, समर्पण और संगठन निर्माण की प्रेरक कहानी रहा है। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े राकेश मिश्रा ने बचपन से ही सामाजिक सरोकारों को निकट से देखा और समझा। यही कारण रहा कि युवावस्था में उन्होंने राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रभावित होकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी से सक्रिय रूप से जुड़कर जनसेवा का मार्ग चुना। राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों में उन्होंने बूथ स्तर के कार्यकर्ता के रूप में संगठन के लिए अथक परिश्रम किया। उनकी कार्यशैली, सादगी, कार्यकर्ताओं के प्रति आत्मीयता और नेतृत्व क्षमता के कारण संगठन में उनका कद लगातार बढ़ता गया।

पार्टी ने उनकी निष्ठा और संगठनात्मक दक्षता को देखते हुए उन्हें झंझारपुर संगठनात्मक जिला भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया। यह उनके राजनीतिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। जिलाध्यक्ष के रूप में राकेश मिश्रा ने झंझारपुर, घोघरडीहा, फुलपरास, अंधराठाढ़ी और आसपास के क्षेत्रों में भाजपा के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बूथ स्तर तक पार्टी की पहुंच सुनिश्चित की और कार्यकर्ताओं को संगठन की रीढ़ मानते हुए उन्हें सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उनके नेतृत्व में संगठन ने गांव-गांव तक अपनी पकड़ मजबूत की और अनेक चुनावी अभियानों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ राकेश मिश्रा सामाजिक सरोकारों से भी गहराई से जुड़े रहे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को उठाना, ग्रामीण सड़कों के निर्माण की मांग करना, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए आवाज बुलंद करना तथा किसानों और आम नागरिकों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहा।

वे उन नेताओं में गिने जाते थे जो जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझते और समाधान के लिए लगातार प्रयास करते थे। क्षेत्र के लोगों के बीच उनकी छवि एक सहज, सरल और सुलभ नेता की थी। कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या लेकर उनके पास पहुंच सकता था और राकेश मिश्रा उसे गंभीरता से सुनते थे। यही कारण था कि राजनीतिक सीमाओं से परे जाकर भी उन्हें सम्मान प्राप्त था। विरोधी दलों के लोग भी उनके व्यवहार और सामाजिक योगदान की सराहना करते थे। जिलाध्यक्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी उन्होंने संगठन से दूरी नहीं बनाई। वे भाजपा के वरिष्ठ मार्गदर्शक के रूप में सक्रिय बने रहे और पार्टी के विभिन्न अभियानों, बैठकों तथा जनसंपर्क कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे। संगठन के युवा कार्यकर्ताओं को तैयार करने और उन्हें नेतृत्व की दिशा देने में भी उनका विशेष योगदान रहा। उनके निधन की सूचना मिलते ही भाजपा कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया। अनेक नेताओं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे मिथिलांचल और भाजपा संगठन के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

लोगों का कहना है कि राकेश मिश्रा केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि समाज को जोडऩे वाले ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने अपने जीवन को जनसेवा के लिए समर्पित कर दिया। राकेश मिश्रा के निधन से उनके परिवार, शुभचिंतकों और समर्थकों में गहरा दुख है। विशेष रूप से उनके छोटे भाई और जनसेवक तरुण मिश्र के लिए यह व्यक्तिगत एवं पारिवारिक क्षति अत्यंत पीड़ादायक है। उनके निधन से एक ऐसा शून्य उत्पन्न हुआ है जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं दिखाई देती। मिथिलांचल की सामाजिक और राजनीतिक चेतना में अपनी अमिट छाप छोडऩे वाले राकेश कुमार मिश्र आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जनसेवा, संगठन के प्रति समर्पण और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदैव लोगों को प्रेरित करती रहेगी। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिवार को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति दें। उनकी स्मृतियां सदैव जनमानस के हृदय में जीवित रहेंगी।