- डिजिटल निगरानी से बच नहीं सकेंगे प्रदूषण फैलाने वाले वाहन: अमित तिवारी
- एक अक्टूबर से जिले के हर पेट्रोल पंप पर एनपीआर कैमरों की नजर, बीएस-4 से नीचे के वाहनों पर तत्काल कार्रवाई
- नंबर प्लेट स्कैन होते ही सामने आएगा वाहन का पूरा रिकॉर्ड, नियम तोडऩे पर ई-चालान और ईंधन पर रोक
- जिला आपूर्ति अधिकारी की सख्ती, पेट्रोल पंप संचालकों को दो माह में पूरी तकनीकी व्यवस्था तैयार करने के निर्देश
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। वायु प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों पर अब गाजियाबाद में शिकंजा और कसने जा रहा है। जिला आपूर्ति अधिकारी अमित तिवारी ने जिले के सभी पेट्रोल पंपों को नंबर प्लेट रिकग्निशन (एनपीआर) कैमरों से लैस करने की तैयारी तेज कर दी है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पेट्रोल पंप पर ईंधन लेने पहुंचने वाले प्रत्येक वाहन की नंबर प्लेट कैमरे की नजर से गुजरेगी। वाहन की पहचान होते ही उसका रिकॉर्ड डिजिटल सिस्टम से जांचा जाएगा और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। आपूर्ति विभाग ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों को एक अक्टूबर तक एनपीआर कैमरे और उससे जुड़ी तकनीकी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं। जिला आपूर्ति अधिकारी अमित तिवारी ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा के बाद जिले के पेट्रोल पंपों पर यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
इसके बाद वाहनों की निगरानी मैनुअल जांच के बजाय डिजिटल माध्यम से होगी। एनपीआर कैमरा पेट्रोल पंप पर पहुंचने वाले वाहन की नंबर प्लेट को स्वत: स्कैन करेगा। इसके बाद नंबर प्लेट से प्राप्त जानकारी संबंधित डिजिटल डाटाबेस और सर्वर से मिलाई जाएगी। वाहन का पंजीकरण, प्रदूषण मानक और अन्य आवश्यक जानकारी सिस्टम के माध्यम से जांची जाएगी। यदि वाहन बीएस-4 से नीचे की श्रेणी में आता है अथवा उस पर कोई प्रतिबंध लागू है तो सिस्टम तत्काल इसकी जानकारी उपलब्ध कराएगा। व्यवस्था के तहत ऐसे वाहनों के खिलाफ ई-चालान की कार्रवाई की जा सकेगी। साथ ही संबंधित वाहन को पेट्रोल या डीजल की आपूर्ति रोकने की व्यवस्था भी लागू की जाएगी। इससे नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर मौके पर ही शिकंजा कसने में मदद मिलेगी।
जिला आपूर्ति अधिकारी की सख्ती से पेट्रोल पंप संचालकों में हलचल
जिला आपूर्ति अधिकारी अमित तिवारी ने पेट्रोल पंप संचालकों को साफ निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कैमरे लगाने के साथ उनसे जुड़ी तकनीकी व्यवस्थाएं भी पूरी कर ली जाएं। उनका जोर ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर है, जिससे किसी वाहन की जांच में मानवीय हस्तक्षेप कम से कम हो और कार्रवाई पारदर्शी तरीके से ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से हो सके। विभाग के अधिकारियों के अनुसार एनपीआर व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक वाहन की डिजिटल निगरानी संभव होगी। इससे पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान आसान होगी तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी।
प्रदूषण नियंत्रण अभियान को मिलेगी नई धार
अमित तिवारी के मुताबिक एनपीआर कैमरों की व्यवस्था लागू होने से वायु प्रदूषण नियंत्रण अभियान को मजबूती मिलेगी। पुराने और मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले वाहनों पर निगरानी बढऩे से वाहन स्वामियों में भी प्रदूषण मानकों का पालन करने को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। नई व्यवस्था में पेट्रोल पंप पर वाहन पहुंचने से लेकर नंबर प्लेट स्कैन होने, रिकॉर्ड के मिलान और कार्रवाई तक की प्रक्रिया कंप्यूटर आधारित होगी। इससे मैनुअल जांच पर निर्भरता कम होगी और नियम तोडऩे वाले वाहनों पर कार्रवाई का पूरा सिस्टम अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाया जा सकेगा। अमित तिवारी की सख्ती का साफ संदेश है कि प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को अब ईंधन की आड़ में राहत नहीं मिलेगी।

जिला पूर्ति अधिकारी
जिले में प्रदूषण फैलाने वाले और निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले वाहनों के खिलाफ किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी। एनपीआर कैमरों की व्यवस्था लागू होने के बाद पेट्रोल पंपों पर आने वाले वाहनों की डिजिटल निगरानी सुनिश्चित होगी। हमारा उद्देश्य केवल चालान करना नहीं, बल्कि प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों के संचालन पर प्रभावी रोक लगाना है। पेट्रोल पंप संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कैमरे और तकनीकी व्यवस्था हर हाल में पूरी कर लें। व्यवस्था लागू होने के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन सिस्टम की नजर से बच नहीं सकेंगे। जांच और कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी तरीके से होगी। किसी भी वाहन या पेट्रोल पंप संचालक की लापरवाही सामने आने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वायु प्रदूषण से जनस्वास्थ्य को होने वाले नुकसान को देखते हुए इस अभियान में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
-अमित तिवारी, जिला आपूर्ति अधिकारी















