-अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर प्रशासन और उद्यमियों के बीच सीधा संवाद, मोदीनगर-निवाड़ी में नए औद्योगिक क्षेत्र का ऐलान
-बैंक गारंटी, ईएसआईसी, जीडीए नोटिस और बिजली समेत कई मुद्दों पर जिलाधिकारी ने दिए त्वरित निर्देश, उद्यमियों को दिलाया भरोसा
-‘फ्री-होल्ड’ औद्योगिक भूखंड, एक्सपो सेंटर और आधुनिक प्रदूषण निगरानी प्रणाली की मांग, आईआईए ने प्रशासन के समक्ष रखा विजन
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। अंतरराष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) दिवस के अवसर पर गुरुवार को संजयनगर स्थित फॉर्च्यून इन ग्राजि़या में इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) गाजियाबाद चैप्टर द्वारा आयोजित संवाद बैठक में जिला प्रशासन और उद्योग जगत एक मंच पर नजर आए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ ने उद्यमियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए स्पष्ट कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग देश के असली राष्ट्र निर्माता हैं। गाजियाबाद के उद्योगों को आगे बढ़ाने और उनकी समस्याओं के समयबद्ध समाधान के लिए जिला प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा। किसी भी उद्यमी को अपनी समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। कार्यक्रम का संचालन हर्ष अग्रवाल ने किया। औपचारिक परिचय सत्र के बाद जिलाधिकारी ने प्रदेश सरकार की औद्योगिक नीतियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए एक्सप्रेस-वे के किनारे आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर रही है। इसी क्रम में मोदीनगर-निवाड़ी क्षेत्र में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य जारी है और इसका लाभ आने वाले वर्षों में गाजियाबाद सहित पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उद्योग जगत को मिलेगा।
उन्होंने कहा सरकार की मंशा उद्योगों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। नए औद्योगिक क्षेत्रों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार किया जाएगा, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और उद्योगों को विस्तार का अवसर मिलेगा। जिलाधिकारी की घोषणा का स्वागत करते हुए आईआईए के निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नीरज सिंघल ने सुझाव दिया कि नए औद्योगिक क्षेत्र में उद्यमियों को ‘फ्री-होल्ड’ यानी स्वामित्व अधिकार के साथ भूमि आवंटित की जाए। उन्होंने कहा कि यदि उद्यमियों को मालिकाना हक मिलेगा तो वे अधिक आत्मविश्वास के साथ दीर्घकालिक निवेश करेंगे और प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। संवाद बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने उद्योग जगत से जुड़े कई वर्षों से लंबित मामलों पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष या उससे अधिक समय से लंबित बैंक गारंटी के मामलों की समीक्षा कर संबंधित विभागों को आवश्यक पत्र भेजे जाएंगे, ताकि उद्यमियों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि अनावश्यक रूप से अटके मामलों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर कराया जाएगा।
स्वास्थ्य सुविधाओं पर चर्चा करते हुए जिलाधिकारी ने राज्य कर्मचारी बीमा निगम (ईएसआईसी) अस्पताल को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा लोनी क्षेत्र में नया ईएसआईसी औषधालय खोलने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों और कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा निजी औद्योगिक क्षेत्रों की पुरानी इकाइयों को जारी किए जा रहे नोटिसों के मुद्दे पर भी जिलाधिकारी ने सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सभी मामलों की तथ्यात्मक समीक्षा कर तर्कसंगत एवं न्यायसंगत निर्णय लिया जाएगा, ताकि वर्षों से संचालित उद्योगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
उद्यमियों को भरोसा दिलाते हुए जिलाधिकारी ने कहा ‘यदि किसी उद्योगपति या उद्यमी के सामने कोई गंभीर समस्या आती है तो उसे जिला उद्योग बंधु की बैठक का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। वे सीधे मुझसे संपर्क करें। प्रशासन उद्योगों की हर वास्तविक समस्या के समाधान के लिए चौबीसों घंटे तैयार है। उद्योगों की प्रगति ही जिले की आर्थिक प्रगति है। बैठक में श्रम विभाग द्वारा नए श्रम कानूनों और श्रमिक कल्याण योजनाओं की भी जानकारी दी गई। प्रशासन की ओर से उपायुक्त उद्योग आशुतोष सिंह, उपश्रम आयुक्त डॉ. दिव्य प्रताप सिंह तथा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। आईआईए गाजियाबाद चैप्टर के कार्यपालक चेयरमैन संजय अग्रवाल ने उद्योग जगत की ओर से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए अघोषित बिजली कटौती, जीडीए की इंद्रप्रस्थ योजना से जुड़े भूखंड विवाद, विकास शुल्क, गुलधर रैपिड मेट्रो स्टेशन से आईटीसी तक फैले अतिक्रमण तथा अन्य स्थानीय समस्याओं के समाधान की मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि यदि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान हो जाए तो जिले के उद्योगों की उत्पादन क्षमता और निवेश दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नीरज सिंघल ने जिले में अत्याधुनिक बॉश प्रदूषण सूचकांक प्रणाली स्थापित करने तथा जिला उद्योग केंद्र की खाली भूमि पर आधुनिक एक्सपो सेंटर विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा कि ऐसा केंद्र बनने से स्थानीय उद्योगों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक अपनी पहुंच मजबूत करने का अवसर मिलेगा। इस पर जिलाधिकारी ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार होने के बाद हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। करीब सैकड़ों उद्यमियों की मौजूदगी में आयोजित यह संवाद बैठक उद्योग जगत और जिला प्रशासन के बीच विश्वास और समन्वय का मजबूत उदाहरण बनी।
कार्यक्रम के अंत में आईआईए पदाधिकारी संजय गर्ग ने सभी अतिथियों, अधिकारियों और उद्यमियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन के सहयोग से गाजियाबाद को प्रदेश के अग्रणी औद्योगिक जिलों में शामिल करने की दिशा में निरंतर प्रयास जारी रहेंगे। बैठक में जेपी कौशिक, एसके शर्मा, मनोज कुमार, प्रदीप गुप्ता, साकेत अग्रवाल, अमित नागलिया, यश जुनेजा, अमित बंसल, रमन मिगलानी, दिनेश गर्ग, संदीप गुप्ता, अजय पटेल, कुलदीप गुप्ता, पुनीत माहेश्वरी, सुभाष गुप्ता, अमरिक सिंह, मनीष मदान, बसंत अग्रवाल, विनीत माहेश्वरी और ओपी धमीजा सहित बड़ी संख्या में उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

















