-लखनऊ अग्निकांड के बाद गाजियाबाद में सख्ती, 206 भवनों में मिलीं खामियां, 62 पर तत्काल सीलिंग कार्रवाई
-कोचिंग सेंटर, होटल, अस्पताल, बैंक्वेट हॉल और बहुमंजिला इमारतें जांच के दायरे में, फायर एनओसी नहीं मिलने पर कार्रवाई
-उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल के निर्देश पर विशेष अभियान तेज, जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए जीडीए ने जारी की चेतावनी
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड के बाद गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) पूरी तरह सतर्क हो गया है। जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्राधिकरण ने जिलेभर में अग्नि सुरक्षा मानकों की व्यापक जांच शुरू कर दी है। अभियान के तहत अब तक 206 भवनों और संस्थानों का निरीक्षण किया गया, जिनमें गंभीर अग्नि सुरक्षा खामियां मिलने पर 62 संस्थानों, कोचिंग सेंटरों और बहुमंजिला भवनों के विरुद्ध सीलिंग की कार्रवाई की गई। जीडीए का कहना है कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल के निर्देश पर शुरू किए गए इस विशेष अभियान के तहत प्राधिकरण की प्रवर्तन टीमों ने जिले के सभी आठ जोन क्षेत्रों में समूह आवासीय सोसायटियों, होटलों, बैंक्वेट हॉल, रेस्टोरेंट, कोचिंग सेंटरों, अस्पतालों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य बहुमंजिला भवनों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाण-पत्र (फायर एनओसी), फायर अलार्म सिस्टम, हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर, आपातकालीन निकास मार्ग सहित अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की गहन जांच की गई।
जीडीए के अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि निरीक्षण के दौरान लगभग 206 ऐसे प्रकरण चिन्हित किए गए, जहां अग्नि सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन नहीं किया जा रहा था या आवश्यक फायर एनओसी उपलब्ध नहीं थी। इनमें से 62 संस्थानों के खिलाफ तत्काल सीलिंग की कार्रवाई की गई, जबकि शेष मामलों में नियमानुसार कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को सूचना भेजी गई है और आगे की प्रक्रिया लगातार जारी है। प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान इंदिरापुरम, लाजपत नगर बी-ब्लॉक स्थित सागर कोचिंग सेंटर, श्याम एन्क्लेव के मकान संख्या-10 और 11, राजेंद्र नगर स्थित नोवेल एजुकेशन एकेडमी तथा आरडीसी क्षेत्र के आईएमएस कोचिंग इंस्टीट्यूट सहित कई अन्य संस्थानों को सील किया गया। जीडीए अधिकारियों का कहना है कि जिन संस्थानों में अग्नि सुरक्षा संबंधी गंभीर कमियां पाई गईं, वहां बिना किसी ढिलाई के विधिक कार्रवाई की गई।
अभियान के साथ-साथ जीडीए ने जिले की सभी समूह आवासीय सोसायटियों, जहां आरडब्ल्यूए अथवा एओए का गठन हो चुका है, उनके पदाधिकारियों को भी पत्र जारी किए हैं। पत्र के माध्यम से निर्देश दिए गए हैं कि परिसर में स्थापित फायर अलार्म, हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर सिस्टम, अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन निकास मार्गों को हर समय क्रियाशील एवं अवरोधमुक्त रखा जाए। साथ ही समय-समय पर उनकी जांच और रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाए।अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि जनसुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए जीडीए द्वारा अग्निशमन विभाग की क्षमता बढ़ाने हेतु लगभग 100 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। इस राशि से आधुनिक फायर फाइटिंग उपकरण, अत्याधुनिक अग्निशमन वाहन, विशेषीकृत मशीनें और अन्य आवश्यक संसाधनों की खरीद की जा रही है, ताकि बहुमंजिला इमारतों और बड़े परिसरों में आग लगने की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने बताया कि जीडीए की विशेष प्रवर्तन टीमें सभी आठ जोनों में लगातार निरीक्षण, सत्यापन और निगरानी का कार्य कर रही हैं। आगामी दिनों में अभियान को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा तथा जिन संस्थानों या भवन स्वामियों द्वारा अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाएगी, उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 के तहत कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी। जीडीए ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे फायर ड्राइव-वे और आपातकालीन निकास मार्गों को कभी अवरुद्ध न होने दें। सभी भवनों में अग्निशमन उपकरण, फायर अलार्म और हाइड्रेंट सिस्टम की नियमित जांच कराते रहें तथा फायर एनओसी का समय-समय पर नवीनीकरण कराएं।
स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किसी भी प्रकार के अतिक्रमण या अवैध निर्माण से बचें और प्रत्येक परिसर में प्रशिक्षित फायर सेफ्टी स्टाफ के साथ प्रभावी आपदा प्रबंधन व्यवस्था विकसित करें। समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित कर कर्मचारियों और निवासियों को भी आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाए। जीडीए का कहना है कि सुरक्षित, व्यवस्थित और आपदा-प्रतिरोधी शहरी वातावरण का निर्माण उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि अग्नि सुरक्षा केवल औपचारिक नियम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन की सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
















