रंग लाई नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक की मेहनत, व्हाइट प्लाकार्ड का क्लेम आर्बिट्रेशन कोर्ट में खारिज, गाजियाबाद नगर निगम को 125 करोड़ की देनदारी से मिली राहत

नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक की दूरदर्शी सोच और कड़ी मेहनत गाजियाबाद नगर निगम के लिए लाभकारी साबित हो रहा है। विक्रमादित्य सिंह मलिक की मेहनत और कानूनी ज्ञान का परिणाम है कि नगर निगम को करोड़ों रुपए की बचत हो रही है। मैसर्स व्हाइट प्लाकार्ड के केस में नगर निगम को 125 करोड़ रुपए की देनदारी से मुक्ति मिल गई है। यह जीत गाजियाबाद नगर निगम के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। इस जीत से न सिर्फ करोड़ों रुपए की देनदारी से निगम को मुक्ति मिली है बल्कि अनावश्यक रूप से नगर निगम के खिलाफ मुकदमेबाजी करने वालों के लिए भी सबक है।

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक की दूरदर्शी सोच और कड़ी मेहनत गाजियाबाद नगर निगम के लिए लाभकारी साबित हो रहा है। विक्रमादित्य सिंह मलिक की मेहनत और कानूनी ज्ञान का परिणाम है कि नगर निगम को करोड़ों रुपए की बचत हो रही है। मैसर्स व्हाइट प्लाकार्ड के केस में नगर निगम को 125 करोड़ रुपए की देनदारी से मुक्ति मिल गई है। मैसर्स व्हाइट प्लाकार्ड ने गाजियाबाद नगर निगम के खिलाफ देनदारी को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। हाईकोर्ट ने मध्यस्थता के माध्यम से केस का निपटारा करने के लिए आर्बिट्रेशन कोर्ट में मामले को भेज दिया। विक्रमादित्य सिंह मलिक ने आर्बिट्रेशन कोर्ट में नगर निगम के पक्ष को मजबूती से रखा। नगर निगम की ठोस दलीलों और तथ्यों के आधार पर मैसर्स व्हाइट प्लाकार्ड के क्लेम को खारिज कर दिया गया।

यह जीत गाजियाबाद नगर निगम के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। इस जीत से न सिर्फ करोड़ों रुपए की देनदारी से निगम को मुक्ति मिली है बल्कि अनावश्यक रूप से नगर निगम के खिलाफ मुकदमेबाजी करने वालों के लिए भी सबक है। विदित हो कि नगर निगम और मैसर्स व्हाईट प्लाकार्ड कंपनी के बीच चल रहे मुकदमेबाजी में 3 वर्ष 20 दिन बाद नगर निगम के हक में फैसला आया है। विक्रमादित्य सिंह मलिक कानून के ज्ञाता है और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की नौकरी ज्वाइन करने से पूर्व सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते थे। वर्तमान केस में भी नगर आयुक्त ने पूरे केस की डॉक्यूमेंट फाइलिंग से लेकर ड्राफ्टिंग तक सभी पहलुओं पर बारीक नजर रखा। आर्बिट्रेशन कोर्ट में इस मामले की 41 बार सुनवाई हुई। 17 नवंबर 2024 को कोर्ट में फैसला सुनाया गया।

नगर आयुक्त ने बताया कि 28 नवंबर 2021 को मैसर्स व्हाइट प्लाकार्ड कंपनी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील याचिका दायर की गई। जिसमें फर्म द्वारा 23 अप्रैल 2022 को 72 करोड़ रुपए का नगर निगम पर दावा किया गया। इसके बाद नगर निगम द्वारा 30 अक्टूबर 2022 को काउंटर क्लेम 125 करोड़ रुपए का दाखिल किया गया। यह लगभग 2 वर्ष के बाद नगर निगम के विधि विभाग के अथक प्रयास से प्रभावी कार्रवाई की गई। जिसमें आर्बिट्रेशन कोर्ट में नगर निगम के हित में निर्णय सुनाया गया। आर्बिट्रेशन में क्लेम को रिजेक्ट कर दिया। नगर निगम के तत्कालीन प्रकाश प्रभारी आश कुमार ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में मामले में तीन सदस्य कमेटी गठित की गई थी। जिसमें तीन आर्बिट्रेटर नियुक्त किए गए। इनमें रिटायर्ड न्यायाधीश जनार्दन सहाय, राकेश तिवारी, संजय हरकोली थे। रिटायर्ड न्यायाधीश की कमेटी ने मैसर्स व्हाईट प्लाकार्ड कंपनी के केस में सुनवाई करते हुए यह निर्णय लिया गया। नगर आयुक्त ने इस मामले में तत्कालीन प्रकाश प्रभारी आश कुमार, विधि अधिक्षक विशाल गौरव समेत लीगल टीम को प्रोत्साहित भी किया।