हरित विकास और पर्यावरण संरक्षण की ऐसी पहलें भविष्य के स्वच्छ भारत की मजबूत नींव हैं: DM

-दुहाई टोल प्लाजा इंटरचेंज पर डीएम ने परखी व्यवस्थाएं, स्वच्छता और ग्रीनरी देख की सराहना
-मियावाकी पद्धति से विकसित हो रहा घना वन क्षेत्र, 26 एकड़ में लगाए गए 1.63 लाख पौधे
-बांस से बने क्रैश बैरियर और स्वच्छ परिसर बने आकर्षण का केंद्र, डीएम ने किया पौधारोपण

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और स्वच्छता को बढ़ावा देने की दिशा में दुहाई टोल प्लाजा इंटरचेंज एक नई मिसाल बनकर उभर रहा है। सोमवार को जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ ने ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे (एनई-2) स्थित दुहाई टोल प्लाजा इंटरचेंज का निरीक्षण कर वहां विकसित की गई व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान टोल प्लाजा परिसर में विकसित हरित क्षेत्र, स्वच्छता व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी पहलों को देखकर जिलाधिकारी ने अधिकारियों की सराहना की।
जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच इस प्रकार की हरित और पर्यावरणीय पहलें भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छता, हरियाली और आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था का यह मॉडल अन्य स्थानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। निरीक्षण के दौरान सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र मियावाकी पद्धति से विकसित किया गया नेटिव डेंस फॉरेस्ट रहा। अधिकारियों ने जिलाधिकारी को बताया कि इस पद्धति से लगाए गए पौधे पारंपरिक वृक्षारोपण की तुलना में लगभग 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं और 30 गुना अधिक घने होते हैं। यह वन क्षेत्र न केवल हरियाली बढ़ाने में मदद कर रहा है, बल्कि जैव विविधता को भी मजबूत बना रहा है।

जिलाधिकारी ने बताया कि घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में इस प्रकार के हरित क्षेत्र ध्वनि और धूल अवरोधक के रूप में बेहद प्रभावी साबित होते हैं। साथ ही यह पक्षियों और अन्य जीवों के लिए प्राकृतिक आवास विकसित करने में भी सहायक हैं। परियोजना के अंतर्गत लगभग 26.39 एकड़ भूमि पर करीब 1 लाख 63 हजार 305 पौधों का रोपण किया गया है। इनमें फलदार और छायादार प्रजातियों के पौधे शामिल हैं। प्रमुख पौधों में नीम, अर्जुन, जामुन, कचनार, अमरूद, करंज, शहतूत, अशोक, आम, कदंब, इमली और चाइनीज फैन पाम जैसी प्रजातियां शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बांस से निर्मित क्रैश बैरियर का भी अवलोकन किया। यह तकनीक राष्ट्रीय राजमार्गों पर पारंपरिक स्टील क्रैश बैरियर के विकल्प के रूप में विकसित की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि बांस आधारित ये बैरियर यूरोपीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किए गए हैं और भारत में पेटेंट भी किए जा चुके हैं। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ ने कहा कि बांस आधारित क्रैश बैरियर पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से बेहद उपयोगी हैं।

इनके उपयोग से निर्माण लागत में लगभग 20 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है। साथ ही बांस अधिक मात्रा में कार्बन डाईऑक्साइड को अवशोषित कर वातावरण में ऑक्सीजन बढ़ाने का कार्य करता है। इसकी जड़ें मिट्टी के कटाव को रोकने और जल संरक्षण में भी सहायक होती हैं। निरीक्षण के दौरान सार्वजनिक शौचालयों की स्वच्छता और परिसर की सुव्यवस्थित व्यवस्था भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली को दर्शाती नजर आई। इंटरचेंज क्षेत्र और आसपास के स्थानों का रखरखाव संतोषजनक पाया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि स्वच्छता केवल अभियान नहीं बल्कि सतत प्रक्रिया है और इसे निरंतर बनाए रखना आवश्यक है।

टोल प्लाजा परिसर में यात्रियों और आमजन में सकारात्मक वातावरण विकसित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय गीतों का प्रसारण भी किया जा रहा है। इससे देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा मिल रहा है। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्वयं पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वच्छता, हरियाली और बेहतर प्रबंधन व्यवस्था को आगे भी इसी प्रकार बनाए रखा जाए और इसे और अधिक प्रभावी बनाया जाए। इस अवसर पर एनएचएआई के परियोजना निदेशक अरविंद कुमार, टोल प्लाजा के अधिकारी एवं अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।