शिवालिक अपार्टमेंट, कौशांबी में कचरा प्रबंधन की नयी पहल

-एस.ओ.आर.टी. योजना के तहत इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन ने लगाए तीन आधुनिक एरोबिन

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शहर को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में भारतीय प्रदूषण नियंत्रण संघ (आईपीसीए) ने एक और सराहनीय कदम उठाया है। स्वर्णलता मथरसन ट्रस्ट के सहयोग से चलाई जा रही प्रमुख योजना एस.ओ.आर.टी. (कचरे का पृथक्करण, पुन: प्रयोग और उपचार) के अंतर्गत कौशांबी स्थित शिवालिक अपार्टमेंट में तीन आधुनिक एरोबिन स्थापित किए गए। इस व्यवस्था का शुभारंभ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व डॉ. मनोज़ गोयल ने किया। इन एरोबिन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह सोसाइटी में उत्पन्न होने वाले गीले कचरे का निस्तारण उसी स्थान पर कर देते हैं और उसे उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद में बदल देते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह से गंध-रहित, रसायन-रहित, बिजली-रहित और शून्य गैस उत्सर्जन वाली है। इससे न केवल पर्यावरण को लाभ होगा बल्कि शहर के कूड़ा भराव स्थलों पर भी दबाव कम होगा।

इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी। अब तक इसके छह चरण पूरे हो चुके हैं और दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मुंबई, पुणे और बेंगलुरु के पाँच सौ से अधिक स्थानों पर इसका सफल क्रियान्वयन किया जा चुका है। कौशांबी में इसका विस्तार स्थानीय निवासियों और प्रबंधन समिति के सहयोग से संभव हुआ है।
कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए मनीषा और उनकी टीम ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इस नाटक के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि कचरे को अलग-अलग करके कूड़ेदानों में डालना क्यों आवश्यक है और कैसे इस छोटे से प्रयास से पर्यावरण की बड़ी समस्याओं का समाधान हो सकता है। इस अवसर पर भारतीय प्रदूषण नियंत्रण संघ की ओर से साहिब गम्भीर (परियोजना संयोजक) और मुकेश कुमार (वरिष्ठ क्षेत्रीय कार्यकारी) मौजूद रहे।

वहीं, स्थानीय स्तर पर शिवालिक टावर की अध्यक्ष लता सिंगल, उपाध्यक्ष ललित गुप्ता, सचिव शिवराम, गीता महेश्वरी, राजेश मल्होत्रा, अर्चना शर्मा, दीपक गुलाटी, अंजू झा, एन.के. खुराना, सौरभ आनंद मलकानी, गुरुनामी, कैलाश टावर से केवल सेठी और संजय माहेश्वरी समेत अनेक निवासी कार्यक्रम में शामिल हुए। कौशांबी के शिवालिक अपार्टमेंट में यह पहल भविष्य में अन्य आवासीय क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायी बनेगी। यह उदाहरण साबित करता है कि यदि समाज, संस्थान और स्थानीय लोग मिलकर कार्य करें तो स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।