• जलभराव वाले 56 हॉटस्पॉट पर 65 से अधिक पंप सेट लगाए, त्वरित निकासी से लोगों को मिली राहत
• नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने खुद संभाली कमान, जलभराव और ट्रैफिक व्यवस्था का किया निरीक्षण
• कांवड़ रूट और मंदिर परिसरों में जलभराव रोकने के लिए विशेष सतर्कता, हर शिकायत का हुआ तुरंत समाधान
• नगर निगम का कंट्रोल रूम रहा एक्टिव, 9 शिकायतों का मौके पर ही कराया समाधान
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। सावन की मूसलाधार बारिश के बीच जहां बुधवार को शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनी, वहीं गाजियाबाद नगर निगम ने अपनी सक्रियता और चुस्ती से हालात को नियंत्रण में रखा। जलनिकासी को लेकर नगर निगम की टीमें सुबह से ही अलर्ट मोड पर रहीं। जलकल विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर ऐसे स्थलों पर तेजी से काम किया जो वर्षों से जलभराव के हॉटस्पॉट रहे हैं। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के नेतृत्व में निगम की ओर से कुल 56 जलभराव प्रभावित बिंदुओं पर 60 से 65 पंप सेट लगाए गए। लालकुआं, यूपी गेट, एलिवेटेड रोड के नीचे, साइ उपवन अंडरपास, गौशाला अंडरपास जैसे प्रमुख स्थलों पर अतिरिक्त पंप लगाकर तत्काल जल निकासी की गई।
नगर आयुक्त ने स्वयं पांचों जोनों में भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया। श्रावण शिवरात्रि को लेकर गाजियाबाद नगर निगम ने कांवड़ रूट और प्रमुख मंदिर परिसरों पर जलनिकासी को लेकर विशेष इंतजाम किए। मेरठ रोड से भोपुरा तक निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया गया कि कहीं भी जलभराव की स्थिति श्रद्धालुओं की आस्था में बाधा न बने। महाप्रबंधक जलकल कामाख्या प्रसाद आनंद ने बताया कि जैसे ही सुबह से बारिश शुरू हुई, तत्काल पंप सेट सक्रिय कर दिए गए। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी जरूरी उपकरणों के साथ मौके पर डटी रही, ताकि जलभराव के कारण किसी प्रकार की संक्रमण या गंदगी की स्थिति न बने।
नगर आयुक्त ने खुद किया मैदान में निरीक्षण, कंट्रोल रूम रहा पूरी तरह सक्रिय
नगर आयुक्त श्री मलिक ने न केवल व्यवस्थाओं की समीक्षा की, बल्कि स्वयं बारिश के दौरान विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण भी किया। कंट्रोल रूम को एक्टिव रखा गया, जिससे प्राप्त हुईं 9 जलभराव संबंधी शिकायतों का तुरंत समाधान कराया गया। इस त्वरित एक्शन से नागरिकों में भी विश्वास और संतोष की भावना देखने को मिली।
बारिश में भी जागरूक और संवेदनशील रहा निगम प्रशासन
गाजियाबाद नगर निगम की इस तत्परता ने यह साबित कर दिया कि आपदा की घड़ी में सेवा भाव और कर्तव्यनिष्ठा से हालात कैसे काबू में रखे जा सकते हैं। आमजन को राहत देना ही प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही।
नगर निगम का एक्शन प्लान बना उदाहरण
इस पूरे अभियान से यह संदेश गया कि जब जिम्मेदारी और नेतृत्व एकजुट हो जाएं, तो प्राकृतिक चुनौतियों के बावजूद आमजन को राहत मिल सकती है। गाजियाबाद नगर निगम की यह पहल अन्य शहरों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण बन सकती है।

















