– 239 करोड़ की योजना से औद्योगिक क्षेत्रों में पहुंचाया जाएगा पानी
– ग्रीन बांड जारी करके गाजियाबाद नगर निगम ने जुटाये हैं 150 करोड़ रुपये
– नगर निगम की योजना से रूकेगा भू-जल दोहन, बढ़ेगा शहर का भू-जल स्तर
उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। शहर के सौदर्यीकरण के साथ-साथ औद्योगिक विकास में योगदान को लेकर गाजियाबाद नगर निगम ने योजना के क्रियान्वयन की शुरूआत कर दी है। नगर निगम ऐसी योजना पर काम कर रहा है जो पर्यावरण को समर्पित होने के साथ-साथ गाजियाबाद में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगा। नगर निगम की इस योजना से ना सिर्फ उद्योगों का पलायन रूकेगा बल्कि लगातार गिरते भू-जल स्तर को रोकने में भी काफी मदद मिलेगी। सबकुछ योजनानुसार रहा तो अगले दो वर्षों में गाजियाबाद की औद्योगिक इकाइयों को पानी की कोई कमी नहीं रहेगी और नगर निगम भी आर्थिक रूप से मजबूत होगा। देश का पहला ग्रीन बांड जारी करने के बाद गाजियाबाद नगर निगम ऐसी योजना पर काम कर रहा है जिसमें सीवर के पानी को उपयोग के योग्य बनाकर औद्योगिक इकाइयों को पानी की आपूर्ति की जाएगी। नगर निगम द्वारा सीवेज वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का काम अगले महीने से शुरू हो जाएगा और 2022 के अंत तक इसे चालू कर दिया जाएगा। इस योजना पर लगभग 239 करोड़ रुपये खर्च होंगे और लगभग 1800 औद्योगिक इकाइयों को प्रथम चरण में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
गाजियाबाद को औद्योगिक नगरी के रूप में जाना जाता रहा है। लेकिन जल संकट, एनजीटी की सख्ती और लगातार गिरते भू-जल स्तर के कारण औद्योगिक इकाईयों का गाजियाबाद से लगातार पलायन हो रहा है। गाजियाबाद नगर निगम ने उद्यमियों के इस पलायन को रोकने के लिए जल आपूर्ति योजना पर काम कर रहा है। योजना के लिए ग्रीन बांड के जरिये मार्केट से 150 करोड़ रुपये जुटाये गये हैं। जबकि लगभग 90 करोड़ रुपये नगर निगम अपने संसाधनों से जुटाएगा। योजना को लेकर तैयार किये गये डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) की समीक्षा की जा रही है। पूर्व में जो डीपीआर तैयार की गई थी उसमें योजना को चालू करने की अवधि 30 महीने रखी गई थी। लेकिन म्युनिसिपल कमिश्नर महेंद्र सिंह तंवर इसे 18 महीने में चालू करने की तैयारियों में जुटे हैं। नगर निगम ने बांड जारी करके स्वाबलंबी बनने की दिशा में कदम उठाया है वहीं देश के अन्य नगर निगम को भी रास्ता दिखाया है कि किस तरह से वह योजना तैयार कर उसे पूरा कर सकते हैं। बांड जारी करने की राह आसान नहीं थी। पिछले दो वर्षों से इसको लेकर काम किया जा रहा था। लेकिन हर बार किसी ना किसी कारण से नगर निगम के बांड जारी करने के प्रस्ताव को सेबी द्वारा खारिज कर दिया जाता था। महेंद्र सिंह तंवर के नेतृत्व में नगर निगम की टीम ने इस बार प्रभावशाली ढंग से बांड जारी करने को लेकर काम किया और ग्रीन बांड की मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग हुई। बांड 10 वर्षों के लिए जारी किया गया है और इस पर नगर निगम लगभग 8 फीसद सालाना की दर से ब्याज देगा। ग्रीन बांड के लिए नगर निगम को केंद्र सरकार से साढ़े 19 करोड़ रुपये की सब्सिडी भी मिलेगी। बांड के जरिये जुटाये गये धन से सीवरेज के पानी को ट्रीट कर उसका उपयोग औद्योगिक इकाईयों में किया जाएगा। नगर निगम की योजना है कि मई तक इस योजना पर काम शुरू कर दिया जाए और 2022 के दिसंबर तक साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र की 1764 इकाईयों को पाइप लाइन के जरिये पानी उपलब्ध कराया जाये। सीवर के पानी का उपयोग नगर निगम के पार्क और ग्रीन बेल्ट में भी किया जाएगा। औद्योगिक इकाईयों को पानी उपलब्ध कराने को लेकर साहिबाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और नगर निगम के बीच एक करार भी हुआ है। नगर निगम की यह एक एको फ्रेंडली व्यवसायिक योजना है। नगर निगम के बांड में निवेश करने वाले निवेशकों को इसी योजना से कमाई करके ब्याज सहित रकम लौटाई जाएगी। योजना को लेकर लगभग 90 करोड़ रुपए नगर निगम अपने संसाधनों से व्यय करेगा।
म्युनिसिपल कमिश्नर ने बताया कि बांड द्वारा जुटाई गई धनराशि से नगर निगम द्वारा इंदिरापुरम में 56 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी ) के पास ही 40 एमएलडी का टर्सियरी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (टीएसटीपी) लगाया जाएगा। यहां पर ट्रीट किए गए पानी में सीओडी की मात्रा पांच से कम होगी और यह पानी औद्योगिक इकाइयों में इस्तेमाल करने के लायक होगा। इंदिरापुरम में एक यूजीआर बनाया जाएगा और यहां से पाइपलाइन के जरिये साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट-4 में पानी की आपूर्मि होगी। इससे भू-जल दोहन रूकेगा और अंडर ग्राउंड वाटर लेवल बेहतर होगा। महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि योजना की हर पहलुओं पर बारीक स्टडी की जा रही है जिससे कि लागत को कम किया जा सके और इसे कम से कम समय में क्रियानवित किया जाये। 18 महीने में इसे चालू करने का लक्ष्य ध्यान में रखकर काम किया जाएगा। इसके लिए अगले महीने टेंडर प्रक्रिया की जाएगी।
















