-जलभराव रोकने को नगर आयुक्त ने बनाई विशेष मॉनिटरिंग टीम, जोनवार नोडल अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी
-हॉटस्पॉट पर बैरिकेडिंग, नालों की सफाई और कनेक्टिविटी दुरुस्त करने पर जोर, सिल्ट उठान की होगी रोजाना समीक्षा
-निर्माण, स्वास्थ्य, जलकल और प्रकाश विभाग मिलकर संभालेंगे मोर्चा, बरसात में नागरिकों की सुरक्षा रहेगी सर्वोच्च प्राथमिकता
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। मानसून की सक्रियता के साथ ही नगर निगम ने जलभराव और बारिश से होने वाली समस्याओं से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने शहर में नालों, पुलियाओं और जल निकासी व्यवस्था की प्रभावी निगरानी के लिए विशेष मॉनिटरिंग टीम का गठन किया है। इसके तहत सभी जोनों में वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो प्रतिदिन सफाई कार्यों, बैरिकेडिंग, सिल्ट उठान और जल निकासी व्यवस्था की मौके पर जांच करेंगे। नगर आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बारिश के दौरान किसी भी क्षेत्र में जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो और नागरिकों को सुरक्षित एवं सुचारू आवागमन की सुविधा मिल सके। नगर निगम द्वारा शहर के उन सभी स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया गया है, जहां प्रत्येक वर्ष बारिश के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती है। इन हॉटस्पॉट क्षेत्रों में नालों की गहन सफाई, पुलियाओं की मरम्मत, जल निकासी मार्गों की कनेक्टिविटी दुरुस्त करने और नालों में कचरा रोकने के लिए जाल लगाने का कार्य युद्धस्तर पर कराया जा रहा है।
नगर आयुक्त ने निर्माण विभाग को निर्देश दिए हैं कि जहां खुले नाले या अन्य जोखिम वाले स्थान हैं, वहां तत्काल प्रभाव से मजबूत बैरिकेडिंग कराई जाए, ताकि बारिश के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना की संभावना न रहे। नगर निगम ने बारिश के मौसम में विद्युत सुरक्षा को भी प्राथमिकता में रखा है। प्रकाश विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि शहर के सभी विद्युत पोलों पर चेतावनी संबंधी फ्लेक्स लगाए जाएं, जिससे बारिश के दौरान करंट जैसी घटनाओं से लोगों को सतर्क किया जा सके। इसके अलावा विभागीय अधिकारियों को नियमित निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कहीं भी खुले तार, क्षतिग्रस्त पोल या अन्य विद्युत संबंधी खतरे मौजूद न रहें। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि वर्षा ऋतु के दौरान नालों की सफाई किसी अभियान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह प्रतिदिन प्राथमिकता के आधार पर कराई जाएगी। सफाई के बाद निकलने वाली सिल्ट को भी निर्धारित समय सीमा के भीतर उठाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वही सिल्ट दोबारा नालों में जाकर जल निकासी व्यवस्था को प्रभावित न कर सके।
नोडल अधिकारियों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे प्रतिदिन अपने-अपने क्षेत्रों का निरीक्षण कर कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। नगर निगम ने जोनवार अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय कर दी है। सिटी जोन में अधिशासी अभियंता निर्माण विपुल कुमार को नोडल प्रभारी बनाया गया है। कविनगर जोन की जिम्मेदारी उद्यान प्रभारी डॉ. अनुज कुमार सिंह को सौंपी गई है। विजयनगर जोन में अधिशासी अभियंता जल सुनील कुमार को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। मोहन नगर जोन की जिम्मेदारी महाप्रबंधक जल केपी आनंद को दी गई है, जबकि वसुंधरा एवं इंदिरापुरम जोन की निगरानी मुख्य अभियंता निर्माण एन.के. चौधरी करेंगे। सभी नोडल अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में सफाई, जल निकासी और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग करेंगे।
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि इस बार बरसात के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जलकल विभाग और प्रकाश विभाग आपसी समन्वय के साथ संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। प्रमुख सड़कों के साथ-साथ आंतरिक गलियों और आवासीय क्षेत्रों में भी जल निकासी व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी। जहां आवश्यकता होगी वहां अतिरिक्त मशीनरी और मानव संसाधन भी लगाए जाएंगे, ताकि बारिश के दौरान लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी व्यवस्थाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि प्रत्येक कार्य का स्थलीय सत्यापन भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा और शहर को जलभराव मुक्त रखना नगर निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि किसी क्षेत्र में जलभराव, नालों की सफाई या बैरिकेडिंग संबंधी लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। नगर निगम का लक्ष्य है कि पूरे मानसून के दौरान शहर की जल निकासी व्यवस्था सुचारू रहे और नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।















