नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक की संवाद डिप्लोमेसी का रविवार को असर दिखाई दिया और पार्षदों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि सभी पार्षद सम्मानित हैं और नगर निगम के अभिन्न अंग हैं। कर्मचारियों और पार्षदों को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिये। रविवार सुबह नगर आयुक्त निगम मुख्यालय पहुंचे और पार्षदों के साथ बैठकर सुबह का नाश्ता किया। इस दौरान पार्षदों और नगर आयुक्त के बीच धरने के मुद्दे को लेकर भी बात हुई। थोड़ी देर बाद पार्षदों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की।
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। संवाद से सभी विवाद का हल संभव है। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक की संवाद डिप्लोमेसी का रविवार को असर दिखाई दिया और पार्षदों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की। पार्षदों के रवैये से नाराज नगर निगम कर्मचारियों ने शनिवार को मोर्चा खोल दिया था। शनिवार को दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की और नगर निगम का माहौल खराब करने का आरोप लगाया। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि सभी पार्षद सम्मानित हैं और नगर निगम के अभिन्न अंग हैं। कर्मचारियों और पार्षदों को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिये। रविवार सुबह नगर आयुक्त निगम मुख्यालय पहुंचे और पार्षदों के साथ बैठकर सुबह का नाश्ता किया। इस दौरान पार्षदों और नगर आयुक्त के बीच धरने के मुद्दे को लेकर भी बात हुई। थोड़ी देर बाद पार्षदों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की।
विदित हो कि नगर निगम पार्षदों का एक गुट शुक्रवार से हाउस टैक्स में कमी के मुद्दे को लेकर निगम मुख्यालय में धरना दे रहे थे। पार्षदों की मांग है कि हाउस टैक्स में पूर्व में जो बढ़ोत्तरी हुई है उसे तत्काल खत्म किया जाये और नई दर से लोगों से टैक्स वसूला है। मामला सरकारी राजस्व से जुड़ा हुआ है। ऐसे में बिना किसी शासनादेश के ऐसा कर पाना असंभव है। उधर, हाउस टैक्स कम करने से संबंधित मुकदमा इलाहाबाद उच्च न्यायालय में भी लंबित है। ऐसे में निगम अधिकारियों द्वारा शासनादेश और हाईकोर्ट के आदेश का इंतजार किया जा रहा है। शनिवार को पार्षदों और निगम कर्मचारियों में टकराव हो गया। कर्मचारियों का आरोप है कि धरने पर बैठे पार्षदों के गुट ने उनके काम में अड़चनें डाली, कार्यालय में प्रवेश करने और काम करने से रोकने की भी कोशिशें हुई। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ खूब नारेबाजी की थी।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक विवाद के बजाय बातचीत और नियमानुसार मसले को हल करने पर जोर देते हैं। नगर आयुक्त प्रतिदिन धरना पर बैठे पार्षदों से मिलते रहे और उन्हें नियम की जानकारी भी देते रहे। रविवार सुबह फिर नगर आयुक्त धरना पर बैठे पार्षदों के पास पहुंचे और उनके साथ ही बैठकर नाश्ता करने लगे। निगम मुख्यालय में मौजूद पार्षदों और निगम कर्मियों के साथ बैठकर नगर आयुक्त ने पूरी कचौरी का नाश्ता किया। इस दौरान पार्षदों और नगर आयुक्त के बीच संक्षिप्त वार्ता भी हुई। इस दौरान पार्षदों ने पिछली बोर्ड बैठक की मिनट्स उपलब्ध कराने सहित तीन मांगें रखी। नगर आयुक्त ने पार्षदों की मांगों को मानते हुए कहा कि फिलहाल कांवड़ यात्रा में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगी हुई है। ऐसे में कांवड़ यात्रा समाप्त होते ही मिनट्स महापौर को सौंप दी जाएगी।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बैठक में पार्षदों को भरोसा दिलाया कि निगम अधिकारियों की प्राथमिकता जनहित से जुड़े कार्यों को शीघ्रता से पूर्ण करना है। उन्होंने कहा कि हम सबका दायित्व है कि गाजियाबाद को एक बेहतर नगर के रूप में विकसित करें और जनहित से जुड़ी सभी मांगों का समाधान सौहार्दपूर्वक करें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कावड़ महोत्सव की सफलता निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और सभी निगम अधिकारी व कर्मचारी इसमें पूरे मनोयोग से जुटे हुए हैं। पार्षदों के सहयोग से इसे और भव्य बनाया जाएगा। पार्षदों की मांग है कि वर्तमान में संपत्ति कर के जो बिल ऑटोमेटिक सिस्टम से उपभोक्ताओं को भेजे जा रहे हैं, उन पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी गई है। संपत्ति कर पर दी जा रही 20 प्रतिशत की छूट की अवधि को 30 सितंबर 2025 तक बढ़ाने की भी मांग की गई है। अपर नगर आयुक्त (सदन सचिव) जंग बहादुर यादव व मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ संजीव सिन्हा (सह सचिव) को इन मांगों पर अमल करने का निर्देश दिया गया। धरना समाप्त करने की घोषणा के साथ ही पार्षदों ने कांवड़ महोत्सव की तैयारियों में सहयोग देने का संकल्प लिया। बैठक में पार्षद गौरव सोलंकी, नीरज गोयल, हिमांशु शर्मा, कुसुम मनोज गोयल, राजकुमार भाटी, पूनम सिंह, प्रतिभा शर्मा, रुखसाना सैफी, देवनारायण शर्मा, कन्हैया लाल, शशि पवन गौतम, संतोष राणा, सुधीर कुमार, नरेश भाटी, भूपेंद्र उपाध्याय सहित नगर के तमाम पार्षद उपस्थित रहे।

















