• जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स के नेतृत्व में ‘स्मार्ट टाउनशिप’ का सपना हो रहा साकार
• गाजियाबाद को मिलेगी स्मार्ट और सुनियोजित टाउनशिप, पहली रजिस्ट्री के साथ विकास की मजबूत शुरुआत
• ग्राम नंगला फिरोज मोहनपुर की निवासी को सौंपा 43.71 लाख का मुआवजा चेक
• 500 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर विकसित होगी हरनंदीपुरम, 2,384 करोड़ की परियोजना
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी योजना हरनंदीपुरम आवासीय योजना ने आज धरातल पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है। शुक्रवार को योजना के अंतर्गत पहली रजिस्ट्री ग्राम नंगला फिरोज मोहनपुर की निवासी रूबी पत्नी दीपक कुमार के नाम संपन्न हुई। रूबी को उनके खसरा संख्या 364 मि0, रकबा 0.0759 हेक्टेयर भूमि के एवज में 43,71,840 (तेंतालीस लाख इकहत्तर हजार आठ सौ चालीस रुपये) का मुआवजा चेक जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने सौंपा। यह क्षण हरनंदीपुरम योजना के क्रियान्वयन की दिशा में पहला मजबूत कदम है, जिसे शहर के नागरिकों के लिए एक सुनियोजित, सुरक्षित और आधुनिक जीवनशैली की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। हरनंदीपुरम योजना के प्रथम रजिस्ट्री की यह घटना न केवल विकास की शुरुआत है, बल्कि नागरिकों की उस आशा की पुष्टि है जो वे वर्षों से एक व्यवस्थित, स्वच्छ और सुरक्षित गाजियाबाद के लिए संजोए हुए थे। यह जीडीए के उस संकल्प की पुष्टि है, जो उपाध्यक्ष श्री अतुल वत्स के नेतृत्व में अब साकार होता दिखाई दे रहा है। यह योजना को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष (वीसी) अतुल कुमार वत्स का ड्रीम प्रोजेक्ट है।
उनके नेतृत्व में प्राधिकरण ने जिस प्रकार से हर चरण को पारदर्शिता और तत्परता के साथ आगे बढ़ाया है, वह गाजियाबाद जैसे तीव्र विकासशील नगर के लिए अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है। जीडीए वीसी ने कहा कि यह परियोजना केवल आवासीय सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक समावेशी, हरित और टिकाऊ नगरी की परिकल्पना को साकार करना है, जिसमें नागरिकों को सुरक्षा, सुविधा और स्वच्छ परिवेश की गारंटी मिलेगी। हरनंदीपुरम योजना की औपचारिक शुरुआत वर्ष 2025 के प्रारंभ में की गई थी, जिसे मई 2025 में मेरठ मंडलायुक्त एवं जीडीए अध्यक्ष ऋषिकेश भास्कर यशोद की अध्यक्षता में आयोजित प्राधिकरण की 169वीं बोर्ड बैठक में अनुमोदन प्राप्त हुआ। योजना के तहत लगभग 501 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित किया गया है, जिसमें पहले चरण में 336 हेक्टेयर भूमि जिले के पांच प्रमुख ग्रामों मथुरापुर, शमशेर, चंपतनगर, भनेरा खुर्द और नंगला फिरोज से अधिग्रहित की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि किसानों को उनके भूमि सर्किल दर का चार गुना मुआवज़ा दिए जाने का प्रावधान किया गया है, जो इस योजना को जनसहभागिता और सम्मानजनक पुनर्वास की मिसाल बनाता है। इस परियोजना पर अनुमानित कुल व्यय 2,384 करोड़ है। इसमें से 400 करोड़ की धनराशि मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि शेष राशि जीडीए अपने संसाधनों से जुटाएगा। योजना को चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा, ताकि प्रत्येक कार्य समयबद्ध और व्यवस्थित ढंग से पूरा हो सके। इसी क्रम में विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है।
देश की प्रमुख सलाहकार संस्थाओं से प्रस्ताव आमंत्रित किए जा चुके हैं और चयनित एजेंसी को आगामी दो माह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने कहा कि हरनंदीपुरम योजना केवल गाजियाबाद ही नहीं, बल्कि पूरे एनसीआर क्षेत्र के लिए शहरी विकास का आदर्श मॉडल बनेगी। यह योजना नागरिकों को ऐसी जीवनशैली देगी, जो सुरक्षित, समृद्ध और नागरिक-केंद्रित होगी। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण की टीम पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है, ताकि यह परियोजना न केवल समय पर पूर्ण हो, बल्कि गुणवत्ता की दृष्टि से भी एक मिसाल बने। उनका यह भी कहना था कि किसान भाई-बहनों के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है और मुआवज़ा वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी एवं सम्मानजनक बनाया गया है।
गाजियाबाद के शहरी विकास का नया चेहरा
योजना की विशेषताएं:
• कुल 501 हेक्टेयर भूमि का प्रस्तावित अधिग्रहण
• प्रथम चरण में 336 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण 5 ग्रामों (मथुरापुर, शमशेर, चंपतनगर, भनेरा खुर्द, नंगला फिरोज) से
• किसानों को मिलेगा चार गुना सर्किल दर पर मुआवज़ा
• परियोजना की कुल लागत 2,384 करोड़
• 400 करोड़ की वित्तीय सहायता मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना से
• परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (डीपीआर) दो माह में तैयार कर प्रस्तुत की जाएगी
















