जीडीए वीसी अतुल वत्स की योजना है कि प्राधिकरण की खोई हुई जमीन का पता लगाकर उसे जल्द से जल्द ढूंढ़ निकाला जाये। इस योजना से जहां जीडीए की जमीन कब्जामुक्त होगी वहीं, इन संपत्तियों की बिक्री से करोड़ों रुपये की आमदनी होगी। अतुल वत्स द्वारा हर उन उपायों पर काम किया जा रहा है जिससे बेपटरी हुई गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को पुन: पटरी पर लाकर प्रदेश का नंबर-1 विकास प्राधिकरण बनाया जाये।
विजय मिश्रा (उदय भूमि)
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की खोई हुई जमीन को ढूढ़ने का काम शुरू हो चुका है। जीडीए वीसी अतुल वत्स की योजना है कि प्राधिकरण की खोई हुई जमीन का पता लगाकर उसे जल्द से जल्द ढूंढ़ निकाला जाये। इस योजना से जहां जीडीए की जमीन कब्जामुक्त होगी वहीं, इन संपत्तियों की बिक्री से करोड़ों रुपये की आमदनी होगी। अतुल वत्स द्वारा हर उन उपायों पर काम किया जा रहा है जिससे बेपटरी हुई गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को पुन: पटरी पर लाकर प्रदेश का नंबर-1 विकास प्राधिकरण बनाया जाये। जीडीए की जमीन को ढूढ़ने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा नामित कंपनी का चयन किया गया है। इस कंपनी के जरिये लैंड ऑडिट का काम किया जाएगा। लैंड ऑडिट और फिजिकल वेरीफिकेशन के जरिये संपत्तियों का पता चल सकेगा।
विगत कुछ वर्षों में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की स्थिति बद से बदतर हुई। कभी प्रदेश का सबसे मजबूत विकास प्राधिकरण की खराब स्थिति का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि पिछले महीने लखनऊ में हुई प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठक में जीडीए के पास उपलब्धि के रूप में शून्य रहा। भारी भरकम बोझ के तले दबे जीडीए को प्रति माह करोड़ों रुपये ब्याज के रूप में चुकाना पड़ रहा है। शासन की समीक्षा बैठक में अलीगढ़, हापुड़ सरीखे प्राधिकरण को सम्मानित किया गया वहीं, जीडीए के खाते में कुछ भी नहीं आया। जीडीए वीसी का चार्ज संभालने के बाद अतुल वत्स ने चुनौतियों को स्वीकार करते हुए उसे दूर करने का प्रण लिया है। अतुल वत्स का कहना है कि ठोस प्लानिंग और सही ढ़ंग से योजनाओं के क्रियान्वयन से सभी दिक्कतों को दूर किया जा सकता है। लैंड ऑडिट जीडीए की खोई हुई जमीन को पता लगाने में मददगार बनेगा। लैंड ऑडिट के जरिये इस बात का पता चल जाएगा कि कहां-कहां पर जीडीए की जमीन है जिस पर कब्जा है। लैंड ऑडिट दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में यह देखा जाएगा कि जीडीए द्वारा जितनी जमीन का अधिग्रहण किया गया था और क्या उस जमीन को नियोजित कर दिया गया है। दूसरे चरण में यह देखा जाएगा कि जितनी जमीन को नियोजित किया गया है। उतनी जमीन का आवंटन भी किया गया है या नहीं। अगर इन दोनों के आंकड़ों में अंतर पाया जाता है, तो योजनाओं में कहां पर यह जमीन बची हुई है। जहां पर जमीन पर कब्जा मिलेगा उसे कब्जा मुक्त कराया जाएगा।
लैंड ऑडिट के मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में इंदिरापुरम, कौशांबी और प्रताप विहार योजना का चयन किया गया है। सरकार द्वारा नामित एजेंसी के माध्यम से लैंड ऑडिट कराएगा। यह एजेंसी प्रदेश शासन से नामित है और लैंड प्रोजेक्ट से जुड़े मामलों में एक्सपर्ट है। जीडीए वीसी ने बताया कि इन तीनों योजनाओं में लैंड ऑडिट कराने के बाद अन्य योजनाओं में भी लैंड की स्थिति सामने लाने के लिए ऑडिट कराया जाएगा। एजेंसी द्वारा निर्धारित समय अवधि में लैंड ऑडिट की पूरी डिटेल रिपोर्ट जीडीए को सौंपी जाएगी। लैंड ऑडिट से जिन जमीन का पता चलेगा उसे बाद में नीलामी के जरिये बेचा जाएगा। इससे जीडीए को करोड़ों रुपये की प्राप्ति होगी।
















