40 करोड़ की नगर निगम भूमि पर कब्जे की साजिश नाकाम, दीवार तोड़कर बनाए रास्तों पर चला प्रशासन का बुलडोजर

-महापौर सुनीता दयाल ने मौके पर पहुंचकर संभाली कमान, पुलिस बुलाकर कराया निरीक्षण; एफआईआर के दिए निर्देश
-नगर निगम की बाउंड्री तोड़कर खोले गए गेट और बनाया गया रास्ता, व्यावसायिक उपयोग के आरोप में सख्त कार्रवाई की तैयारी

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। मोहन नगर जोन क्षेत्र के अर्थला गांव में नगर निगम की करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि पर अवैध कब्जे की कोशिश का मामला सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। नगर निगम की बाउंड्रीवॉल तोड़कर रास्ता बनाने और सरकारी भूमि का व्यावसायिक उपयोग किए जाने की शिकायत पर महापौर सुनीता दयाल स्वयं अधिकारियों और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने नगर निगम की संपत्ति पर हुए अतिक्रमण को गंभीरता से लेते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने, अवैध रास्ते बंद करने तथा बाउंड्रीवॉल को और ऊंचा करने के निर्देश दिए। महापौर ने बताया कि अर्थला गांव स्थित नगर निगम के खसरा संख्या-1085 की लगभग 1010 वर्गमीटर भूमि की वर्तमान बाजार कीमत करीब 40 करोड़ रुपये है। इस बेशकीमती सरकारी भूमि की सुरक्षा के लिए पहले से बाउंड्रीवॉल बनाई गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों द्वारा दीवार तोड़कर उसमें रास्ता बना लिया गया। इतना ही नहीं, कुछ लोगों ने अपने मकानों और प्रतिष्ठानों के गेट भी नगर निगम की भूमि की ओर खोल लिए और उसका व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग किया जा रहा था।

जैसे ही इस पूरे मामले की जानकारी महापौर सुनीता दयाल को मिली, उन्होंने तत्काल नगर निगम के संपत्ति अधीक्षक राम शंकर वर्मा और उनकी टीम को मौके पर भेजा। आरोप है कि कार्रवाई करने पहुंची नगर निगम टीम के साथ रोहताश, बिल्लू उर्फ संजीव, जगदीश, अशोक, जयपाल, पवन और राकेश (निवासी करहेड़ा) सहित कुछ लोगों ने अभद्र व्यवहार किया और कार्रवाई में बाधा डालने का प्रयास किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महापौर ने तत्काल साहिबाबाद थाने से अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर बुलवाया और स्वयं भी घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे मामले का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि नगर निगम की बाउंड्रीवॉल तोड़कर कई स्थानों से अवैध रास्ते बना लिए गए हैं तथा सरकारी भूमि का उपयोग निजी और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।

महापौर ने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि संबंधित लोगों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही सभी अवैध रास्तों को बंद किया जाए, अवैध रूप से खोले गए गेट हटाए जाएं और नगर निगम की बाउंड्रीवॉल को पहले से अधिक मजबूत एवं ऊंचा बनाया जाए, ताकि भविष्य में दोबारा इस प्रकार का अतिक्रमण न हो सके। महापौर सुनीता दयाल ने स्पष्ट कहा कि जिस प्रकार इस भूमि का उपयोग किया जा रहा था, उससे यह आशंका भी जताई जा सकती है कि भू-माफियाओं की नजर इस सरकारी संपत्ति पर थी और भविष्य में इसे कब्जाकर बेचने की योजना बनाई जा रही थी।

उन्होंने कहा कि समय रहते सूचना मिलने के कारण नगर निगम ने तत्काल कार्रवाई की है और किसी भी कीमत पर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि नगर निगम की प्रत्येक इंच भूमि जनता की संपत्ति है और उसकी सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। जो भी व्यक्ति सरकारी जमीन पर कब्जा करने, उसका दुरुपयोग करने अथवा नगर निगम की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करेगा, उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी संपत्तियों को अतिक्रमण मुक्त रखने का अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और भू-माफियाओं के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।