-कथा व्यास आचार्य स्वयंवर सेमवाल जी ने भावविभोर कर देने वाला किया प्रवचन
-कथा जीवन का आईना है, जो समाज को आध्यात्मिक दिशा देती है: पं. राजकुमार तिवारी
उदय भूमि संवाददाता
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को कथा व्यास आचार्य स्वयंवर सेमवाल जी ने भगवान श्रीहरि विष्णु के 24 दिव्य अवतारों का दिव्य वर्णन करते हुए श्रोताओं को अध्यात्म के गहरे सागर में डुबकी लगवाई। दोपहर 2 बजे से शुरू होकर शाम 5 बजे तक कथा चली और श्रोताओं ने एक क्षण को भी आँखें नहीं झपकाईं। कथा के समापन के उपरांत सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया, जिससे आयोजन का पूर्ण अध्यात्मिक संतुलन बना रहा। आचार्य स्वयंवर सेमवाल जी ने अपने व्याख्यान में बताया कि भगवान ने जब-जब पृथ्वी पर अधर्म का विस्तार देखा, तब-तब उन्होंने कोई न कोई रूप धारण कर धर्म की स्थापना की। मच्छ, कूर्म, वाराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण से लेकर कल्कि तक हर अवतार के पीछे एक गहन सामाजिक और आध्यात्मिक उद्देश्य छिपा हुआ है। उन्होंने कहा कि अवतारों की कथा हमें यह सिखाती है कि सच्चाई, करुणा और कर्तव्य से विचलित नहीं होना चाहिए।
कथा स्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु, यजमानगण और समाजसेवी उपस्थित रहे। माहौल भक्ति से सराबोर था और श्रोताओं की आँखों में भक्ति रस के आंसू झलकते देखे गए। इस दिव्य आयोजन में मुख्य यजमान के रूप में केदार सभा के अध्यक्ष पं. राजकुमार तिवारी, उपाध्यक्ष विष्णु कान्त कुर्मांचली, महामंत्री राजेंद्र प्रसाद तिवारी, मंत्री अंकित सेमवाल, तथा बद्री-केदार मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी श्री विजय थपलियाल व अन्य गणमान्य सदस्य विनीत पोस्ती, तेज प्रकाश त्रिवेदी, कोषाध्यक्ष पं. प्रवीण चंद्र तिवारी व मंदिर के मुख्य पुजारी बागेश लिंग जी विशेष रूप से उपस्थित रहे। पं. राजकुमार तिवारी ने कहा कि कथा ही जीवन का आईना है। यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, समाजिक चेतना का भी माध्यम है।
उन्होंने इस अवसर पर कहा कि भगवत कथा मात्र कथा नहीं, यह एक आध्यात्मिक क्रांति है। इससे मन को शांति, समाज को दिशा और जीवन को लक्ष्य मिलता है। भगवान के 24 अवतारों का यह पावन वर्णन हमें यह सिखाता है कि सत्य और धर्म की रक्षा हेतु सदा सजग रहना चाहिए। हम सब सौभाग्यशाली हैं कि इस आयोजन का हिस्सा बन सके। उन्होंने आभार व्यक्त किया कि सभी श्रद्धालु और पदाधिकारीगण निरंतर सेवा, सहयोग और श्रद्धा भाव से जुड़े हुए हैं, जिससे यह आयोजन सफलता की ओर अग्रसर हो रहा है। कथा का दूसरा दिवस आध्यात्मिक ऊर्जा, समर्पण और सद्भावना का अनुपम संगम बनकर श्रोताओं के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया। आने वाले दिनों में कथा में श्रीकृष्ण जन्म, रासलीला और उद्धव गोपी संवाद जैसे प्रसंगों की झलकियों के लिए उत्साह चरम पर है।


















