गाजियाबाद। ग्रीन शाइन वर्ल्ड स्कूल में गुरुवार को महान शिक्षाविद व देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया गया। विद्यार्थियों ने अपने पसंदीदा शिक्षक की भूमिका निभाई। इस आयोजन का उद्देश्य व्यक्ति के जीवन में शिक्षक के महत्व को समझना था। उप प्राचार्या डॉ. मृदुला शर्मा ने छात्रों के उत्साह और रचनात्मकता की सराहना करते हुए भारतीय प्राचीन संस्कृति से जुडऩे और छात्र और शिक्षक के बीच संबंधों के महत्व पर जोर दिया। यह उत्सव ज़बरदस्त रूप से सफल रहा, जिससे हर किसी में खुशी और उत्साह का भाव था। छात्र शिक्षक दिवस मनाने के लिए उत्साहित थे और उन्होंने अपने शिक्षकों के सम्मान में छोटे-छोटे प्रदर्शन भी किए।
उप प्राचार्या डॉ. मृदुला शर्मा ने कहा कि डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन संघर्षों से भरा था। उन्होंने अपने जीवन में संघर्ष करते हुए राष्ट्रपति तक का सफर तय किया। उन्होंने शिक्षा के मूल्य को काफी तरजीह दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में गुरु का स्थान सबसे ऊपर माना गया है। गुरु ही हमें सत्य और असत्य में भेद बताकर जीवन जीने की कला सिखाते हैं। हमारी भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। मौजूदा हालात में गुरु शब्द गौण हो चुका है। अब गुरु के स्थान पर मास्टर साहब, शिक्षक एवं सर जी प्रयुक्त होने लगा है। आज हमें आत्ममंथन करने की आवश्यकता है की हम अपने आने वाली पीढ़ी को नैतिक, सामाजिक, चारित्रिक रूप से कुशल कैसे बना सकते हैं।
इसके लिए हमें ईमानदारी पूर्वक पहल करनी होगी। हमें बच्चों को जीवन के मूल्यों पर आधारित शिक्षा देनी होगी। सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म पांच सितंबर 1888 ई. को तमिलनाडु के मध्यम वर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वे आरंभिक दिनों में हमारे जैसे एक शिक्षक थे। लेकिन अपने दृढ़ निश्चय, लगन व कार्यकुशलता के बल पर देश के सर्वोच्च नागरिक कहलाने का गौरव प्राप्त किया। उनके हीं जन्मदिन पर पांच सितंबर को प्रतिवर्ष शिक्षक दिवस मनाया जाता है।

















