गौतमबुद्ध नगर में कानून की लाठी और संवाद की भाषा- आबकारी का नया मॉडल

-जनहित, व्यापार हित और शासनहित-तीनों का संतुलन साध रहे हैं सुबोध श्रीवास्तव
-रेस्टोरेंट और बार संचालन अब सिर्फ मुनाफा नहीं, जिम्मेदारी भी
-लाइसेंसी सिस्टम में पारदर्शिता और बढ़ेगा राजस्व आबकारी अधिकारी का सख्त लेकिन संवेदनशील नेतृत्व
-जनहित और सरकारी खजाने दोनों की रक्षा में जुटे हैं गौतमबुद्ध नगर के आबकारी अधिकारी

उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। जब कोई अधिकारी सिर्फ आदेश नहीं देता, बल्कि अपने काम से उदाहरण प्रस्तुत करता है, तो विभाग की छवि बदलती है, कार्यशैली सुधरती है और जनविश्वास गहराता है। गौतमबुद्ध नगर के आबकारी विभाग के मुखिया सुबोध कुमार श्रीवास्तव आज ठीक ऐसे ही अधिकारियों की सूची में शुमार हैं, जिन्होंने अपनी सख्ती और विनम्र व्यवहार के संतुलन से विभाग की न सिर्फ साख बढ़ाई है, बल्कि सरकारी खजाने में करोड़ों का इजाफा भी सुनिश्चित किया है। जिले के आबकारी विभाग की कमान संभाल रहे अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव न सिर्फ अपने शांत, सरल और सौम्य व्यक्तित्व के लिए जाने जाते हैं, बल्कि अपने दृढ़ निर्णयों और बेधड़क कार्यशैली के कारण विभागीय सुधार और राजस्व वृद्धि के क्षेत्र में मिसाल भी बनते जा रहे हैं। वो अधिकारी जो सिर्फ निर्देश नहीं देते, खुद मैदान में उतर कर व्यवस्था को नजदीक से देखते हैं, समझते हैं और फिर समाधान निकालते हैं। यही वजह है कि गौतमबुद्ध नगर में शराब व्यवसाय की व्यवस्था पहले से कहीं अधिक संगठित, पारदर्शी और जवाबदेह बन रही है। सुबोध श्रीवास्तव का प्रशासनिक दृष्टिकोण दोहरे मापदंडों पर नहीं चलता।

जो व्यवसायी नियमों के अनुसार काम करते हैं, उनके लिए वे पूर्ण सहयोग और सुविधा का आश्वासन देते हैं। लेकिन जो नियमों की अनदेखी कर विभागीय राजस्व को चपत लगाने की कोशिश करते हैं, उनके खिलाफ वे न सिर्फ सख्त होते हैं, बल्कि उदाहरण भी पेश करते हैं। अवैध शराब बेचने वाले तस्कर हों या नियमों के विपरीत कार्य कर रहे बार और होटल संचालक सुबोध श्रीवास्तव ने एक-एक को चिन्हित कर कार्रवाई करवाई है। आबकारी विभाग न सिर्फ राजस्व के प्रति सजग है, बल्कि जनसुरक्षा के विषयों पर भी उतनी ही संवेदनशीलता रखता है। विभाग ने सभी संचालकों को निर्देशित किया है कि वे दमकल विभाग की एनओसी अनिवार्य रूप से जमा करें और पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि यातायात बाधित न हो। आबकारी विभाग की टीम पूरे जिले में नियमित निरीक्षण कर रही है, साथ ही संचालकों को नियमों के अनुपालन के लिए मार्गदर्शन व तकनीकी सहायता भी दे रही है। यह प्रशासन और उद्यमियों के बीच एक स्वस्थ संबंध की मिसाल है।

