गाजियाबाद। बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी प्रदर्शन और हिंसक झड़पों के बीच सोमवार को तख्तापलट हो गया। प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया और राजधानी ढाका छोड़ दिया है। प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सैकड़ों लोग बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास गणभवन में घुस गए हैं। इसके बाद ही शेख हसीना भारत के अगरतला पहुंचीं। वहां से शेख हसीना विमान में उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरबेस पहुंची। यहां शाम करीब 5:36 बजे उनके विमान ने लैंडिग की। बताया जा रहा है कि हिंडन एयरबेस पर उन्हें वायुसेना के अधिकारियों ने रिसीव किया। यहां से उन्हें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच निकाला गया है। सूत्रों से पता चला है कि उन्हें कुछ देर गाजियाबाद के गेस्ट हाउस में रखा जाएगा। इसके बाद उन्हें सड़क के रास्ते में दिल्ली ले जाया जाएगा। एएफपी की एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश की सड़कों पर रविवार को भीषण झड़पें हुईं, जिसमें मरने वालों की संख्या कम से कम 300 हो गई। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
28 सितंबर 1947 को जन्मीं शेख हसीना बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की सबसे बड़ी बेटी हैं। उनका शुरुआती जीवन पूर्वी बंगाल के तुंगीपारा में बीता। यहीं उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद वह कुछ समय तक सेगुनबगीचा में भी रहीं। फिर उनका पूरा परिवार बांग्लादेश की राजधानी ढाका में शिफ्ट हो गया। अवामी लीग का काम संभालने के बाद 1975 का साल उनके और उनके परिवार के लिए पूरी तरह भूकंप जैसा था। सेना ने विद्रोह कर दिया और उनके परिवार के खिलाफ बगावत शुरू कर दी। इस लड़ाई में शेख हसीना के पिता मुजीबुर रहमान और मां के साथ-साथ तीन भाई भी मारे गए। उस समय शेख हसीना और उनके पति वाजिद मियां और छोटी बहन बच गए। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जब ये सब हुआ, तब वो यूरोप में थीं। इसके बाद पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने उन्हें भारत में शरण दी। वो अपनी बहन के साथ दिल्ली आ गईं और करीब 6 साल तक यहीं रहीं।
















