जब सेवा बनी संकल्प और संवेदना बनी शक्ति-समावेशी शिक्षा को मिला सशक्त आधार

-दिव्यांग बच्चों की मुस्कान से रोशन हुआ सहायक उपकरण वितरण शिविर

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत समेकित शिक्षा की अवधारणा को व्यवहारिक रूप में साकार करते हुए नगर संसाधन केंद्र, राजीव कॉलोनी, करहेड़ा, मोहन नगर में आयोजित दिव्यांग बच्चों का सहायक उपकरण वितरण शिविर सेवा, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक प्रेरणादायक प्रतीक बनकर सामने आया। यह आयोजन केवल सहायक उपकरण वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दिव्यांग बच्चों के आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और भविष्य की संभावनाओं को सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल सिद्ध हुआ। इस विशेष शिविर के माध्यम से कुल 139 दिव्यांग बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण प्रदान किए गए। इनमें श्रवण बाधित बच्चों के लिए बाईस श्रवण यंत्र, छब्बीस व्हील चेयर, आठ तिपहिया साइकिल, छह सहायक कुर्सियां, चौबीस बैसाखियां, छह चलने में सहायक उपकरण, बारह ब्रेल किट, आठ दृष्टिबाधित छड़ें तथा बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के लिए चालीस शिक्षण-अधिगम सामग्री किट वितरित की गईं।

उपकरण प्राप्त करते समय बच्चों के चेहरों पर खिली मुस्कान, आंखों में चमक और आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण थी कि सही संसाधन मिलने पर कोई भी बाधा सफलता के मार्ग में रुकावट नहीं बन सकती। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल ने कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार दिव्यांग बच्चों के सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, सहायक उपकरण, छात्रवृत्ति और हर संभव सहायता सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता है। ऐसे आयोजन सरकार और समाज के बीच सेतु बनते हैं और यह विश्वास दिलाते हैं कि कोई भी दिव्यांग बच्चा अकेला नहीं है।

विशिष्ट अतिथि उप जिलाधिकारी (न्यायिक) मोदीनगर रामशंकर ने कहा कि प्रशासन और शिक्षा विभाग मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ सीधे दिव्यांग बच्चों तक पहुंचे। उन्होंने इस आयोजन को सामाजिक उत्तरदायित्व और सुशासन की प्रेरणादायक मिसाल बताया। विशिष्ट अतिथि महानगर अध्यक्ष, स्ववित्तपोषित प्रगतिशील विद्यालय प्रबंधक संघ एवं अध्यक्ष अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल नरेन्द्र कुमार ‘बिल्लू’ ने कहा कि दिव्यांग बच्चों के लिए किया गया प्रत्येक प्रयास राष्ट्र निर्माण की नींव को मजबूत करता है। जब शिक्षा, समाज और प्रशासन एकजुट होकर कार्य करते हैं, तभी स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है।

विशेष अतिथि साथी फाउंडेशन की संस्थापिका काजल छिब्बर ने कहा कि समाज की सच्ची प्रगति तब होती है जब सबसे कमजोर वर्ग के चेहरे पर मुस्कान आती है। उन्होंने कहा कि आज का यह दृश्य सेवा, समर्पण और मानवीय मूल्यों का सजीव उदाहरण है। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओ. पी. यादव ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि समावेशी शिक्षा केवल एक योजना नहीं, बल्कि एक संवेदनशील सोच और सामाजिक जिम्मेदारी है। शिक्षा विभाग निरंतर प्रयासरत है कि हर दिव्यांग बच्चे तक आवश्यक संसाधन, सहयोग और अवसर पहुंचे। यह शिविर शिक्षा विभाग के सतत प्रयासों का सशक्त प्रमाण है। प्रधानाध्यापक एवं जिला व्यायाम शिक्षक डॉ. राजकुमार ने कहा कि दिव्यांग बच्चों में अपार क्षमताएं निहित होती हैं। यदि उन्हें सही संसाधन, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले, तो वे शिक्षा, खेल और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। जिला समन्वयक (समेकित शिक्षा) एवं समाजसेविका रुचि त्यागी ने कहा कि दिव्यांग बच्चों के लिए किया गया प्रत्येक प्रयास ईश्वर की सच्ची आराधना के समान है। ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक चेतना और करुणा का संचार करते हैं।

कार्यक्रम का मंच संचालन योग गुरु यश पाराशर एवं पूनम शर्मा द्वारा अत्यंत अनुशासित, प्रभावशाली और गरिमामयी ढंग से किया गया, जिससे आयोजन की भव्यता और बढ़ गई। इस संपूर्ण आयोजन की प्रेरणास्रोत और मार्गदर्शक शक्ति जिला समन्वयक (समेकित शिक्षा) डॉ. राकेश कुमार रहे। उनके अथक प्रयास, संवेदनशील दृष्टिकोण और जिम्मेदार नेतृत्व के कारण ही दिव्यांग बच्चों तक आवश्यक सहायक सामग्री समयबद्ध रूप से पहुंच सकी। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा पौधा भेंट कर एवं अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। खंड शिक्षा अधिकारी इश्क लाल एवं विश्वजीत राठी, शिक्षकगण, अभिभावक तथा गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को सामाजिक सहभागिता और समावेशी सोच का उत्कृष्ट उदाहरण बना दिया।