Rakesh Tikait – पहले गधा पर बैठाया और अब शव यात्रा निकाली, वाल्मीकि समाज में बढ़ रहा है टिकैट के खिलाफ उबाल

Rakesh Tikait ने पहले ब्राहण और अब वाल्मीकि समाज का किया अपमान, वाल्मीकि समाज के नेताओं का गाजियाबाद में धरना जारी। प्रदर्शनकारी नेता बोले टिकैट का करेंगे इलाज और तेज होगा वाल्मीकि समाज का आंदोलन
उदय भूमि ब्यरो
गाजियाबाद। दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन के लीडर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता Rakesh Tikait के खिलाफ वाल्मीकि समाज ने मोर्चा खोल दिया है। वाल्मीकि समाज के सदस्यों ने सोमवार को पुलिस को चकमा देकर न सिर्फ किसान नेता Rakesh Tikait की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली बल्कि पुतला भी फूंका गया। इस दौरान जमकर नारेबाजी भी की गई। जब तक पुलिस फोर्स मौके पर आती, पुतला जल चुका था।rakesh-tikait-protest-ghaziabad

बता दें कि गत 30 जून को भाजपा नेता अमित वाल्मीकि का काफिला गाजीपुर बॉर्डर के पास से गुजर रहा था। इस दौरान किसानों ने अमित वाल्मीकि के काफिले पर हमला कर दिया और लाठी, डंडे व हथियारों से वाल्मीकि के समर्थकों की पिटाई की। मौके पर जमकर हंगामा हुआ था। बाद में दोनों पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। यह विवाद अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमित वाल्मीकि के अपमान की घटना से नाराज वाल्मीकि समाज ने भाकियू नेता Rakesh Tikait के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मामले को निपटाने के लिए किसान नेता निरंतर वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों के साथ मंत्रणा कर रहे हैं। लेकिन वाल्मीकि समाज का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है।

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ऐलान कर निकला शव यात्रा फिर फूंका पुतला
गाजियाबाद में नामित पार्षद एवं वाल्मीकि समाज के वरिष्ठ नेता प्रदीप चौहान और भाजपा पार्षद यशपाल पहलवान के नेतृत्व में वाल्मीकि समाज के लोगों ने राकेश टिकैत का पुतला फूंका। 24 घंटे पहले वाल्मीकि समाज ने भाकियू नेता Rakesh Tikait की शव यात्रा निकाल कर पुतला फूंकने की घोषणा की थी। पुलिस ने पूरा इंतजाम किया था कि किसी भी तरह से शव यात्रा और पुतला फूंकने के कार्यक्रम को रोका जाये। इसके मद्देनजर नवयुग मार्केट स्थित वाल्मीकि पार्क में सोमवार की सुबह भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। वाल्मीकि समाज के लोग पार्क में धरना देकर बैठे रहे। धरना स्थल पर कोई हल-चल ना होती देख वहां तैनात पुलिसकर्मी गेट पर मुस्तैद रहे। पुलिस की तैयारी थी कि पार्क से निकलने वाले राकेश टिकैट के प्रतीकात्मक शव यात्रा को निकालने से रोका जाए, मगर पुलिस की तैयारियों को धता बताकर वाल्मीकि समाज के नागरिकों ने एक-एक कर दूसरे रास्ते से पार्क से बाहर जाना शुरू कर दिया। इससे पहले कि पुलिस कुछ समझ पाती तब तक नवयुग मार्केट में पंजाब नेशनल बैंक चौराहे पर कुछ दूरी तक प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाल कर Rakesh Tikait का पुतला फूंक दिया गया।rakesh-tikait-protest-ghaziabad-valmiki-park

नारेबाजी के बाद पहुंची पुलिस
पार्क के बाहर नारेबाजी होने पर पुलिस कर्मी उधर दौड़ पड़े, मगर तब तक वाल्मीकी समाज की पूर्व घोषणा के तहत पुतला फूंक दिया गया था। इसके बाद पुलिस ने जलते पुतले को किसी तरह चौराहे से हटाया। भाजपा नेता प्रदीप चौहान व पार्षद यशपाल पहलवान ने कहा कि पुलिस ने उन्हें रोकने की पूरी तैयारी की थी, मगर उन्होंने पहले से ठोस योजना बना रखी थी। उन्होंने कहा कि अमित वाल्मीकि के काफिले पर हमला करने वाले किसान नहीं हो सकते। वह सभी अपराधी हैं। Rakesh Tikait डकैट वाला काम कर रहा है। जब तक इस मामले के Rakesh Tikait सहित सभी दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों में आशु चारण वाल्मीकि, संजीव वाल्मीकि, अनिल कल्याणी, परवीन गहलौत, सनी वाल्मीकि, नीरज वाल्मीकि आदि शामिल थे।

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पीछे नहीं हटेगा वाल्मीकि समाज
वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि राकेश टिकैत का व्यवहार उचित नहीं है। वह मनमानी करने पर उतारू हैं। अमित वाल्मीकि के काफिले पर हमला होने के बावजूद उन्होंने किसी प्रकार का नरम रूख नहीं अपनाया बल्कि बयान दिया कि यदि कोई भी भाजपा नेता गाजीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन के मंच पर आएगा तो उसकी बक्कल उधेड़ दी जाएगी। Rakesh Tikait को इस प्रकार की भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए था। वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि Rakesh Tikait को वाल्मीकि समाज का अनादर करने का कोई हक नहीं है। जब तक वह अपनी गलती को स्वीकार नहीं करते, उनके खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा।

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पहले भी विवादित बयान दे चुके टिकैत
भाकियू नेता Rakesh Tikait का विवादों से पुराना नाता है। वाल्मीकि समाज के प्रति आक्रामक रूख अपनाने से पहले भी वह ब्राह्मण समाज को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। जिसके चलते उनके खिलाफ ब्राह्मण समाज के अलग-अलग संगठनों से विरोध-प्रदर्शन किया था। आरोप है कि किसान आंदोलन के बहाने Rakesh Tikait सिर्फ अपनी राजनीति चमका रहे हैं। बता दें कि केंद्र सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच लंबे समय से बातचीत रूकी पड़ी है। सरकार ने साफ कर दिया है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के अलावा किसी भी मुद्दे पर किसान प्रतिनिधि बातचीत कर सकते हैं। कानूनों में संशोधन संभव है, मगर उन्हें वापस कतई नहीं लिया जाएगा।

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