आईआरएस सोसायटी में हरियाली से सजी तीज, उमंगों से भरी जिंदगी

-इंदिरापुरम की आईआरएस सोसायटी में पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया तीज महोत्सव
-महिलाओं ने हरियाली और संस्कृति के रंगों से रचा सुरम्य उत्सव

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। सावन की सजी धजी फिजाओं में, हरियाली तीज का त्योहार इंदिरापुरम के अभय खंड-2 स्थित आईआरएस सोसायटी में महिलाओं के चेहरों पर उमंग और उत्साह के रंग बिखेर गया। रविवार को आयोजित भव्य तीज महोत्सव में सैकड़ों महिलाओं ने एकजुट होकर न केवल परंपरा को जीवंत किया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामूहिक सौहार्द का भी संदेश दिया। तीज महोत्सव के इस आयोजन में महिलाओं ने पारंपरिक लहरियेदार परिधानों, मेहंदी लगे हाथों और गहनों की झंकार से फिजाओं में पारंपरिक सुगंध घोल दी। हरे रंग की चूनर में सजी महिलाओं ने सावन के गीतों पर झूला झूलते हुए एक बार फिर लोक परंपरा को आधुनिक समाज के बीच जीवंत कर दिखाया। कविता चौधरी, दीप गौर, आरती शर्मा, जानवी, विदु, रुचि, नेहा, श्वेता, कनिका और गीता समेत सोसायटी की अन्य महिलाओं ने पूरे आयोजन में भागीदारी निभाई। कार्यक्रम में पारंपरिक नृत्य, लोकगीतों पर थिरकते कदम, हंसी-ठिठोली से भरे खेल, फैशन शो और रंगारंग प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया।

कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं ने ‘हर तीज एक पेड़’ संकल्प के तहत अपने घर के आसपास पौधरोपण करने और उन्हें बच्चों की तरह पालने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि तीज सिर्फ श्रृंगार का नहीं, प्रकृति से जुड़ाव का भी पर्व है। हरियाली का संदेश देते हुए सभी महिलाओं ने कहा कि हम अगर प्रकृति को मां मानते हैं, तो उसके श्रृंगार की भी जिम्मेदारी हमारी है। हर पौधा, हर पेड़ हमारे आने वाले कल का संरक्षक है। आईआरएस सोसायटी का यह आयोजन सिर्फ एक पर्व का उत्सव नहीं था, यह नारी शक्ति, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव बन गया। कार्यक्रम में हर उम्र की महिलाओं की सहभागिता देखने को मिली छोटी बच्चियों से लेकर वरिष्ठ महिलाएं भी पूरे जोश से सज-धजकर आईं और उन्होंने मिलकर तीज का आनंद लिया।

महिलाओं ने सजावटी रंगोलियों, फूलों से सजी मंडप और पारंपरिक गीतों के माध्यम से इस आयोजन को भावनात्मक गहराई दी। कार्यक्रम की थीम रही सजाओ मन, सजाओ तन और सजाओ वृक्षों से अपना गगन। आयोजन के समापन पर सभी प्रतिभागी महिलाओं को स्मृति चिह्न, पौधे और उपहार देकर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि हर साल तीज को इसी उत्साह के साथ मनाने की योजना है, ताकि आधुनिकता की दौड़ में कहीं हमारी जड़ें खो न जाएं। झूलों के पास सजे सेल्फी कॉर्नर पर महिलाएं एक-दूसरे के साथ तीज की यादें संजोती दिखीं। महिलाओं की हंसी, गीतों की गूंज और श्रृंगार की झलकियां पूरे परिसर में एक अलग ऊर्जा भर रही थीं।