ट्रंप की टर्र-टर्र बेअसर, अब हर मोर्चे पर डटकर खड़ा है भारत

लेखक : तरुण मिश्र
(समाजसेवी एवं राजनीतिक चिंतक हैं। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर लिखते हैं। देश-विदेश में आयोजित होने वाले व्याख्यानों में एक प्रखर वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। पूर्व में अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री हैं।)

डोनाल्ड ट्रंप की एक बार फिर से अनर्गल बयानबाजी शुरू हो चुकी है। कभी भारत की नीतियों पर सवाल, तो कभी व्यापारिक धमकियों के जरिये अमेरिका अपने पुराने वर्चस्व को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अब भारत 90 के दशक वाला नहीं रहा, जो अमेरिका की आंखों में आंखें डालने से कतराए। अब भारत न सिर्फ वैश्विक मंच पर मजबूती से अपनी बात रख रहा है, बल्कि अमेरिका जैसे देशों को भी माकूल जवाब देने में सक्षम है। ट्रंप का हालिया बयान जिसमें उन्होंने भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही है इस बात का सबूत है कि उन्हें भारत की तेज़ रफ्तार प्रगति हज़म नहीं हो रही। कभी भारत को दबाने की कोशिश की जाती है, तो कभी पाकिस्तान जैसे असफल राष्ट्र के ज़रिये भारत के खिलाफ साजिशें रची जाती हैं। लेकिन भारत अब उन देशों में नहीं आता जो किसी की ‘टर्र-टर्र’ से डर जाए। अब भारत के फैसले स्वाभिमान और वैश्विक जिम्मेदारी के आधार पर तय होते हैं, किसी विदेशी दबाव से नहीं। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत टैरिफ न केवल व्यापारिक अनुशासन का उल्लंघन है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार संतुलन को अस्थिर करने की कोशिश भी है।

इस तरह के कदम यह दिखाते हैं कि ट्रंप भारत को एक समान स्तर का साझेदार नहीं, बल्कि नियंत्रण में रखने लायक देश मानते हैं। लेकिन यह भूल खतरनाक है। इतिहास गवाह है कि अमेरिका ने हर उस देश को परेशान किया है जो आत्मनिर्भर बनने की राह पर था फिर वह ईरान हो, क्यूबा हो या अब भारत। ट्रंप यह दिखाना चाहते हैं कि उनकी विदेश नीति सख्त है, लेकिन यह सख्ती अब खोखली साबित हो रही है। जब भी वे राष्ट्रपति बने हैं, उन्होंने आंतरिक विफलताओं को छुपाने के लिए भारत या चीन जैसे देशों को टारगेट किया है। भारत के खिलाफ पाकिस्तान में पनपते आतंकवाद को लेकर ट्रंप का रवैया हमेशा संदेह के घेरे में रहा है। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर यह बयान देकर और विवाद बढ़ा दिया कि अमेरिका पाकिस्तान के तेल भंडार को विकसित करने में मदद करेगा और “शायद कभी” पाकिस्तान भारत को तेल बेच सके। यह बयान न केवल असंवेदनशील है, बल्कि भारत के साथ उसके रणनीतिक संबंधों को कमजोर करने की एक कोशिश भी है। ट्रंप को यह समझना होगा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध एक संवेदनशील मुद्दा हैं, जिनमें किसी तीसरे देश की हल्की टिप्पणी से भी असंतुलन पैदा हो सकता है।

एक वैश्विक नेता से यह उम्मीद की जाती है कि वह जिम्मेदार बयान दे, ना कि मंच को राजनीतिक तमाशा बना दे। आज का भारत आर्थिक, तकनीकी, सैन्य और कूटनीतिक रूप से इतना सशक्त हो चुका है कि वह किसी भी वैश्विक शक्ति से दो टूक बात करने की स्थिति में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने न केवल आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी, बल्कि “मेक इन इंडिया”, “डिजिटल इंडिया”, “स्टार्टअप इंडिया” जैसे अभियानों से देश को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाया। जहां एक ओर अमेरिका भारत पर टैरिफ बढ़ाकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं भारत ने बुलेट ट्रेन, रक्षा सौदे, सेमीकंडक्टर निर्माण, स्पेस टेक्नोलॉजी और डिजिटल लेन-देन जैसे क्षेत्रों में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। अमेरिका को यह स्वीकार करना होगा कि भारत अब केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक निर्णायक शक्ति है।

भारत आज जी-20, ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन, यूएन सुरक्षा परिषद जैसी संस्थाओं में एक महत्वपूर्ण आवाज़ बन चुका है। अमेरिका के संरक्षणवाद की नीति और ट्रंप की घरेलू राजनीति की रणनीतियों का जवाब अब भारत सिर्फ कूटनीतिक मंचों पर नहीं, सशक्त विचार, विकास और निर्णायक नेतृत्व से भी दे रहा है। भारत की वैक्सीन कूटनीति, आपदा राहत प्रयास, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल, और वैश्विक दक्षिण की आवाज बनने की भूमिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत केवल एक विकासशील राष्ट्र नहीं, एक वैश्विक नेतृत्वकर्ता राष्ट्र बन चुका है। डोनाल्ड ट्रंप को यह समझ लेना चाहिए कि भारत न तो अब पिछलग्गू है, और न ही किसी का मोहताज। भारत एक लोकतांत्रिक, उर्जावान और स्वाभिमानी देश है, जो अपने निर्णय खुद करता है। भारत न सिर्फ जवाब देना जानता है, बल्कि विकास और विवेक के रास्ते पर चलकर हर चुनौती का सामना करना भी जानता है।