परमानेंट लाइसेंस को बढ़ावा, व्यवसायी की भी बचत और सरकार को भी लाभ
गौतमबुद्ध नगर में करीब 200 से अधिक होटल, रेस्टोरेंट और बार संचालित हो रहे हैं, जिनमें से लगभग 146 के पास स्थायी बार लाइसेंस हैं, जबकि शेष ऑकेजनल लाइसेंस लेकर अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। आबकारी अधिकारी ने ऑकेजनल लाइसेंस धारकों को परमानेंट लाइसेंस लेने के लिए प्रोत्साहित करने का अभियान छेड़ रखा है। वे खुद होटल और रेस्टोरेंट संचालकों से संवाद करते हैं और समझाते हैं कि सालभर के ऑकेजनल लाइसेंस पर 40 लाख रुपये से अधिक का खर्च होता है, जबकि परमानेंट लाइसेंस लेने से उन्हें लगभग 15 लाख रुपये में ही काम हो जाएगा। यह जागरुकता न केवल व्यवसायियों को आर्थिक रूप से राहत देती है, बल्कि आबकारी विभाग के राजस्व में भी स्थायी और सुनिश्चित वृद्धि सुनिश्चित करती है। सुबोध श्रीवास्तव इस सुधार को केवल आदेश तक सीमित नहीं रखते, बल्कि अपनी टीम के साथ निरीक्षण कर इसकी प्रगति पर नजर भी रखते हैं।

सुरक्षा और व्यवस्था दोनों पर विशेष जोर
शराब बिक्री की व्यवस्था को लेकर उन्होंने होटल, बार और रेस्टोरेंट संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अग्निशमन विभाग की अनिवार्य अनुमति (एनओसी) तथा समुचित पार्किंग की सुविधा हर लाइसेंसी संस्थान में होनी चाहिए। उनका मानना है कि आमजन की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। किसी भी प्रकार की अव्यवस्था, भीड़भाड़ या आग जैसी आपात स्थिति में यदि विभागीय अनुमति के बिना कोई दुर्घटना होती है, तो सख्त कार्रवाई होगी।

लाइसेंस की समीक्षा बैठक में सख्त संदेश
आबकारी अधिकारी ने सोमवार को अपने कार्यालय में आबकारी निरीक्षक एवं स्टॉफ के साथ एक विशेष समीक्षा बैठक की, जिसमें लाइसेंसिंग सिस्टम की बारीकी से जांच की गई। यह पाया गया कि कुछ होटल संचालक सप्ताह में केवल 3 या 6 दिन के लिए ही लाइसेंस लेते हैं। इस पर उन्होंने निर्देश जारी किया कि या तो सप्ताह के सभी सात दिन का लाइसेंस लिया जाए या फिर बिना लाइसेंस वाले दिन बार पूरी तरह बंद रखा जाए। उन्होंने कहा कि किसी को भी नियमों की अनदेखी कर विभाग को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

आबकारी टीम की मुस्तैदी भी काबिले तारीफ
सिर्फ अधिकारी ही नहीं, पूरी आबकारी टीम निरीक्षणों में सक्रिय भूमिका निभा रही है। बार-बार निरीक्षण, व्यापारियों से संवाद और हर स्तर पर सहयोग की भावना ने विभाग की छवि को निखारा है। व्यापारियों को पूरी पारदर्शिता के साथ लाइसेंस लेने, नवीनीकरण कराने और विभागीय औपचारिकताओं में सहयोग देने के लिए मार्गदर्शन दिया जा रहा है। आबकारी अधिकारी सुबोध श्रीवास्तव के नेतृत्व में विभाग एक ओर जहां करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व सरकार को दिला रहा है, वहीं दूसरी ओर अवैध शराब व्यापारियों पर अंकुश लगाने में भी सफल हो रहा है। रेस्टोरेंट और बार संस्कृति को एक दिशा देने और शराब संस्कृति को मर्यादा में रखने का उनका प्रयास विभागीय परिपाटियों से कहीं आगे जाकर समाज को भी सुरक्षा देने का कार्य कर रहा है।