नगर निगम की योजना बनी अंतरराष्ट्रीय पहचान, पेरिस में सम्मानित ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड

• सीएम योगी को नगर आयुक्त ने भेंट किया ग्लोबल वाटर अवॉर्ड
• भूगर्भ जल संरक्षण व शोधित जल आपूर्ति के प्रयासों को मिला अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराहना
• साहिबाबाद में 1500 इकाइयों को होगा लाभ, ग्लोबल मंच पर चमका गाजियाबाद
• ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड से गाजियाबाद नगर निगम ने रचा इतिहास, जल संरक्षण की दिशा में बना राष्ट्रीय मॉडल

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने एक बार फिर अपने नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों से न केवल देश, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गाजियाबाद नगर निगम की विशिष्ट पहचान बना दी है। पेरिस में आयोजित एक वैश्विक समारोह में नगर निगम को ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड के तहत जल संरक्षण और शोधित जल के उपयोग की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए ग्लोबल वाटर अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस अवॉर्ड को लेकर शनिवार को नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और उन्हें यह पुरस्कार भेंट किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नगर आयुक्त के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गाजियाबाद नगर निगम द्वारा शुरू किया गया ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड प्रोजेक्ट पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक मिसाल है।

उन्होंने कहा कि शोधित जल के उपयोग और भूगर्भ जल के संरक्षण की यह रणनीति अन्य नगर निकायों को भी प्रेरित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र में शोधित जल की आपूर्ति से न केवल भूजल दोहन रुका है, बल्कि उद्योगों को भी स्थायी और सुलभ जल स्रोत उपलब्ध हुआ है। इस परियोजना के तहत इंदिरापुरम में 40 एमएलडी क्षमता वाला टर्शियरी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया गया है, जिसकी कुल लागत करीब 319 करोड़ रुपये है। इस प्लांट से शोधित जल को साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों तक पहुंचाया जा रहा है। अब तक करीब 900 औद्योगिक इकाइयों को शोधित जल की आपूर्ति के लिए कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जबकि शेष 600 इकाइयों को जोडऩे की प्रक्रिया जारी है। इससे पहले इन इकाइयों में भूगर्भ जल का दोहन किया जा रहा था, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा था। अब इस परियोजना से गाजियाबाद जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा चुका है।

नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने मुख्यमंत्री को बताया कि ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड प्रोजेक्ट न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी पहल है, बल्कि यह शहर के औद्योगिक विकास को भी गति देगा। उन्होंने बताया कि गाजियाबाद देश का पहला ऐसा नगर निगम बन चुका है, जिसने ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए जल संरक्षण की दिशा में इतनी व्यापक और प्रभावी कार्ययोजना तैयार की है। ग्लोबल वाटर अवार्ड मिलने से नगर निगम का मनोबल और उत्साह दोनों बढ़ा है। पेरिस में आयोजित कार्यक्रम में नगर निगम को सम्मानित किए जाने पर देश-विदेश में इसकी सराहना हो रही है।

इस परियोजना को कार्यान्वित करने वाली वीए टेक वबाग लिमिटेड ने भी गाजियाबाद मॉडल की प्रशंसा की है। जल संरक्षण की दिशा में गाजियाबाद नगर निगम के प्रयास अब एक राष्ट्रीय मॉडल का रूप ले चुके हैं। ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड परियोजना न केवल पर्यावरण हितैषी है, बल्कि यह आर्थिक दृष्टि से भी उद्योगों और नगर निगम दोनों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। गाजियाबाद ने यह साबित कर दिया है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति और नवाचार साथ मिलते हैं, तो किसी भी शहर को वैश्विक मंच पर गौरव दिलाया जा सकता है।

शहरी विकास की नई लकीर खींच रहा गाजियाबाद
महापौर सुनीता दयाल ने भी इस उपलब्धि पर हर्ष जताते हुए कहा कि यह पुरस्कार गाजियाबाद के नागरिकों और नगर निगम दोनों के लिए गर्व की बात है। हम आगे भी शोधित जल के उपयोग को बढ़ावा देंगे और नागरिकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करेंगे। उन्होंने कहा कि यह मॉडल मोहननगर और राजेन्द्र नगर औद्योगिक क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक औद्योगिक इकाइयों को शोधित जल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

इंदिरापुरम टीएसटीपी से बह रहा विकास का जल
• 40 एमएलडी क्षमता का टर्शियरी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (टीएसटीपी ) बनकर पूरी तरह तैयार।
• 319 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना में विदेशी तकनीकों और उपकरणों का उपयोग किया गया।
• साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र की 1500 से अधिक इकाइयों को शोधित जल आपूर्ति की योजना।
• अब तक 900 इकाइयों को कनेक्शन, शेष 600 इकाइयों को जोडऩे की कार्रवाई तेज।

अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में अब मॉडल शुरु करने की तैयारी
• मोहननगर, राजेंद्र नगर जैसे अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसी मॉडल पर काम शुरू।
• जलकल विभाग द्वारा नए पाइपलाइन नेटवर्क और जल आपूर्ति संयंत्रों की तैयारी।

ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड
• भारत का पहला नगरपालिका बॉन्ड जिसने जल प्रबंधन में अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा किया।
• इसके जरिए जुटाई गई धनराशि सीधे भूजल संरक्षण और पुनर्चक्रण परियोजनाओं में लगी।
• यह परियोजना भारत के स्मार्ट सिटीज मिशन और जल जीवन मिशन को मजबूती दे रही है।