– डीएम रविन्द्र कुमार माँदड़ की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक, शस्त्र अधिनियम व नियमावली के सख्त पालन पर जोर
– सभी शस्त्र लाइसेंसों की होगी निष्पक्ष जांच, डीलरों व गनस्मिथ्स का नियमित ऑडिट अनिवार्य
– अवैध शस्त्र निर्माण और बिक्री के हॉटस्पॉट चिन्हित कर चलाए जाएंगे विशेष अभियान
– पुलिस-खुफिया विभाग मिलकर कसेंगे शिकंजा, संदिग्ध गतिविधियों पर रखी जाएगी कड़ी नजर
– जन-जागरूकता अभियान से युवाओं को अवैध हथियारों के गोरखधंधे से दूर रखने की कवायद
– अवैध शस्त्र तस्करी पर रोक के लिए मध्यप्रदेश व बिहार से जुड़े नेटवर्क पर भी सख्त कार्रवाई
– अवैध शस्त्र निर्माण और बिक्री के हॉटस्पॉट चिन्हित कर चलाए जाएंगे विशेष अभियान
– पुलिस-खुफिया विभाग मिलकर कसेंगे शिकंजा, संदिग्ध गतिविधियों पर रखी जाएगी कड़ी नजर
– जन-जागरूकता अभियान से युवाओं को अवैध हथियारों के गोरखधंधे से दूर रखने की कवायद
– अवैध शस्त्र तस्करी पर रोक के लिए मध्यप्रदेश व बिहार से जुड़े नेटवर्क पर भी सख्त कार्रवाई
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। महात्मा गांधी सभागार, कलेक्ट्रेट में गुरुवार को जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में जनपद में अवैध शस्त्रों के खिलाफ निर्णायक रणनीति तय की गई। बैठक में शस्त्र अधिनियम, 1959 एवं शस्त्र नियमावली, 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि जनपद के सभी शस्त्र लाइसेंसों की पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच और सत्यापन किया जाएगा। शस्त्रों एवं गोला-बारूद की जमा एवं जब्ती प्रक्रिया को कड़ाई से लागू किया जाएगा। लाइसेंसधारी निर्माण इकाइयों, डीलरों और गनस्मिथ्स का नियमित ऑडिट और निरीक्षण भी अनिवार्य रूप से किया जाएगा। टास्क फोर्स ने यह भी तय किया कि अवैध शस्त्र निर्माण और बिक्री के हॉटस्पॉट क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां विशेष अभियान चलाए जाएंगे। पुलिस एवं खुफिया विभाग मिलकर इन गतिविधियों पर शिकंजा कसेंगे।
गाजियाबाद। महात्मा गांधी सभागार, कलेक्ट्रेट में गुरुवार को जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में जनपद में अवैध शस्त्रों के खिलाफ निर्णायक रणनीति तय की गई। बैठक में शस्त्र अधिनियम, 1959 एवं शस्त्र नियमावली, 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि जनपद के सभी शस्त्र लाइसेंसों की पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच और सत्यापन किया जाएगा। शस्त्रों एवं गोला-बारूद की जमा एवं जब्ती प्रक्रिया को कड़ाई से लागू किया जाएगा। लाइसेंसधारी निर्माण इकाइयों, डीलरों और गनस्मिथ्स का नियमित ऑडिट और निरीक्षण भी अनिवार्य रूप से किया जाएगा। टास्क फोर्स ने यह भी तय किया कि अवैध शस्त्र निर्माण और बिक्री के हॉटस्पॉट क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां विशेष अभियान चलाए जाएंगे। पुलिस एवं खुफिया विभाग मिलकर इन गतिविधियों पर शिकंजा कसेंगे।
इसके साथ ही सर्विलांस टीम भी गठित की जाएगी, जो हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखेगी। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि जनपद की जनता को अवैध शस्त्रों के खतरों और उनके दुष्परिणामों के प्रति जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षित किया जाएगा। विद्यालयों, कॉलेजों और ग्रामीण स्तर पर विशेष अभियान चलाकर युवा पीढ़ी को इस गोरखधंधे से दूर रखने का प्रयास किया जाएगा। अवैध शस्त्रों से संबंधित दर्ज मुकदमों और चल रहे अभियोजनों की प्रगति की नियमित समीक्षा टास्क फोर्स करेगी। संबंधित विभागों और एजेंसियों से सटीक समन्वय स्थापित कर हर मामले में ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ ने कहा कि शासनादेशों के अनुपालन में मिले आदेशों का अक्षरश: पालन किया जाए। अधिकारी और विभागीय जिम्मेदार अपने-अपने दायित्वों को पूर्ण ईमानदारी और कर्त्तव्यनिष्ठा से निभाएं। यह केवल प्रशासनिक आदेश नहीं है बल्कि समाज और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा पवित्र दायित्व है। इस बैठक में एडीएम (एफ/आर) सौरभ भट्ट, एडीएम सिटी विकास कश्यप, डीसीपी धवल जायसवाल, निमिष पाटिल, एस.एन. तिवारी, एसीपी प्रताप सिंह और सूर्यबली मौर्य सहित कई पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
गाजियाबाद दिल्ली-एनसीआर का अहम हिस्सा होने के कारण हमेशा से अवैध शस्त्रों के कारोबारियों की नजर में रहा है। अपराधियों के पास से हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में कट्टे, पिस्तौल और कारतूस बरामद हुए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश अवैध शस्त्र मध्यप्रदेश और बिहार से तस्करी कर लाए जाते हैं। ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा टास्क फोर्स को सक्रिय करना अपराध पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
















