• ‘चुनावी सीजन में खौल रही थी शराब की साजिश’, लखनऊ से चली टीम ने किया बड़ा विस्फोट
• लोहे की पाइपों की आड़ में शराब, सिग्नल ऐप से माफिया की चाल – पर आबकारी विभाग की रणनीति निकली सबसे भारी
• जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह की अगुवाई में चली ‘ऑपरेशन फौलादी शिकंजा’ जैसी कार्रवाई ने तस्करी का पूरा नेटवर्क तोड़ डाला
उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आबकारी विभाग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो माफिया चाहे कितनी भी चालाकी से साजिश रचें, उनके मंसूबे ज़मीन पर आने से पहले ही बिखर जाते हैं। आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह के नेतृत्व में की गई एक साहसिक और सुनियोजित कार्रवाई ने शराब तस्करी के पूरे नेटवर्क की कमर तोड़ दी। बिहार चुनाव से पहले जिस तरह से शराब माफिया सक्रिय हो रहे थे, उसी तेज़ी से लखनऊ की आबकारी टीम भी ‘ऑपरेशन शिकंजा’ की तर्ज पर मैदान में उतर चुकी थी और इस बार उनका निशाना एक ऐसा ट्रक था, जो वैध लोहे की पाइपों के नीचे छिपाकर, अवैध शराब का एक पूरा तहखाना बिहार की ओर ले जा रहा था। शनिवार तड़के मुखबिर से मिली एक सटीक सूचना ने पूरे विभाग को हाई अलर्ट पर ला दिया। आबकारी निरीक्षक विवेक सिंह, उप निरीक्षक सुरेश पांडे, प्रभात शुक्ला और थाना गोसाईगंज की संयुक्त टीम ने तत्परता दिखाते हुए ट्रक को कबीरपुर के पास रोका और जब उसकी तलाशी ली गई तो होश उड़ गए। लोहे की भारी पाइपों के नीचे छिपाकर रखी गई थीं कुल 527 पेटी अंग्रेजी शराब, जिनमें 14,484 बोतलें मौजूद थीं। ये बोतलें हिमाचल प्रदेश में बनी थीं और चंडीगढ़ में बिक्री के लिए वैध थीं, लेकिन इन्हें बिहार भेजकर माफिया आराम से 1 करोड़ से अधिक की अवैध कमाई करने वाले थे।
इस पूरी कार्रवाई को लेकर जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह ने कहा कि हम केवल शराब की बोतलें नहीं पकड़ रहे, बल्कि उस सोच को कुचल रहे हैं जो बिहार जैसे शराबबंदी वाले राज्य को वोटों की बोतलों से भरने की तैयारी कर रही थी। यह कानून और सामाजिक चेतना, दोनों के लिए जीत है। तस्कर इस बार बेहद शातिर प्लान लेकर आए थे। ट्रक में फर्जी नंबर प्लेट और आरसी लगाई गई थी। वाहन असल में लखनऊ निवासी विनय कुमार मिश्रा के नाम पर था, लेकिन उसे एक रोहतास नामक व्यक्ति को किराए पर दिया गया था। ट्रक चला रहे ड्राइवर दिनेश परमार और क्लीनर जगदीश उज्जैन, मध्य प्रदेश के निवासी थे। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि उन्हें शराब की खेप को सुरक्षित बिहार पहुंचाने के बदले 50-50 हजार रुपये अतिरिक्त दिए जाने थे। लेकिन आबकारी विभाग की टीम ने इस बार हर परत को खोलकर रख दिया। शराब को इस कदर छिपाया गया था कि लोहे की 20 फुट लंबी पाइपों की एक-एक वेल्डिंग की गई थी, ताकि ऊपर से सिर्फ पाइपों का ढेर दिखाई दे।
इतना ही नहीं, ट्रक की बिलिंग भी दिल्ली के आरके इंटरप्राइजेज से असम की एक फर्जी फर्म के नाम की गई थी, ताकि कोई कानूनी कड़ी न जोड़ी जा सके। माफिया सिग्नल ऐप का इस्तेमाल कर रहे थे ताकि मोबाइल ट्रेसिंग से बच सकें, लेकिन कानून के लंबे हाथ आखिरकार उन तक पहुंच ही गए। इस कार्रवाई से न केवल एक बड़ी खेप पकड़ी गई, बल्कि उस पूरे नेटवर्क की पहचान की जा सकी जो राज्य दर राज्य फैलकर तस्करी को सुरक्षित बना रहे थे। लखनऊ की आबकारी टीम ने दिखा दिया है कि वे केवल चेकिंग की खानापूरी नहीं करते, बल्कि जमीनी खुफिया तंत्र, साइबर मॉनिटरिंग और ज़मीनी दांवपेंच के उस्ताद हैं। लखनऊ आबकारी विभाग अब माफिया के खिलाफ निर्णायक युद्ध की मुद्रा में है। टीम दिन-रात निगरानी, चेकिंग और सटीक कार्रवाई के दम पर यह भरोसा दिला रही है कि उत्तर प्रदेश में अब अवैध शराब की कोई खेप माफ नहीं होगी। करुणेन्द्र सिंह और उनकी टीम का यह ऑपरेशन आने वाले समय में पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण और केस स्टडी बनकर उभरेगा।
जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह ने बताया कि यह सिर्फ शराब की खेप पकडऩे की बात नहीं है, बल्कि समाज और कानून के प्रति हमारी जिम्मेदारी का निर्वहन है। हमारी टीम ने पूरी मुस्तैदी और रणनीति के साथ काम करते हुए शराब माफियाओं की एक बड़ी साजिश को नाकाम किया है। बिहार में चुनाव के दौरान जिस तरह अवैध शराब की मांग बढ़ती है, उसे देखते हुए हम पहले से ही सतर्क थे। मुखबिर की सूचना पर तत्काल एक्शन लेकर हमने न सिर्फ 30 लाख की शराब जब्त की, बल्कि इस गिरोह के काम करने के तरीके, नकली बिलिंग और फर्जी नंबर प्लेट जैसे कई पहलुओं को भी उजागर किया है। हमारा अभियान केवल एक कार्रवाई तक सीमित नहीं है। लखनऊ को शराब माफियाओं से मुक्त करना और उनके नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना हमारा लक्ष्य है। जब तक एक-एक तस्कर सलाखों के पीछे नहीं पहुंच जाता, हमारी टीम चैन से नहीं बैठेगी। यह कार्रवाई टीमवर्क, प्रतिबद्धता और कानून के प्रति निष्ठा का परिणाम है। मैं अपनी पूरी टीम को इस सफलता के लिए बधाई देता हूं और जनता को भरोसा दिलाता हूं कि लखनऊ में कानून से बड़ा कोई नहीं है।
1 करोड़ की संभावित कमाई को मिनटों में किया तबाह
चंडीगढ़ से लोड होकर ट्रक अंबाला, आगरा एक्सप्रेस-वे से लखनऊ आया और फिर बिहार रवाना होने वाला था।
लेकिन इस बार शराब नहीं, आबकारी टीम की बहादुरी पहुंची बिहार। 30 लाख की शराब जो तस्कर 1 करोड़ में बेचने वाले थे, वो अब सरकारी सील में है।
साजि़श गहरी थी, लेकिन निगाहें और मजबूत थीं
• ट्रक पर था फर्जी नंबर प्लेट, फर्जी आरसी, और फर्जी बिलिंग दिल्ली से असम की बनाई गई जालसाजी।
• ट्रक का मालिक निकला लखनऊ का विनय मिश्रा, जिसने इसे रोहतास नामक व्यक्ति को किराए पर दे रखा था।
• ड्राइवर और क्लीनर – दिनेश कुमार परमार और जगदीश, उज्जैन (मध्य प्रदेश) के रहने वाले।
• शराब हिमाचल की बनी, चंडीगढ़ में बिक्री हेतु वैध, लेकिन इसका टारगेट था – ‘ड्राई स्टेट’ बिहार, जहां इसे ले जाकर माफिया करोड़ों में कमाई करते।
• लोहे की पाइपों की नीचे छिपी शराब – ‘चलता-फिरता तहखाना’, जो किसी भी चेकिंग से बच सकता था अगर… आबकारी विभाग की आंखें न होतीं।
डीसीएम की बॉडी में बना रखा था गुप्त तहखाना
ट्रक की बॉडी में करीब 1.5 फुट की वेल्डिंग कर गुप्त चेंबर तैयार किया गया था। इस चेंबर के ऊपर 20-20 फीट लंबी 120 लोहे की पाइपें रखी गई थीं ताकि कोई शक न हो।
आबकारी विभाग की सतर्कता ने बिगाड़ा माफिया का खेल
जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह के नेतृत्व में लखनऊ की टीम ने यह दिखा दिया कि चाहे तस्करी की रणनीति कितनी भी हाई-टेक क्यों न हो, कानून के हाथ उससे तेज हैं। टीम दिन-रात चेकिंग और छापेमारी में जुटी है और प्रदेश में अवैध शराब के नेटवर्क को जड़ से उखाडऩे का अभियान निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। चुनाव के नाम पर शराब के धंधे को परवान चढ़ाने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा। हम तस्करी के हर चैनल को तोडऩे के लिए सतत और आक्रामक अभियान चला रहे हैं।

















