बारिश से पहले नगर निगम का ‘ऑपरेशन जलनिकासी’, जलभराव पर जीरो टॉलरेंस का ऐलान

-नगर आयुक्त ने तीन विभागों को एक मंच पर लाकर बनाई रणनीति, 55 जलभराव वाले हॉटस्पॉट पर होगी विशेष निगरानी
-नालों की सफाई से लेकर सीवर और नए ड्रेनेज कनेक्शन तक हर काम की होगी मॉनिटरिंग, पांच दिन में मांगी प्रगति रिपोर्ट
-लालकुआं, यूपी गेट, विजयनगर, इंदिरापुरम समेत प्रमुख क्षेत्रों में स्थायी समाधान की दिशा में तेज होगी कार्रवाई

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। मानसून की दस्तक से पहले शहर को जलभराव की समस्या से मुक्त रखने के लिए नगर निगम ने व्यापक कार्ययोजना पर अमल तेज कर दिया है। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बुधवार को जलकल, स्वास्थ्य एवं निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर शहर के सभी प्रमुख जलभराव वाले क्षेत्रों की तैयारियों का विस्तृत आकलन किया। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि इस वर्ष बारिश के दौरान किसी भी क्षेत्र में जलभराव की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। इसके लिए तीनों विभाग आपसी समन्वय के साथ युद्धस्तर पर कार्य करें और सभी लंबित कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करें। नगर आयुक्त ने कहा कि बरसात के मौसम में नागरिकों को जलभराव, गंदगी और यातायात बाधित होने जैसी समस्याओं से राहत दिलाना नगर निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए पहले से चिन्हित सभी संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाएगी तथा प्रत्येक विभाग की जिम्मेदारी तय कर जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाएगी। बैठक में नगर आयुक्त ने स्वास्थ्य विभाग से अब तक साफ किए गए सभी नालों की विस्तृत सूची मांगी और निर्देश दिए कि इन नालों की नियमित मॉनिटरिंग जलकल एवं निर्माण विभाग संयुक्त रूप से करेंगे।

उन्होंने कहा कि केवल नालों की सफाई कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उनमें कहीं दोबारा सिल्ट जमा न हो तथा जल निकासी निर्बाध रूप से होती रहे। जहां नए नालों का निर्माण किया गया है, वहां उनके कनेक्टिंग प्वाइंट तत्काल जोड़े जाएं ताकि बरसात के दौरान पानी का प्रवाह बाधित न हो। नगर आयुक्त ने अपर नगर आयुक्त एवं वरिष्ठ प्रभारी स्वास्थ्य अवनींद्र कुमार को निर्देश दिए कि तीनों विभागों के कार्यों की नियमित समीक्षा करें तथा जिन स्थानों पर कार्य शेष है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग, जलकल विभाग और निर्माण विभाग एक संयुक्त टीम के रूप में कार्य करें ताकि किसी भी स्तर पर समन्वय की कमी न रहे। बैठक में मुख्य अभियंता निर्माण नरेंद्र कुमार चौधरी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार तथा महाप्रबंधक जलकल कामाख्या प्रसाद आनंद सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति से नगर आयुक्त को अवगत कराया।

इस दौरान जलकल विभाग को निर्देश दिए गए कि बरसात शुरू होने से पहले सभी सीवर लाइनें, मैनहोल एवं जल निकासी तंत्र की व्यापक सफाई अभियान चलाकर पूरी की जाए। आवश्यक मशीनरी एवं उपकरणों को भी पूरी तरह तैयार रखा जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। नगर आयुक्त ने निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि जहां भी निर्माण कार्य चल रहे हैं, वहां सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन किया जाए। सभी निर्माण स्थलों पर मजबूत बैरिकेडिंग कराई जाए ताकि आमजन को किसी प्रकार की दुर्घटना का सामना न करना पड़े। साथ ही जिन नालों में अवरोध या बंद बने हुए हैं, उन्हें तत्काल हटाकर जल निकासी सुचारु बनाई जाए। बैठक में शहर के उन 55 स्थलों पर विशेष चर्चा की गई जहां प्रत्येक वर्ष बरसात के दौरान जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न होती है।

इनमें लालकुआं, साहिबाबाद, राजेंद्र नगर, प्रताप विहार, यूपी गेट, साईं अंडरपास, विजयनगर अंडरपास, अर्थला अंडरपास, भोपुरा चौक, शादीक की पुलिया सहित कई प्रमुख स्थान शामिल हैं। नगर आयुक्त ने प्रत्येक स्थान की कार्ययोजना की अलग-अलग समीक्षा करते हुए अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली और पांच दिनों के भीतर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसके अलावा इंदिरापुरम के मकनपुर क्षेत्र तथा स्वर्ण जयंतीपुरम के सामने जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए भी विशेष कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया। नगर आयुक्त ने सभी जोनल प्रभारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जल निकासी बिंदुओं की नियमित मॉनिटरिंग करें और किसी भी समस्या की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें।

नगर आयुक्त ने कहा कि इस बार नगर निगम का लक्ष्य केवल अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि जलभराव की समस्या का स्थायी निस्तारण करना है। इसके लिए तीनों विभागों को पूरी जवाबदेही के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बरसात के दौरान किसी भी क्षेत्र में लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। नगर निगम की यह समन्वित कार्ययोजना शहरवासियों को मानसून के दौरान राहत देने के साथ-साथ सुरक्षित, स्वच्छ और सुचारु शहरी व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।