- डीएम रविन्द्र कुमार मांदड़ की पहल से कुपोषण के खिलाफ अभियान को मिली रफ्तार, बच्चों के स्वास्थ्य की होगी नियमित निगरानी
- हर 15 दिन में बच्चों का वजन और लंबाई नापकर दर्ज होगी प्रगति, छह महीने तक हर माह दी जाएगी पोषण पोटली
- शहद, दलिया, मशरूम सूप से लेकर आंवला-गुड़ के लड्डू तक शामिल, सीएसआर के सहयोग से तैयार हुई पोषण व्यवस्था
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। कुपोषण से जूझ रहे बच्चों को स्वस्थ और सुपोषित बनाने की दिशा में गाजियाबाद जिला प्रशासन ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ की पहल के तहत महात्मा गांधी सभागार, कलेक्ट्रेट में 111 कुपोषित एवं कमजोर बच्चों को पोषण पोटली वितरित की गई। रामपुर कृषक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की ओर से वितरित की गई इन पोषण पोटलियों में बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए विभिन्न पौष्टिक खाद्य सामग्री शामिल की गई है। अभियान की शुरुआत करीब तीन माह पूर्व जिलाधिकारी की पहल पर की गई थी। पोषण पोटली में मीठा आहार, कुकीज और बिस्कुट, जैविक शहद, दलिया, मशरूम कॉर्न सूप, आंवला-गुड़ के लड्डू तथा आंवला-त्रिफला-जीरा जूस जैसी पोषक सामग्री शामिल है। प्रशासन का उद्देश्य सामान्य भोजन के साथ अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराकर उन बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाना है, जिनका वजन और लंबाई उनकी उम्र के अनुरूप नहीं है।
जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ ने बच्चों के अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों का स्वस्थ और सुपोषित होना मानव संसाधन के समग्र विकास की पहली जरूरत है। बचपन में मिलने वाला संतुलित और पौष्टिक आहार बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि कुपोषण मुक्त बचपन ही समृद्ध और स्वस्थ भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप जनपद में प्रत्येक बच्चे को सुपोषित बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कुपोषण केवल बच्चे के वर्तमान स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसका असर उसके शारीरिक विकास, सीखने की क्षमता और भविष्य पर भी पड़ सकता है। ऐसे में कमजोर और कुपोषित बच्चों को अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
छह माह तक हर महीने मिलेगी पोषण पोटली
जिलाधिकारी ने बताया कि इस अभियान के तहत प्रत्येक लाभार्थी बच्चे को लगातार छह माह तक हर महीने पोषण पोटली उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य केवल खाद्य सामग्री बांटना नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य में वास्तविक सुधार सुनिश्चित करना है। इसी कारण लाभार्थी बच्चों की नियमित निगरानी की व्यवस्था भी की गई है। आहार से उपचार फाउंडेशन, बाल विकास परियोजना अधिकारियों और मुख्य सेविकाओं के सहयोग से बच्चों की नियमित निगरानी की जाएगी। प्रत्येक 15 दिन में बच्चों के वजन और लंबाई का आकलन किया जाएगा और उनकी प्रगति का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि बच्चों के स्वास्थ्य में किस स्तर तक सुधार हो रहा है और जरूरत पडऩे पर उनके लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा सकें।
सीएसआर के सहयोग से पोषण अभियान को मजबूती
जिलाधिकारी ने बताया कि पोषण पोटलियों की व्यवस्था कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी सीएसआर के अंतर्गत आहार से उपचार फाउंडेशन के सहयोग से की गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन, विभागीय अधिकारियों और सामाजिक संस्थाओं के सामूहिक प्रयास से कुपोषण के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जनपद के सभी कुपोषित एवं कमजोर बच्चों को सुपोषित बनाने के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। निर्धारित मानकों के अनुसार पोषण पोटली का नियमित उपयोग करने से बच्चों के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों को पोषण पोटली में उपलब्ध सामग्री निर्धारित तरीके से दें और बच्चों के खान-पान पर विशेष ध्यान रखें।
आंगनवाड़ी केंद्रों से होगी लगातार निगरानी
जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर लगातार नजर रखना जरूरी है। आंगनवाड़ी विभाग के माध्यम से अभियान की सतत निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। बच्चों के वजन और लंबाई की नियमित जांच के साथ उनकी पोषण स्थिति में होने वाले बदलाव को भी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे को कुपोषण की स्थिति में नहीं रहने दिया जाएगा। स्वस्थ बचपन ही मजबूत समाज और समृद्ध भविष्य की नींव है। प्रशासन का प्रयास है कि पोषण अभियान का लाभ जरूरतमंद बच्चों तक लगातार पहुंचे और उनकी सेहत में स्थायी सुधार हो।
कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ, उपायुक्त उद्योग आशुतोष सिंह, आहार से उपचार फाउंडेशन के प्रबंध निदेशक अमित कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी विनीता चंद्रा सहित सभी बाल विकास परियोजना अधिकारी और मुख्य सेविकाएं मौजूद रहीं।















