‘शिकायत नहीं, समाधान चाहिए’: नगर आयुक्त ने अफसरों को दिया 24 घंटे में निस्तारण का टास्क

-311 हेल्पलाइन से लेकर अधिकारियों के सीयूजी नंबर तक-हर कॉल का बनेगा डिजिटल डाटाबेस, रोज होगी सघन समीक्षा
-तद दिवस निस्तारण अनिवार्य, गुणवत्ता से समझौता नहीं-लापरवाही पर तय होगी व्यक्तिगत जवाबदेही
-जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की शिकायतों को समान प्राथमिकता-शहर हित में तेज, पारदर्शी और परिणामकारी कार्रवाई के निर्देश

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शहर में बढ़ती जन अपेक्षाओं और त्वरित सेवा की आवश्यकता को देखते हुए नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने नगर निगम के सभी विभागों को स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए हैं कि जन समस्याओं के समाधान में केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि गुणवत्ता पूर्ण परिणाम सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने कहा है कि नागरिकों से प्राप्त होने वाली प्रत्येक कॉल पर शत-प्रतिशत कार्रवाई होनी चाहिए और उसका व्यवस्थित डाटाबेस तैयार किया जाए, ताकि जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
नगर आयुक्त ने अपर नगर आयुक्तों, सभी विभागाध्यक्षों, जोनल प्रभारियों, अधिशासी अभियंताओं, अवर अभियंताओं तथा संबंधित टीमों के साथ समीक्षा करते हुए कहा कि कॉल के माध्यम से प्राप्त समस्याओं का निस्तारण उसी दिन प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि किसी भी शिकायत को लंबित रखने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जाए और समाधान की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए।

नगर निगम के अंतर्गत संचालित एकीकृत नियंत्रण एवं कमांड सेंटर के माध्यम से 311 हेल्पलाइन पर प्रतिदिन लगभग 100 से 150 शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इसके अतिरिक्त कंट्रोल रूम के जरिए 70 से 80 शिकायतों का प्रतिदिन निस्तारण किया जा रहा है। नगर निगम अधिकारियों के सीयूजी नंबरों पर भी शहरवासियों का सीधा संपर्क बना रहता है, जिसके माध्यम से अनेक समस्याएं सीधे संबंधित अधिकारियों तक पहुंचती हैं। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि चाहे शिकायत किसी भी माध्यम से प्राप्त हो-311 हेल्पलाइन, कंट्रोल रूम या अधिकारियों के मोबाइल नंबर-हर शिकायत का रिकॉर्ड तैयार किया जाए। इसके लिए अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार और अपर नगर आयुक्त जंग बहादुर यादव को निर्देश दिए गए हैं कि सभी विभागों से प्राप्त कॉल विवरण और उनके निस्तारण की सारणी तैयार कर नियमित समीक्षा की जाए।

यह डाटाबेस भविष्य की कार्ययोजना और प्रदर्शन मूल्यांकन में भी सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि केवल शिकायतों की संख्या घटाना लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि नागरिकों को संतोषजनक और स्थायी समाधान मिलना चाहिए। कई बार देखा जाता है कि सतही कार्रवाई के बाद समस्या पुन: उत्पन्न हो जाती है। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। नगर आयुक्त ने यह भी निर्देशित किया कि माननीय पार्षदों और जनप्रतिनिधियों से प्राप्त शिकायतों को भी प्राथमिकता से सुना जाए और उनकी सूचना का त्वरित निस्तारण किया जाए। साथ ही आम नागरिकों की कॉल को भी समान महत्व दिया जाए। उन्होंने कहा कि निगम प्रशासन की छवि नागरिक सेवा से ही बनती है और इसे सुदृढ़ करना सभी अधिकारियों का दायित्व है।

नगर निगम प्रशासन का कहना है कि शहर हित में विभिन्न माध्यमों से प्राप्त जन समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। नियमित मॉनिटरिंग, विभागीय समन्वय और तकनीकी साधनों के उपयोग से शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। नगर आयुक्त ने अंत में दोहराया कि शिकायतों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण ही सुशासन की पहचान है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। निगम प्रशासन का यह सख्त रुख आने वाले समय में शहरवासियों को बेहतर सेवाएं दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।